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GK क्विजभारतीय इतिहास

भारतीय इतिहास क्विज: गुप्त साम्राज्य

  • 11 प्रश्न
  • 11 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

भारतीय इतिहास के अंतर्गत "गुप्त साम्राज्य" विषय पर यह क्विज़ 11 बहुविकल्पीय प्रश्न रखता है, जो GK24 के इसी विषय के नोट्स के साथ प्रकाशित सत्यापित प्रश्न हैं, जिनमें 3 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे गए हैं। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और शेष विकल्पों के गलत होने की पूरी व्याख्या दी गई है, ताकि आप केवल उत्तर याद न करें बल्कि उसके पीछे का तथ्य समझें। नोट्स पढ़ने के तुरंत बाद इसे हल करें, निर्धारित समय का पालन करें, और अंत में व्याख्याएं पढ़कर कमजोर बिंदु चिह्नित करें। परीक्षा से पहले दोहराव के लिए इसे दोबारा दें।

इस क्विज के प्रश्न

11 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 12 Oct 2021, Shift 2आसान

320 ईस्वी से 550 ईस्वी के बीच भारत पर किस राजवंश ने शासन किया?

  1. A.मौर्य वंश
  2. B.होयसल वंश
  3. C.मगध वंश
  4. D.गुप्त वंश
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. गुप्त वंश

व्याख्या

सही उत्तर D, गुप्त वंश है। गुप्त साम्राज्यिक शासन परंपरागत रूप से लगभग 320 ईस्वी से गिना जाता है, क्योंकि चंद्रगुप्त प्रथम के राज्यारोहण से आरंभ होने वाले गुप्त संवत् का आरंभ बिंदु यही है, और हूण आक्रमणों के बाद लगभग 550 ईस्वी तक यह समाप्त हो गया। पाठ्यपुस्तकें इसी वंश के साथ ये दोनों तिथियाँ जोड़ती हैं, इसीलिए प्रश्न में यही अवधि दी गई है।

विकल्प A, मौर्य वंश, कहीं अधिक प्राचीन है और लगभग 322 ईसा पूर्व से 185 ईसा पूर्व तक रहा। विकल्प B, होयसल वंश, ग्यारहवीं से चौदहवीं शताब्दी की कर्नाटक की शक्ति थी, जो बेलूर और हलेबीडु के मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प C, मगध, वंश नहीं बल्कि दक्षिण बिहार का क्षेत्र और राज्य है; वहाँ हर्यंक, शिशुनाग, नंद और मौर्य वंशों ने शासन किया, और ये सभी 320 ईस्वी से शताब्दियों पहले के हैं।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 3 July 2019, Shift 2आसान

गुप्तकाल में स्वर्ण सिक्कों को निम्नलिखित में से किस नाम से पुकारा जाता था?

  1. A.रूपक
  2. B.टंका
  3. C.द्रम्म
  4. D.दीनार
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. दीनार

व्याख्या

सही उत्तर D, दीनार है। गुप्तकालीन स्वर्ण सिक्के दीनार कहलाते थे। यह नाम रोमन देनारियस से आया, जो व्यापार और कुषाण सिक्कों के माध्यम से भारत तक पहुँच चुका था। गुप्तों ने किसी भी अन्य प्राचीन भारतीय राजवंश से अधिक स्वर्ण सिक्के ढाले और धनुर्धर, अश्वमेध तथा वीणावादक जैसे उनके प्रकार इस वंश के इतिहास का बड़ा स्रोत हैं।

विकल्प A, रूपक, गुप्तकालीन चाँदी का सिक्का था, जिसे चंद्रगुप्त द्वितीय ने शक क्षत्रपों को हराकर उनके चाँदी के क्षेत्र पर अधिकार करने के बाद चलाया। विकल्प B, टंका, दिल्ली सल्तनत का चाँदी का सिक्का था, जिसे तेरहवीं शताब्दी में इल्तुतमिश ने मानक रूप दिया। विकल्प C, द्रम्म, पश्चिमी और मध्य भारत के कई गुप्तोत्तर तथा पूर्व मध्यकालीन वंशों का चाँदी का सिक्का था, गुप्तों का स्वर्ण सिक्का कभी नहीं रहा।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: दिल्ली · 8 Dec 2020, Shift 2मध्यम

गुप्त वंश का पहला शासक कौन था जिसने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की?

