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GK क्विजभारतीय इतिहास

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज: सेट 63

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज़ (सेट 63) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 20 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: सिंधु घाटी सभ्यता, गांधीजी का दक्षिण अफ्रीका प्रवास और प्रारंभिक सत्याग्रह: चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद, बौद्ध और जैन धर्म और अन्य। ये सभी प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: NDA · NDA-I 2025, GATआसान

हड़प्पा की मुहरें बनाने में निम्नलिखित में से किस पदार्थ का प्रयोग किया गया था?

  1. A.बलुआ पत्थर
  2. B.लाजवर्द (लैपिस लाज़ुली)
  3. C.सूर्यकांत (जैस्पर)
  4. D.सेलखड़ी (स्टिएटाइट)
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. सेलखड़ी (स्टिएटाइट)

व्याख्या

सही उत्तर है D, सेलखड़ी (स्टिएटाइट)। हड़प्पा की अधिकांश मुहरें सेलखड़ी से बनी थीं, जो एक नरम पत्थर है और पकाने पर कठोर हो जाता है।

सेलखड़ी को काटना आसान है, इसलिए कारीगर इस पर पशुओं की बारीक आकृतियाँ और हड़प्पा लिपि के चिह्न उकेर पाते थे। उकेरने के बाद मुहरों पर लेप लगाकर उन्हें गर्म किया जाता था, जिससे सतह कठोर और सफ़ेद हो जाती थी। मोहनजोदड़ो, हड़प्पा और लोथल से ऐसी हज़ारों चौकोर मुहरें मिली हैं; सबसे प्रसिद्ध में पशुओं से घिरी एक बैठी आकृति है, जिसे पशुपति मुहर कहा जाता है, और कई पर एकशृंगी पशु बना है। इनका प्रयोग संभवतः व्यापार में माल पर निशान लगाने के लिए होता था।

A गलत है: बलुआ पत्थर कुछ मूर्तियों, जैसे हड़प्पा के धड़, में प्रयुक्त हुआ, मुहरों में नहीं।

B गलत है: अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शाँ से आने वाला लाजवर्द मनकों और आभूषणों में लगता था।

C गलत है: सूर्यकांत भी मनकों का पत्थर था, मुहरों का सामान्य पदार्थ नहीं।

परीक्षा टिप: हड़प्पा मुहरें = सेलखड़ी; नर्तकी की मूर्ति = कांसा; पुरोहित-राजा = सेलखड़ी।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 13 Oct 2021, Shift 3आसान

1903 में दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी ने किस समाचार पत्र की स्थापना की थी?

  1. A.यंग इंडिया
  2. B.इंडियन ओपिनियन
  3. C.स्वराज हिंद
  4. D.नवजीवन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. इंडियन ओपिनियन

व्याख्या

सही उत्तर है B, इंडियन ओपिनियन। गांधीजी ने 1903 में डरबन से इंडियन ओपिनियन शुरू किया, जिसका उद्देश्य दक्षिण अफ्रीका में बसे भारतीयों की बात जनता के सामने रखना था।

यह साप्ताहिक डरबन के निकट फीनिक्स आश्रम में छपता था और अंग्रेजी तथा गुजराती में निकलता था; शुरुआती वर्षों में इसमें तमिल और हिंदी खंड भी रहे। गांधीजी ने बाद में लिखा कि सत्याग्रह जैसा संघर्ष अपने समाचार पत्र के बिना नहीं चलाया जा सकता। इस पत्र में एशियाटिक रजिस्ट्रेशन अधिनियम के विरुद्ध चले आंदोलन पर उनके लेख छपते थे।

विकल्प A, यंग इंडिया, वह अंग्रेजी साप्ताहिक था जिसका संपादन गांधीजी ने 1919 से भारत में किया। विकल्प C, स्वराज हिंद, उनसे जुड़ा कोई पत्र नहीं है। विकल्प D, नवजीवन, उनका गुजराती साप्ताहिक था, जो भी 1919 में भारत में शुरू हुआ।

परीक्षा सुझाव: इंडियन ओपिनियन 1903 दक्षिण अफ्रीका; यंग इंडिया और नवजीवन 1919 भारत।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2026, GS Paper Iमध्यम

जैन धर्म में मान्य जीवन के अस्तित्व के चार मुख्य रूपों में से निम्नलिखित में से कौन-सा शामिल नहीं है?

  1. A.देव (देवता)
  2. B.यक्ष (उपदेवता)
  3. C.मनुष्य (मानव)
  4. D.तिर्यंच (पशु और वनस्पति)
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. यक्ष (उपदेवता)

व्याख्या

सही उत्तर है B, यक्ष (उपदेवता)। जैन धर्म अस्तित्व की चार अवस्थाएँ मानता है, जिन्हें गति कहते हैं, और यक्ष उनमें से एक नहीं है।

जैन दर्शन के अनुसार कर्म से बँधा जीव बार-बार चार में से किसी एक गति में जन्म लेता है: देव (स्वर्ग के प्राणी), मनुष्य, तिर्यंच (पशु, पक्षी, कीट और वनस्पति) तथा नारकी (नरक के प्राणी)। मोक्ष केवल मनुष्य गति से ही संभव है, इसलिए मानव जन्म को बहुत मूल्यवान माना गया है। जैन कला में यक्ष और यक्षिणी तीर्थंकरों के सेवक देवता के रूप में दिखते हैं, पर उन्हें अलग गति नहीं माना जाता।

A गलत है: देव, यानी स्वर्ग के प्राणी, चार गतियों में से एक है।

C गलत है: मनुष्य गति इनमें शामिल है और इसी से मुक्ति संभव मानी गई है।

D गलत है: पशु और वनस्पति वाली तिर्यंच गति भी चार गतियों में आती है।

परीक्षा टिप: जैन धर्म की चार गतियाँ हैं देव, मनुष्य, तिर्यंच और नारकी; ऐसे प्रश्नों में छूटी हुई गति प्रायः नारकी होती है।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 5 Oct 2021, Shift 2आसान

ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड कर्ज़न ने बंगाल का विभाजन किस वर्ष किया था?

  1. A.1905
  2. B.1901
  3. C.1907
  4. D.1911
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 1905

व्याख्या

सही उत्तर है A, 1905। लॉर्ड कर्ज़न ने 19 जुलाई 1905 को बंगाल विभाजन की घोषणा की और यह 16 अक्टूबर 1905 से लागू हुआ, जिससे प्रांत मुस्लिम-बहुल पूर्वी हिस्से और शेष बंगाल में बँट गया। सार्वजनिक रूप से कारण यह बताया गया कि बंगाल प्रशासन के लिए बहुत बड़ा हो गया है, पर असली मकसद हिंदू-मुसलमानों को बाँटकर वहाँ बढ़ते राष्ट्रीय आंदोलन को कमज़ोर करना था। इसके विरोध से स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें विदेशी कपड़े जलाए गए और भारतीय सामान, स्कूल तथा बैंक बढ़ावा पाए; रवींद्रनाथ टैगोर का गीत 'आमार सोनार बांग्ला' इन्हीं दिनों का है। विरोध इतना व्यापक था कि 1911 में विभाजन रद्द कर दिया गया और उसी साल राजधानी कलकत्ता से दिल्ली ले जाई गई। B गलत है क्योंकि 1901 में महारानी विक्टोरिया का निधन हुआ था। C गलत है क्योंकि 1907 कांग्रेस के सूरत विभाजन का वर्ष है। D गलत है क्योंकि 1911 में विभाजन रद्द हुआ था, हुआ नहीं था। परीक्षा टिप: 1905 में कर्ज़न ने घोषित किया, 1911 में हार्डिंग के समय रद्द हुआ।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: NDA · NDA-I 2025, GATआसान

प्राचीन भारत के निम्नलिखित महाजनपदों में से कौन-सा एक कुलीनतंत्र (गणतंत्र) था?

  1. A.वज्जि
  2. B.कोसल
  3. C.गांधार
  4. D.मगध
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. वज्जि

व्याख्या

सही उत्तर है A, वज्जि। वज्जि महाजनपद एक गण-संघ था, जिस पर एक राजा नहीं बल्कि कुलों के प्रमुखों की सभा शासन करती थी।

अंगुत्तर निकाय जैसे बौद्ध ग्रंथों में बताए गए सोलह महाजनपदों में अधिकांश राजतंत्र थे, लेकिन वज्जि और मल्ल गण या संघ थे। वज्जि कई कुलों का संघ था, जिनमें लिच्छवि सबसे प्रसिद्ध थे, और इसकी राजधानी उत्तर बिहार में वैशाली थी। यहां शासन के फैसले सभा में अनेक राजा मिलकर लेते थे, इसलिए इतिहासकार इसे कुलीनतंत्र या आरंभिक गणराज्य कहते हैं। अंततः मगध के अजातशत्रु ने इसे जीत लिया।

B गलत है: श्रावस्ती राजधानी वाला कोसल प्रसेनजित जैसे राजाओं के अधीन राजतंत्र था।

C गलत है: उत्तर-पश्चिम का गांधार, जिसकी राजधानी तक्षशिला थी, राजाओं द्वारा शासित था।

D गलत है: मगध सबसे शक्तिशाली राजतंत्र था, जिस पर हर्यक, शिशुनाग और नंद वंशों ने राज किया।

परीक्षा टिप: सोलह महाजनपदों में दो प्रसिद्ध गण-संघ हैं, वज्जि (राजधानी वैशाली) और मल्ल (कुशीनगर और पावा)।

Q6.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 09 Dec 2022, Shift 1कठिन

हड़प्पा सभ्यता के मेहरगढ़ स्थल से किस प्रकार के घरों के अवशेष मिले हैं?