  1. A.रामगुप्त
  2. B.चंद्रगुप्त प्रथम
  3. C.समुद्रगुप्त
  4. D.स्कंदगुप्त
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. चंद्रगुप्त प्रथम

व्याख्या

सही उत्तर B, चंद्रगुप्त प्रथम है। इस परिवार के पहले दो सदस्य श्रीगुप्त और घटोत्कच केवल महाराज की साधारण उपाधि रखते थे, जिसे इतिहासकार उनके अधीनस्थ होने का संकेत मानते हैं। चंद्रगुप्त प्रथम पहला शासक था जिसने महाराजाधिराज अर्थात महान राजाओं का राजा की साम्राज्यिक उपाधि ली और 319-320 ईस्वी का गुप्त संवत् उसी के राज्यारोहण से गिना जाता है। लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से उसका विवाह राजा-रानी प्रकार के स्वर्ण सिक्कों पर अंकित है।

विकल्प A, रामगुप्त, मुख्यतः देवीचंद्रगुप्तम् नाटक और कुछ अभिलेखों से ज्ञात अस्पष्ट शासक है और उसने वंश की स्थिति नहीं बढ़ाई। विकल्प C, समुद्रगुप्त, चंद्रगुप्त प्रथम का पुत्र था और उसे यह उपाधि विरासत में मिली, उसने आरंभ नहीं की। विकल्प D, स्कंदगुप्त, लगभग डेढ़ सदी बाद का शासक है और हूणों को रोकने के लिए याद किया जाता है।

Q4.भारतीय इतिहासमध्यम

इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख, जिसे प्रयाग प्रशस्ति भी कहा जाता है, किस दरबारी कवि ने रचा था?

  1. A.कालिदास
  2. B.हरिषेण
  3. C.बाणभट्ट
  4. D.विशाखदत्त
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. हरिषेण

व्याख्या

सही उत्तर B, हरिषेण है। हरिषेण समुद्रगुप्त का दरबारी कवि और उच्च अधिकारी था और उसने प्रयाग प्रशस्ति की रचना अलंकृत संस्कृत में, कुछ पद्य और कुछ गद्य में की। यह अभिलेख उसी स्तंभ पर खुदा है जिस पर पहले से अशोक के अभिलेख थे, इसलिए एक ही पत्थर पर लगभग छह सौ वर्ष के अंतर वाले दो अभिलेख सुरक्षित हैं। समुद्रगुप्त के अभियानों का यह सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है।

विकल्प A, कालिदास, इस युग का महानतम संस्कृत कवि और नाटककार था और परंपरा उसे चंद्रगुप्त द्वितीय के दरबार से जोड़ती है, पर उसने कोई अभिलेख नहीं लिखा। विकल्प C, बाणभट्ट, सातवीं शताब्दी का है और हर्षवर्धन का दरबारी कवि था, जिसने हर्षचरित लिखा; नाम की समानता के कारण छात्र हरिषेण को हर्ष के कवि से भ्रमित कर देते हैं। विकल्प D, विशाखदत्त, ने मुद्राराक्षस और देवीचंद्रगुप्तम् नाटक लिखे।

Q5.भारतीय इतिहासमध्यम

किस गुप्त शासक ने पश्चिमी भारत के शक क्षत्रपों को पराजित कर शकारि उपाधि धारण की?

  1. A.समुद्रगुप्त
  2. B.कुमारगुप्त प्रथम
  3. C.चंद्रगुप्त द्वितीय
  4. D.स्कंदगुप्त
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. चंद्रगुप्त द्वितीय

व्याख्या

सही उत्तर C, चंद्रगुप्त द्वितीय है। उसने गुजरात, काठियावाड़ और मालवा पर शक क्षत्रपों के लंबे शासन का अंत किया, शकारि अर्थात शकों का शत्रु उपाधि ली और विक्रमादित्य नाम से भी जाना जाता है। इस विजय से गुप्तों को पश्चिमी समुद्री बंदरगाह और वहाँ से होने वाले व्यापार का राजस्व मिला, और इसी कारण उसने उस क्षेत्र के लिए शक सिक्कों के आदर्श पर चाँदी के रूपक चलाए।

विकल्प A, समुद्रगुप्त, ने गंगा के मैदान और दक्कन में अभियान किए पर पश्चिमी क्षत्रपों को नहीं छेड़ा; प्रयाग प्रशस्ति में शक केवल समर्पण करने वालों में गिने गए हैं। विकल्प B, कुमारगुप्त प्रथम, नालंदा की स्थापना और हूणों के पहले दबाव के लिए याद किया जाता है। विकल्प D, स्कंदगुप्त, ने हूणों से युद्ध किया और सुदर्शन झील की मरम्मत करवाई, शकों से नहीं लड़ा।

Q6.भारतीय इतिहासआसान

चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में भारत आने वाला चीनी बौद्ध यात्री कौन था?