  1. A.त्रिभुजाकार या वृत्ताकार
  2. B.आयताकार या वृत्ताकार
  3. C.वर्गाकार या आयताकार
  4. D.वृत्ताकार या वर्गाकार
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. वर्गाकार या आयताकार

व्याख्या

सही उत्तर है C, वर्गाकार या आयताकार। मेहरगढ़ की खुदाई में हाथ से बनी मिट्टी की ईंटों से बने वर्गाकार और आयताकार घरों के अवशेष मिले हैं, जिनमें से प्रत्येक छोटे-छोटे कक्षों में बँटा था और ऐसा लगता है कि इन कक्षों का उपयोग अनाज भंडारण के लिए होता था। मेहरगढ़ बलूचिस्तान में बोलन दर्रे के पास काची मैदान में स्थित है और 1974 से जाँ-फ्रांस्वा जारिज ने इसकी खुदाई की। यह उपमहाद्वीप का ज्ञात सबसे प्राचीन कृषक गाँव है, जहाँ गेहूँ और जौ उगाए जाते थे तथा भेड़, बकरी और मवेशी पाले जाते थे, इसलिए इसे परिपक्व हड़प्पाई नगर न मानकर हड़प्पा सभ्यता का नवपाषाणकालीन पूर्वज माना जाता है। यहाँ की कब्रों में लाजवर्द तथा फिरोजा के मनके मिले हैं और दंत चिकित्सा के आरंभिक प्रमाण भी मिलते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि इस काल के किसी भी स्थल पर त्रिभुजाकार घर नहीं मिलते। विकल्प B गलत है, क्योंकि वृत्ताकार आवास कश्मीर के बुर्जहोम जैसे नवपाषाण स्थलों की विशेषता हैं, जहाँ लोग गड्ढों में रहते थे। विकल्प D इसी कारण गलत है। परीक्षा टिप: मेहरगढ़ का अर्थ है खेती का सबसे प्राचीन प्रमाण और भंडारण कक्षों वाले वर्गाकार मिट्टी-ईंट के घर।

Q7.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2019, GS Paper Iकठिन

निम्नलिखित में से किस उत्कीर्ण शिल्प (रिलीफ़) अभिलेख में अशोक के पत्थर पर बने चित्र के साथ 'रान्यो अशोक' (राजा अशोक) का उल्लेख है?

  1. A.कनगनहल्ली
  2. B.साँची
  3. C.शाहबाज़गढ़ी
  4. D.सोहगौरा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कनगनहल्ली

व्याख्या

सही उत्तर है A, कनगनहल्ली। कर्नाटक के कनगनहल्ली स्तूप के एक उत्कीर्ण फलक पर एक राजा अपनी रानियों के साथ दिखाया गया है और उस पर 'राय असोको' (रान्यो अशोक) लिखा है। यह अशोक का एकमात्र ज्ञात चित्र है जिस पर उसका नाम अंकित है।

कनगनहल्ली कलबुर्गी ज़िले में भीमा नदी के किनारे सन्नति के पास है। 1990 के दशक में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की खुदाई में यहाँ पहली सदी ईसा पूर्व से तीसरी सदी ईस्वी का एक बड़ा स्तूप (अधोलोक महा चैत्य) मिला। इसके नक्काशीदार फलकों में ब्राह्मी लेख वाला अशोक का फलक भी है। सन्नति से अशोक के अभिलेखों की प्रतियाँ भी मिली हैं।

B गलत है: साँची में अशोक के स्तंभ और स्तूप हैं, पर सम्राट का नामांकित चित्र नहीं।

C गलत है: पाकिस्तान के शाहबाज़गढ़ी में खरोष्ठी लिपि का प्रमुख शिलालेख है, अशोक की कोई मूर्ति नहीं।

D गलत है: उत्तर प्रदेश का सोहगौरा अकाल राहत से जुड़े ताम्रपत्र अभिलेख के लिए जाना जाता है।

परीक्षा टिप: कनगनहल्ली (कर्नाटक) = 'राय असोको' लिखा अशोक का चित्र; मास्की और गुर्जरा अभिलेख = अशोक का व्यक्तिगत नाम।

Q8.भारतीय इतिहासपूछा गया: CDS · 7 Feb 2021मध्यम

ईस्ट इंडिया कंपनी ने चीन के व्यापार का एकाधिकार कब खोया?

  1. A.1813
  2. B.1833
  3. C.1838
  4. D.1860
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1833

व्याख्या

सही उत्तर है B, 1833। 1833 के चार्टर अधिनियम ने ईस्ट इंडिया कंपनी का अंतिम व्यापारिक विशेषाधिकार, अर्थात चीन के व्यापार और चाय पर उसका एकाधिकार समाप्त कर दिया, और कंपनी को केवल प्रशासनिक निकाय बना दिया, जो ब्रिटिश ताज की ओर से भारत को न्यास में रखती थी। यह बदलाव ब्रिटेन के मुक्त व्यापार समर्थक कारखानेदारों के दबाव से हुआ, जो एशियाई बाजारों में खुली पहुँच चाहते थे। इसी अधिनियम ने बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बनाया, जिस पद पर लॉर्ड विलियम बेंटिक पहले व्यक्ति थे, विधायी शक्ति उसकी परिषद में केंद्रित की और घोषित किया कि किसी भारतीय को धर्म, जन्म, वंश या रंग के आधार पर पद से वंचित नहीं किया जाएगा। विकल्प A गलत है, क्योंकि 1813 के चार्टर अधिनियम ने भारत के व्यापार का एकाधिकार समाप्त किया था, पर चीन और चाय का एकाधिकार स्पष्ट रूप से बनाए रखा। विकल्प C गलत है, क्योंकि 1838 में कोई चार्टर कानून नहीं बना। विकल्प D गलत है, क्योंकि कंपनी का शासन 1858 के भारत शासन अधिनियम से ही समाप्त हो गया था। परीक्षा टिप: 1813 भारत का व्यापार खुला, 1833 चीन और चाय का एकाधिकार समाप्त, 1853 सिविल सेवा में प्रतियोगिता।

Q9.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iआसान

चीनी यात्री फाह्यान (फ़ाश्यान) ने किसके शासनकाल में भारत की यात्रा की थी?

  1. A.समुद्रगुप्त
  2. B.चंद्रगुप्त द्वितीय
  3. C.कुमारगुप्त प्रथम
  4. D.स्कंदगुप्त
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. चंद्रगुप्त द्वितीय

व्याख्या

सही उत्तर है B, चंद्रगुप्त द्वितीय। फाह्यान लगभग 399 से 414 ई. तक भारत में रहा, जब गुप्त साम्राज्य पर चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य का शासन था।

फाह्यान एक चीनी बौद्ध भिक्षु था, जो बौद्ध ग्रंथ, विशेषकर भिक्षु-अनुशासन के नियम, लेने के लिए स्थल मार्ग से भारत आया। उसने कपिलवस्तु, बोधगया, सारनाथ और पाटलिपुत्र जैसे बौद्ध स्थलों की यात्रा की और श्रीलंका होते हुए समुद्री मार्ग से लौटा। उसका वृत्तांत, जिसे फो-क्वो-की कहा जाता है, मध्यदेश को शांत और समृद्ध बताता है: कर हल्के थे, मृत्युदंड कम दिया जाता था, पाटलिपुत्र में निःशुल्क अस्पताल थे, और चांडाल नगरों के बाहर रहते थे। आश्चर्य की बात है कि वह राजा का नाम कहीं नहीं लेता।

A गलत है: चंद्रगुप्त द्वितीय के पिता समुद्रगुप्त का शासन फाह्यान के आने से पहले था।

C गलत है: कुमारगुप्त प्रथम लगभग 415 ई. में गद्दी पर बैठा, जब फाह्यान लौट चुका था।

D गलत है: स्कंदगुप्त ने पाँचवीं सदी के मध्य में शासन किया और हूण आक्रमणों का सामना किया।

परीक्षा टिप: फाह्यान = चंद्रगुप्त द्वितीय (गुप्त); ह्वेनसांग = हर्षवर्धन; इत्सिंग = सातवीं सदी के अंत में नालंदा आया।

Q10.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 15 Oct 2020, Shift 3आसान

महमूद गज़नवी ने भारत पर कितनी बार आक्रमण किया?

  1. A.5
  2. B.15
  3. C.17
  4. D.7
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 17

व्याख्या

सही उत्तर है C, 17। महमूद गज़नवी, जिसने 998 से 1030 तक गज़नवी राज्य पर शासन किया, ने लगभग 1000 से 1027 के बीच भारत पर सत्रह बार आक्रमण किए, ऐसा उल्लेख मिलता है। उसका उद्देश्य लूट था, स्थायी शासन नहीं, इसलिए वह धन-संपत्ति लूटकर ले जाता रहा और पंजाब के पूर्व में कोई व्यवस्थित प्रशासन नहीं छोड़ा। इनमें सबसे चर्चित आक्रमण 1025 में गुजरात के सोमनाथ मंदिर का विध्वंस था; इससे पहले उसने 1001 में हिंदूशाही वंश के जयपाल को हराया और मथुरा, थानेसर तथा कन्नौज के समृद्ध मंदिर-नगरों को लूटा। किताब-उल-हिंद लिखने वाला विद्वान अल-बरूनी और कवि फ़िरदौसी उसके दरबार से जुड़े थे। A गलत है क्योंकि पाँच वास्तविक संख्या से बहुत कम है। B गलत है क्योंकि पंद्रह वह संख्या है जिससे सबसे अधिक भ्रम होता है। D गलत है क्योंकि सात भी मान्य संख्या नहीं है। परीक्षा टिप: महमूद गज़नवी ने 17 आक्रमण किए और 1025 में सोमनाथ पर चढ़ाई की, जबकि मुहम्मद ग़ोरी की 1192 की तराईन विजय से तुर्क शासन शुरू हुआ।

Q11.भारतीय इतिहासपूछा गया: NDA · NDA-II 2022, GATमध्यम

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1639 में दक्षिण भारत में कहां एक व्यापारिक चौकी बनाई थी?