  1. A.ह्वेनसांग
  2. B.फाह्यान
  3. C.इत्सिंग
  4. D.मेगस्थनीज
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. फाह्यान

व्याख्या

सही उत्तर B, फाह्यान है। फाह्यान बौद्ध ग्रंथों की खोज में भारत आया और चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में गुप्त साम्राज्य में घूमा। उसके विवरण में एक शांत राज्य दिखता है जहाँ दंड हल्के थे, लोग बिना अनुमति पत्र के यात्रा कर सकते थे, पाटलिपुत्र में दानशाला और चिकित्सालय चलते थे, पर चांडालों को नगर के बाहर रहना पड़ता था और चलते समय लकड़ी बजाकर संकेत देना पड़ता था।

विकल्प A, ह्वेनसांग, दो शताब्दी बाद सातवीं सदी में हर्षवर्धन के शासनकाल में आया और नालंदा में अध्ययन किया। विकल्प C, इत्सिंग, भी सातवीं शताब्दी का है और उसने भारत तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के द्वीपों की मठ परंपरा पर लिखा। विकल्प D, मेगस्थनीज, चीनी था ही नहीं; वह सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था, मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में रहा और इंडिका लिखी।

Q7.भारतीय इतिहासमध्यम

नालंदा महाविहार की स्थापना का श्रेय किस गुप्त शासक को दिया जाता है?

  1. A.समुद्रगुप्त
  2. B.चंद्रगुप्त द्वितीय
  3. C.कुमारगुप्त प्रथम
  4. D.स्कंदगुप्त
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. कुमारगुप्त प्रथम

व्याख्या

सही उत्तर C, कुमारगुप्त प्रथम है। महेंद्रादित्य उपाधि धारण करने वाले कुमारगुप्त प्रथम को वर्तमान बिहार में नालंदा महाविहार की स्थापना का श्रेय दिया जाता है। बाद में हर्षवर्धन और पाल शासकों ने इसे और दान दिए और यह एशिया का सबसे बड़ा आवासीय बौद्ध शिक्षा केंद्र बना, जो बारहवीं शताब्दी के अंत में नष्ट हुआ। इसकी प्रसिद्धि का बड़ा आधार सातवीं शताब्दी के यात्री ह्वेनसांग का विस्तृत विवरण है, जिसने यहीं अध्ययन किया।

विकल्प A, समुद्रगुप्त, विजयों और प्रयाग प्रशस्ति के लिए याद किया जाता है। विकल्प B, चंद्रगुप्त द्वितीय, शक विजय, वाकाटक वैवाहिक संबंध और फाह्यान की यात्रा से जुड़ा है, और फाह्यान नालंदा का महान विश्वविद्यालय के रूप में वर्णन नहीं करता। विकल्प D, स्कंदगुप्त, ने अपना शासनकाल हूणों से साम्राज्य की रक्षा और सौराष्ट्र में सुदर्शन झील की मरम्मत में बिताया।

Q8.भारतीय इतिहासकठिन

जूनागढ़ शिलालेख में सुदर्शन झील की मरम्मत का उल्लेख किस गुप्त शासक के संदर्भ में मिलता है?

  1. A.स्कंदगुप्त
  2. B.चंद्रगुप्त प्रथम
  3. C.समुद्रगुप्त
  4. D.कुमारगुप्त प्रथम
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. स्कंदगुप्त

व्याख्या

सही उत्तर A, स्कंदगुप्त है। सौराष्ट्र में गिरनार के पास स्थित सुदर्शन झील एक कृत्रिम जलाशय थी, जिसे मौर्यकाल में बनवाया गया और बाद में एक से अधिक बार सुधारा गया। जूनागढ़ की चट्टान पर इससे जुड़े तीन अभिलेख हैं: अशोक के अभिलेख, पहले की मरम्मत का उल्लेख करने वाला शक शासक रुद्रदामन प्रथम का अभिलेख, और स्कंदगुप्त का अभिलेख जिसमें बाँध टूटने के बाद उसके राज्यपाल द्वारा पुनर्निर्माण दर्ज है। स्कंदगुप्त अन्यथा हूणों को खदेड़ने के लिए जाना जाता है।

विकल्प B, चंद्रगुप्त प्रथम, एक शताब्दी से भी पहले का शासक है और उसका ऐसा कोई अभिलेख नहीं है। विकल्प C, समुद्रगुप्त, इलाहाबाद स्तंभ से ज्ञात होता है, जूनागढ़ से नहीं। विकल्प D, कुमारगुप्त प्रथम, बिलसड़ स्तंभ और दामोदरपुर ताम्रपत्रों से ज्ञात है, और उसी के शासनकाल में सीमा पर हूणों का दबाव पहली बार दिखा।

Q9.भारतीय इतिहासआसान

किस गुप्तकालीन खगोलशास्त्री ने 499 ईस्वी की अपनी रचना में कहा कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है?