  1. A.कुड्डालोर
  2. B.मद्रासपट्टनम
  3. C.कालहस्ती
  4. D.कारवार
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मद्रासपट्टनम

व्याख्या

सही उत्तर है B, मद्रासपट्टनम। 1639 में अंग्रेज कंपनी को कोरोमंडल तट पर मद्रासपट्टनम में भूमि मिली और वहां फोर्ट सेंट जॉर्ज बनाया गया।

ईस्ट इंडिया कंपनी के फ्रांसिस डे और एंड्रयू कोगन ने 1639 में यह स्थान विजयनगर शासक के अधीन स्थानीय नायक से प्राप्त किया। इसके कुछ समय बाद किलेबंद कोठी, फोर्ट सेंट जॉर्ज, बनकर तैयार हुई, जो आगे चलकर मद्रास शहर बनी; आज यह चेन्नई है। यह पूर्वी तट पर कंपनी की मुख्य बस्ती बनी, जिसने मसूलीपट्टनम का स्थान लिया, और बाद में मद्रास प्रेसीडेंसी का मुख्यालय बनी।

A गलत है: कुड्डालोर, जहां अंग्रेजों ने फोर्ट सेंट डेविड बनाया, 1690 के दशक में उनके हाथ आया।

C गलत है: कालहस्ती आंध्र प्रदेश के भीतरी भाग का मंदिर नगर है, तटीय व्यापारिक चौकी नहीं।

D गलत है: कारवार कर्नाटक में पश्चिमी तट पर है और 1639 की बस्ती वह नहीं थी।

परीक्षा टिप: सूरत कोठी 1613, मद्रास (फोर्ट सेंट जॉर्ज) 1639, बंबई 1668 में मिला, कलकत्ता (फोर्ट विलियम) 1690 का दशक।

Q12.भारतीय इतिहासपूछा गया: RRB ALP · 29 Aug 2018, Shift 3आसान

दिल्ली सल्तनत की पहली महिला शासक रजिया सुल्तान किस वंश से संबंधित थीं?

  1. A.गुलाम वंश
  2. B.खिलजी वंश
  3. C.लोदी वंश
  4. D.मुगल वंश
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. गुलाम वंश

व्याख्या

सही उत्तर है A, गुलाम वंश। रजिया सुल्तान इल्तुतमिश की पुत्री थीं और इल्तुतमिश गुलाम वंश का शासक था, जिसे मामलूक वंश या इल्बरी तुर्क भी कहा जाता है। रजिया ने 1236 से 1240 तक दिल्ली पर शासन किया और वे दिल्ली सल्तनत की गद्दी पर बैठने वाली एकमात्र महिला थीं। इल्तुतमिश ने अपने पुत्रों के स्थान पर उन्हें उत्तराधिकारी चुना, और उन्होंने शासन अपने हाथ में लिया, पर्दा त्यागा, खुला दरबार लगाया तथा स्वयं सेना का नेतृत्व किया। तुर्क सरदारों के दल, चहलगानी, को महिला शासक स्वीकार नहीं थी; 1240 में उन्हें गद्दी से हटाकर मार डाला गया। B गलत है क्योंकि खिलजी वंश 1290 में जलालुद्दीन खिलजी के साथ सत्ता में आया। C गलत है क्योंकि लोदी वंश 1451 से 1526 तक रहा और सल्तनत का अंतिम वंश था। D गलत है क्योंकि मुगल साम्राज्य की स्थापना बाबर ने 1526 में की, रजिया के लगभग तीन शताब्दी बाद। परीक्षा टिप: रजिया - इल्तुतमिश की पुत्री, गुलाम वंश, 1236 से 1240 तक।

Q13.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iआसान

राजा राममोहन राय के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

I. उनके मन में पूर्व की पारंपरिक दार्शनिक प्रणालियों के प्रति गहरा प्रेम और सम्मान था।

II. वे चाहते थे कि उनके देशवासी तर्कसंगत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा सभी स्त्री-पुरुषों की मानवीय गरिमा और सामाजिक समानता के सिद्धांत को अपनाएँ।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल I
  2. B.केवल II
  3. C.I और II दोनों
  4. D.न तो I और न ही II
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. I और II दोनों

व्याख्या

सही उत्तर है C, I और II दोनों। राममोहन राय पूर्व की दार्शनिक विरासत का सम्मान करते थे और साथ ही भारतीयों से तर्क, विज्ञान और सामाजिक समानता अपनाने का आग्रह करते थे।

भारतीय पुनर्जागरण के जनक कहे जाने वाले राममोहन राय (1772-1833) ने उपनिषदों का अध्ययन किया और उनके अंशों का बांग्ला तथा अंग्रेज़ी में अनुवाद करके दिखाया कि वे एक ईश्वर की उपासना सिखाते हैं; वे फ़ारसी, अरबी और संस्कृत चिंतन के भी गहरे जानकार थे। साथ ही वे आधुनिक, तर्कसंगत दृष्टि चाहते थे: उन्होंने अंग्रेज़ी और वैज्ञानिक शिक्षा का समर्थन किया, सती प्रथा के विरुद्ध अभियान चलाया, जिस पर 1829 में रोक लगी, और स्त्रियों के संपत्ति अधिकार की बात की। उन्होंने 1815 में आत्मीय सभा और 1828 में ब्रह्म सभा स्थापित की।

A गलत है: इसमें तर्क और समानता से जुड़ा कथन II छूट गया है।

B गलत है: इसमें पूर्वी दर्शन के प्रति सम्मान वाला कथन I छूट गया है।

D गलत है: दोनों कथन उनके दृष्टिकोण को सही बताते हैं।

परीक्षा टिप: राममोहन राय = आत्मीय सभा 1815, ब्रह्म सभा 1828, सती उन्मूलन 1829; उपनिषद और आधुनिक तर्क, दोनों।

Q14.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 13 Oct 2021, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से किसने 'ईस्ट इंडिया एसोसिएशन' की स्थापना की थी?

  1. A.गोपाल कृष्ण गोखले
  2. B.जॉर्ज यूल
  3. C.व्योमेश चंद्र बनर्जी
  4. D.दादाभाई नौरोजी
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. दादाभाई नौरोजी

व्याख्या

सही उत्तर है D, दादाभाई नौरोजी। दादाभाई नौरोजी ने 1866 में लंदन में ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य भारतीय प्रश्नों को ब्रिटिश जनता और संसद सदस्यों के सामने रखना था; इसकी शाखाएँ जल्द ही बंबई, कलकत्ता और मद्रास में खुल गईं। एक वर्ष पहले उन्होंने लंदन इंडियन सोसाइटी भी शुरू की थी। 'भारत के वयोवृद्ध पुरुष' कहे जाने वाले नौरोजी ने 'पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' लिखी, जिसमें भारत से ब्रिटेन जाने वाले धन के निष्कासन (ड्रेन थ्योरी) को समझाया। वे 1892 में ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय बने और तीन बार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। विकल्प A गलत है, क्योंकि गोपाल कृष्ण गोखले ने 1905 में सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी बनाई। विकल्प B गलत है, क्योंकि जॉर्ज यूल 1888 के इलाहाबाद अधिवेशन में कांग्रेस के पहले अंग्रेज़ अध्यक्ष बने। विकल्प C गलत है, क्योंकि व्योमेश चंद्र बनर्जी 1885 में कांग्रेस के पहले अध्यक्ष थे। परीक्षा टिप: लंदन इंडियन सोसाइटी 1865 और ईस्ट इंडिया एसोसिएशन 1866 — दोनों दादाभाई नौरोजी की।

Q15.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2019, GS Paper Iआसान

स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. इसने स्वदेशी कारीगर शिल्पों और उद्योगों के पुनरुद्धार में योगदान दिया।

2. राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की स्थापना स्वदेशी आंदोलन के एक भाग के रूप में की गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.1 और 2 दोनों
  4. D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1 और 2 दोनों

व्याख्या

सही उत्तर है C, 1 और 2 दोनों। बंगाल विभाजन के विरुद्ध चले स्वदेशी आंदोलन ने भारतीय शिल्प और उद्योग को भी पुनर्जीवित किया और राष्ट्रीय शिक्षा की नींव भी रखी।

आंदोलन की औपचारिक घोषणा 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता टाउन हॉल में हुई। विदेशी माल के बहिष्कार से भारतीय वस्तुओं की माँग बढ़ी, जिससे हथकरघा, कारीगरी शिल्प और नए भारतीय उद्यम पनपे; स्वदेशी कपड़ा मिलें, माचिस और साबुन के कारखाने, चर्मशोधन इकाइयाँ, बैंक और बीमा कंपनियाँ खुलीं, और पी. सी. रे ने बंगाल केमिकल्स की स्थापना की। शिक्षा के क्षेत्र में 1906 में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद बनी, जिसने राष्ट्रीय ढंग से स्कूल-कॉलेज चलाए; बंगाल नेशनल कॉलेज के प्राचार्य अरविंद घोष बने। बंगाल तकनीकी संस्थान भी इसी प्रयास से निकला।

A गलत है: इसमें कथन 2 छूट गया है, जो सही है।

B गलत है: इसमें कथन 1 छूट गया है, जो भी सही है।

D गलत है: दोनों कथन आंदोलन के वास्तविक परिणाम बताते हैं।

परीक्षा टिप: स्वदेशी 1905 = बहिष्कार + स्वदेशी उद्योग + राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (1906)।

Q16.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC CAPF · 8 Aug 2021कठिन

दक्कन सल्तनतों और उनके संबंधित क्षेत्रों के निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है?

  1. A.निजाम शाही : बीजापुर
  2. B.बरीद शाही : बीदर
  3. C.कुतुब शाही : गोलकुंडा
  4. D.इमाद शाही : बरार
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. निजाम शाही : बीजापुर