  1. A.वराहमिहिर
  2. B.ब्रह्मगुप्त
  3. C.आर्यभट
  4. D.भास्कर द्वितीय
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. आर्यभट

व्याख्या

सही उत्तर C, आर्यभट है। आर्यभट ने तेईस वर्ष की आयु में 499 ईस्वी में आर्यभटीय पूरा किया। उसमें उसने कहा कि तारों की दैनिक गति वास्तव में पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने के कारण दिखाई देती है, सूर्य और चंद्र ग्रहण को राहु-केतु का कार्य न मानकर छाया से समझाया, और वृत्त की परिधि तथा व्यास के अनुपात का बहुत निकट मान दिया।

विकल्प A, वराहमिहिर, छठी शताब्दी का है और उसने बृहत्संहिता तथा पंचसिद्धांतिका लिखीं, जो शकुन, फलित ज्योतिष और पाँच पूर्ववर्ती खगोलीय पद्धतियों पर हैं। विकल्प B, ब्रह्मगुप्त, ने 628 ईस्वी में ब्रह्मस्फुटसिद्धांत लिखा और शून्य तथा ऋणात्मक संख्याओं के नियमों के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प D, भास्कर द्वितीय, बारहवीं शताब्दी का गणितज्ञ है और सिद्धांत शिरोमणि का रचयिता है, जिसका एक भाग लीलावती है।

Q10.भारतीय इतिहासकठिन

गुप्त प्रशासन में प्रांत को भुक्ति कहा जाता था और उसका प्रमुख अधिकारी कहलाता था:

  1. A.विषयपति
  2. B.उपरिक
  3. C.ग्रामिक
  4. D.राजुक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. उपरिक

व्याख्या

सही उत्तर B, उपरिक है। गुप्त साम्राज्य भुक्ति नामक प्रांतों में बँटा था और हर भुक्ति का शासन उपरिक नामक राज्यपाल के हाथ में रहता था, जो प्रायः राजपरिवार का ही सदस्य होता था। भुक्ति आगे जिलों में बँटी थी और यह पूरी व्यवस्था मुख्यतः बंगाल के दामोदरपुर ताम्रपत्रों से ज्ञात होती है, जिनमें नगरश्रेष्ठी, सार्थवाह, प्रथम कुलिक और प्रथम कायस्थ वाली नगर परिषद का भी उल्लेख है।

विकल्प A, विषयपति, विषय अर्थात जिले का अधिकारी था, जो भुक्ति से एक स्तर नीचे था। विकल्प C, ग्रामिक, गाँव का मुखिया था, जो व्यवस्था की सबसे निचली इकाई थी। विकल्प D, राजुक, मौर्य प्रशासन का पद है, जहाँ अशोक ने राजुकों को राजस्व और न्याय दोनों अधिकार दिए थे, और गुप्त प्रांतों के लिए यह शब्द प्रयुक्त नहीं होता।

Q11.भारतीय इतिहासमध्यम

निम्नलिखित में से कौन गुप्तकाल में बना नागर शैली का प्रारंभिक पाषाण मंदिर है?

  1. A.एलोरा का कैलाश मंदिर
  2. B.देवगढ़ का दशावतार मंदिर
  3. C.तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर
  4. D.कोणार्क का सूर्य मंदिर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. देवगढ़ का दशावतार मंदिर

व्याख्या

सही उत्तर B, देवगढ़ का दशावतार मंदिर है, जो उत्तर प्रदेश में है। छठी शताब्दी के आरंभ में बना यह उन पहले पाषाण मंदिरों में है जिनके गर्भगृह पर शिखर है, और यही विशेषता नागर शैली की पहचान है। शेषशायी विष्णु और नर-नारायण के इसके फलक गुप्तकालीन मूर्तिकला के मानक उदाहरण हैं। इसके साथ प्रायः भीतरगाँव का ईंट मंदिर और साँची का मंदिर संख्या 17 भी गिनाए जाते हैं।

विकल्प A, एलोरा का कैलाश मंदिर, आठवीं शताब्दी में राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम के समय चट्टान काटकर बनाया गया। विकल्प C, तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर, चोल शासक राजराज प्रथम का द्रविड़ शैली का मंदिर है, जो 1010 ईस्वी में पूरा हुआ। विकल्प D, कोणार्क का सूर्य मंदिर, तेरहवीं शताब्दी में पूर्वी गंग शासक नरसिंहदेव प्रथम ने बनवाया।

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