व्याख्या

सही उत्तर है A, निजाम शाही : बीजापुर, क्योंकि यही युग्म गलत सुमेलित है। निजाम शाही वंश अहमदनगर से शासन करता था, जिसकी नींव 1490 में मलिक अहमद ने रखी थी, जबकि बीजापुर यूसुफ आदिल शाह के आदिल शाही वंश का था। पाँचों दक्कन सल्तनतें लगभग 1490 से 1518 के बीच बहमनी राज्य के विघटन से निकलीं और उनमें से चार ने मिलकर 1565 में तालीकोटा के युद्ध में विजयनगर को कुचल दिया। बीजापुर गोल गुंबज के लिए, गोलकुंडा अपने किले और हीरों के लिए तथा अहमदनगर मुगलों के विरुद्ध चाँद बीबी की रक्षा के लिए याद किया जाता है। विकल्प B सही युग्म है, क्योंकि बरीद शाही वंश के पास बीदर था, जो बहमनी राज्य की अंतिम राजधानी थी। विकल्प C सही युग्म है, क्योंकि कुली कुतुब शाह के कुतुब शाही वंश ने गोलकुंडा पर शासन किया और बाद में हैदराबाद की नींव रखी। विकल्प D सही युग्म है, क्योंकि इमाद शाही वंश के पास बरार था, जो सबसे पहले अलग हुआ और सबसे पहले अहमदनगर में मिला लिया गया। परीक्षा टिप: अहमदनगर निजाम शाही, बीजापुर आदिल शाही, गोलकुंडा कुतुब शाही, बीदर बरीद शाही, बरार इमाद शाही।

Q17.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iमध्यम

असहयोग कार्यक्रम के संबंध में निम्नलिखित विषयों पर विचार कीजिए :

I. विधि न्यायालयों और विदेशी कपड़े का बहिष्कार

II. कठोरता से अहिंसा का पालन

III. उपाधियों और सम्मानों को सार्वजनिक रूप से उपयोग किए बिना अपने पास रखना

IV. विवादों के निपटारे के लिए पंचायतों की स्थापना

उपर्युक्त में से कितने असहयोग कार्यक्रम के भाग थे?

  1. A.केवल एक
  2. B.केवल दो
  3. C.केवल तीन
  4. D.सभी चार
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. केवल तीन

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल तीन। विषय I, II और IV असहयोग कार्यक्रम के भाग थे, पर III नहीं: भारतीयों से उपाधियाँ लौटाने को कहा गया था, उन्हें चुपचाप रखने को नहीं।

यह कार्यक्रम सितंबर 1920 में कलकत्ता के विशेष कांग्रेस अधिवेशन में स्वीकृत हुआ और दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में पुष्ट हुआ। इसके नकारात्मक पक्ष में उपाधियों और मानद पदों का त्याग तथा सरकारी स्कूल-कॉलेजों, न्यायालयों, 1919 के सुधारों वाली विधायिकाओं और विदेशी कपड़े का बहिष्कार था। रचनात्मक पक्ष में राष्ट्रीय स्कूल-कॉलेज, ब्रिटिश अदालतों की जगह विवाद सुलझाने के लिए पंचायतें, खादी और चरखे का प्रसार, हिंदू-मुस्लिम एकता और अस्पृश्यता निवारण था। कठोर अहिंसा मूल शर्त थी, इसलिए चौरी चौरा की हिंसा के बाद फरवरी 1922 में गांधी ने आंदोलन वापस ले लिया।

A गलत है: एक नहीं, तीन विषय कार्यक्रम के भाग थे।

B गलत है: दो नहीं, तीन विषय कार्यक्रम के भाग थे।

D गलत है: विषय III उपाधियाँ लौटाने के वास्तविक आह्वान के विपरीत है; गांधी ने स्वयं कैसर-ए-हिंद पदक लौटाया था।

परीक्षा टिप: असहयोग 1920-22 = उपाधि त्याग, न्यायालय, स्कूल, परिषद और विदेशी कपड़े का बहिष्कार; पंचायत और खादी; चौरी चौरा के बाद समाप्त।

Q18.भारतीय इतिहासपूछा गया: NDA · NDA-II 2018, GATमध्यम

कथन I : भारत शासन अधिनियम, 1935 ने केंद्र में द्वैध शासन लागू किया। कथन II : प्रांतों को प्रांतीय स्वायत्तता प्रदान की गई।

  1. A.दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या है
  2. B.दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं, परंतु कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं है
  3. C.कथन I सत्य है, परंतु कथन II असत्य है
  4. D.कथन I असत्य है, परंतु कथन II सत्य है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. दोनों कथन अलग-अलग सत्य हैं, परंतु कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं है

व्याख्या

सही उत्तर है B, दोनों कथन सत्य हैं, पर कथन II, कथन I की व्याख्या नहीं करता। अधिनियम ने केंद्र में द्वैध शासन और प्रांतों में स्वायत्तता, दो अलग-अलग सुधार किए।

भारत शासन अधिनियम, 1935 ने 1919 के अधिनियम से शुरू हुआ प्रांतों का द्वैध शासन समाप्त कर प्रांतीय स्वायत्तता दी: प्रांतों में निर्वाचित विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी मंत्रियों की सरकारें बनीं। साथ ही इसने द्वैध शासन को केंद्र में ला दिया, जहाँ संघीय विषय आरक्षित (रक्षा, विदेश मामले) गवर्नर-जनरल के अधीन और हस्तांतरित विषय मंत्रियों के अधीन बाँटे गए। केंद्रीय व्यवस्था अखिल भारतीय संघ पर टिकी थी, जो कभी बना ही नहीं। प्रांतीय स्वायत्तता प्रांतों का सुधार था; केंद्र में द्वैध शासन का कारण नहीं।

A गलत है: दोनों सुधार साथ-साथ हैं; एक दूसरे का कारण या व्याख्या नहीं है।

C गलत है: प्रांतीय स्वायत्तता दी गई और 1937 में लागू हुई, इसलिए कथन II सत्य है।

D गलत है: अधिनियम में केंद्र में द्वैध शासन का प्रावधान था, इसलिए कथन I भी सत्य है।

परीक्षा टिप: 1919 अधिनियम = प्रांतों में द्वैध शासन; 1935 अधिनियम = प्रांतीय स्वायत्तता और केंद्र में द्वैध शासन।

Q19.भारतीय इतिहासपूछा गया: NDA · NDA-II 2022, GATआसान

निम्नलिखित में से किसकी रचना हरिषेण ने की थी?

  1. A.गौतमी बलश्री का नासिक अभिलेख
  2. B.समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति
  3. C.विजयसेन की देवपाड़ा प्रशस्ति
  4. D.खारवेल का हाथीगुम्फा अभिलेख
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति

व्याख्या

सही उत्तर है B, समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति। हरिषेण गुप्त शासक समुद्रगुप्त के दरबारी कवि और मंत्री थे और उन्होंने यह प्रशस्ति उन्हीं के सम्मान में लिखी।

प्रयाग प्रशस्ति को इलाहाबाद स्तंभ लेख भी कहते हैं। यह सुंदर संस्कृत में है और उसी स्तंभ पर खुदी है जिस पर अशोक का एक अभिलेख भी है। इसमें उत्तर भारत में समुद्रगुप्त के अभियानों, दक्षिण के राजाओं के विरुद्ध उनके दक्षिणापथ अभियान और कर देने वाले सीमांत शासकों का वर्णन है। इन्हीं विजयों के कारण इतिहासकार वी. ए. स्मिथ ने उन्हें "भारत का नेपोलियन" कहा। उनके शासन का यही मुख्य स्रोत है।

A गलत है: नासिक अभिलेख सातवाहन राजा गौतमीपुत्र शातकर्णि की माता गौतमी बलश्री ने खुदवाया था।

C गलत है: देवपाड़ा प्रशस्ति बंगाल के सेन राजा विजयसेन की प्रशंसा में है और इसके रचयिता कवि उमापतिधर थे।

D गलत है: भुवनेश्वर के पास हाथीगुम्फा अभिलेख कलिंग के जैन राजा खारवेल के कार्यों का वर्णन करता है।

परीक्षा टिप: हरिषेण = समुद्रगुप्त; रविकीर्ति = पुलकेशिन द्वितीय का ऐहोल अभिलेख।

Q20.भारतीय इतिहासपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2025, GS Paper Iआसान

निम्नलिखित में से किसने श्रीविजय राज्य के विरुद्ध एक सफल सैन्य अभियान का नेतृत्व किया था, जो मलय प्रायद्वीप, सुमात्रा, जावा और आसपास के द्वीपों पर शासन करने वाला शक्तिशाली समुद्री राज्य था?

  1. A.अमोघवर्ष (राष्ट्रकूट)
  2. B.प्रतापरुद्र (काकतीय)
  3. C.राजेंद्र प्रथम (चोल)
  4. D.विष्णुवर्धन (होयसल)
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. राजेंद्र प्रथम (चोल)

व्याख्या

सही उत्तर है C, राजेंद्र प्रथम (चोल)। लगभग 1025 ई. में राजेंद्र चोल प्रथम ने एक नौसैनिक अभियान भेजा, जिसने श्रीविजय राज्य के कडारम (केदाह) और अन्य बंदरगाहों पर धावा बोला।

सुमात्रा स्थित श्रीविजय मलक्का जलडमरूमध्य और भारत-चीन के समुद्री व्यापार पर नियंत्रण रखता था। राजराज प्रथम के पुत्र राजेंद्र प्रथम ने यह अभियान संभवतः चोल व्यापारियों और व्यापार मार्गों की रक्षा के लिए चलाया। उसके अभिलेखों में कडारम, पालेमबांग, मलैयूर और इलामुरिदेशम जैसे जीते गए स्थानों और श्रीविजय के राजा संग्राम विजयोत्तुंगवर्मन को बंदी बनाने का उल्लेख है। राजेंद्र गंगा तक भी गया, गंगैकोंड की उपाधि ली और नई राजधानी गंगैकोंड चोलपुरम बनाई। उसे कडारम कोंडान, यानी कडारम का विजेता, भी कहा जाता है।

A गलत है: अमोघवर्ष नौवीं सदी का राष्ट्रकूट राजा था, जो कविराजमार्ग के लिए जाना जाता है, समुद्र पार युद्धों के लिए नहीं।

B गलत है: प्रतापरुद्र वारंगल का अंतिम काकतीय राजा था, जिसे दिल्ली सल्तनत ने हराया।

D गलत है: विष्णुवर्धन बारहवीं सदी का होयसल राजा था, जिसने बेलूर का चेन्नकेशव मंदिर बनवाया।

परीक्षा टिप: राजेंद्र प्रथम = गंगैकोंड, कडारम कोंडान, श्रीविजय अभियान (लगभग 1025); राजराज प्रथम = बृहदीश्वर मंदिर और श्रीलंका।

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