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GK क्विजसामान्य विज्ञान

सामान्य विज्ञान मिश्रित क्विज: सेट 78

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

सामान्य विज्ञान मिश्रित क्विज़ (सेट 78) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 16 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: गति, बल और गति के नियम, जल रसायन: कठोर जल, भारी जल और जल शोधन, विद्युत और चुंबकत्व और अन्य। इनमें से 17 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · NDA-I 2018, GATआसान

एक वस्तु एकसमान त्वरण a से गतिमान है। इसका प्रारंभिक वेग u है और समय t के बाद इसका वेग v है। इसकी गति का समीकरण v = u + at है। वेग (y-अक्ष पर)-समय (x-अक्ष पर) ग्राफ एक सीधी रेखा होगा

  1. A.जो मूल बिंदु से होकर गुजरती है
  2. B.जिसका x-अंतःखंड u है
  3. C.जिसका y-अंतःखंड u है
  4. D.जिसकी ढाल u है
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. जिसका y-अंतःखंड u है

व्याख्या

सही उत्तर है C, जिसका y-अंतःखंड u है। समीकरण v = u + at का रूप y = c + mx है, इसलिए ग्राफ एक सीधी रेखा है जो वेग-अक्ष को u पर काटती है और जिसकी ढाल a है।

वेग-समय ग्राफ में समय x-अक्ष पर और वेग y-अक्ष पर होता है। t = 0 पर वेग u है, इसलिए रेखा y-अक्ष पर बिंदु (0, u) से शुरू होती है; यही मान y-अंतःखंड है। वेग-समय ग्राफ की ढाल त्वरण बताती है, यहां a, और रेखा के नीचे का क्षेत्रफल विस्थापन बताता है। केवल तभी, जब वस्तु विराम से चले (u = 0), रेखा मूल बिंदु से होकर गुजरती है।

A गलत है: रेखा मूल बिंदु से तभी गुजरती है जब u = 0 हो, जो यहां नहीं दिया गया।

B गलत है: u वेग का मान है, जो y-अक्ष पर पढ़ा जाता है, x-अंतःखंड नहीं।

D गलत है: रेखा की ढाल त्वरण a है, प्रारंभिक वेग u नहीं।

परीक्षा टिप: v-t ग्राफ में ढाल = त्वरण, ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = विस्थापन, y-अंतःखंड = प्रारंभिक वेग।

Q2.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2023, Paper Iमध्यम

सभी घुलनशील खनिज लवणों से मुक्त शुद्ध, विखनिजीकृत (demineralized) जल निम्नलिखित में से किस विधि से प्राप्त किया जाता है?

  1. A.जल को सूक्ष्म-निस्यंदन (माइक्रोफिल्ट्रेशन) झिल्ली से गुजारकर
  2. B.कैलगॉन विधि
  3. C.जल को धनायन-विनिमय और ऋणायन-विनिमय रेज़िन के स्तंभ से गुजारकर
  4. D.उबालकर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. जल को धनायन-विनिमय और ऋणायन-विनिमय रेज़िन के स्तंभ से गुजारकर

व्याख्या

सही उत्तर है C, जल को धनायन-विनिमय और ऋणायन-विनिमय रेज़िन के स्तंभ से गुजारकर। दोनों रेज़िन मिलकर हर घुला हुआ आयन निकाल देते हैं और विखनिजीकृत जल बचता है।

धनायन-विनिमय रेज़िन (RH) में Ca2+, Mg2+ और Na+ जैसे धातु आयन H+ आयनों से बदल जाते हैं। फिर जल ऋणायन-विनिमय रेज़िन (R'OH) से गुजरता है, जहाँ क्लोराइड, सल्फेट और बाइकार्बोनेट आयन OH− आयनों से बदल जाते हैं। निकले हुए H+ और OH− मिलकर जल बना लेते हैं, इसलिए कोई लवण नहीं बचता। यह विआयनित जल प्रयोगशालाओं, बैटरियों और बॉयलरों में काम आता है।

A गलत है: माइक्रोफिल्ट्रेशन झिल्ली निलंबित कणों और सूक्ष्मजीवों को रोकती है, घुले लवणों को नहीं।

B गलत है: कैलगॉन (सोडियम हेक्सामेटाफॉस्फेट) केवल कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों को बाँधता है; लवण जल में घुले रहते हैं।

D गलत है: उबालने से केवल बाइकार्बोनेट वाली अस्थायी कठोरता दूर होती है; क्लोराइड और सल्फेट बने रहते हैं।

परीक्षा टिप: धनायन रेज़िन H+ देता है, ऋणायन रेज़िन OH− देता है; दोनों साथ = विखनिजीकृत (विआयनित) जल।

Q3.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · NDA-I 2022, GATमध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन दो विद्युत आवेशों के बीच धनात्मक बल के अस्तित्व की सही व्याख्या करता है/करते हैं?

1. दोनों आवेश धनात्मक हैं।

2. दोनों आवेश ऋणात्मक हैं।

3. दोनों आवेश विपरीत प्रकार के हैं।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.केवल 1 और 2
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. केवल 1 और 2

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल 1 और 2। कूलॉम के नियम के अनुसार बल F = kq₁q₂/r² तब धनात्मक, यानी प्रतिकर्षी, आता है जब दोनों आवेशों का चिह्न समान हो।

कूलॉम के नियम में बल का चिह्न दोनों आवेशों के गुणनफल पर निर्भर करता है। दो धनात्मक आवेशों का गुणनफल धनात्मक होता है, और दो ऋणात्मक आवेशों का भी, क्योंकि ऋण गुणा ऋण धन होता है। धनात्मक मान का अर्थ है प्रतिकर्षण बल: सजातीय आवेश एक-दूसरे को दूर धकेलते हैं। जब एक आवेश धनात्मक और दूसरा ऋणात्मक हो, तो गुणनफल ऋणात्मक होता है और बल आकर्षी होता है: विजातीय आवेश एक-दूसरे को खींचते हैं।

A गलत है: दो धनात्मक आवेश धनात्मक बल देते हैं, पर दो ऋणात्मक आवेश भी देते हैं।

B गलत है: इसमें दो धनात्मक आवेशों वाली स्थिति छूट गई है।

D गलत है: विपरीत आवेशों का गुणनफल ऋणात्मक, यानी आकर्षी बल, होता है, इसलिए कथन 3 गलत है।

परीक्षा टिप: सजातीय आवेश प्रतिकर्षित (धनात्मक बल), विजातीय आवेश आकर्षित (ऋणात्मक बल); बल 1/r² के अनुसार बदलता है।

Q4.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · NDA-II 2025, GATमध्यम

एक पारसेक, खगोलीय इकाई (A.U.) में लगभग कितना होता है?

  1. A.2 × 10³ A.U.
  2. B.2 × 10⁴ A.U.
  3. C.2 × 10⁵ A.U.
  4. D.2 × 10⁶ A.U.
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2 × 10⁵ A.U.

व्याख्या

सही उत्तर है C, 2 × 10⁵ A.U.। एक पारसेक लगभग 2,06,265 खगोलीय इकाइयों के बराबर होता है, जो लगभग 2 × 10⁵ A.U. है।

खगोलीय इकाई पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी है, लगभग 1·5 × 10¹¹ m। पारसेक वह दूरी है जिस पर एक खगोलीय इकाई एक आर्क-सेकंड का कोण बनाती है; इसका नाम "पैरालैक्स ऑफ वन आर्कसेकंड" से बना है। एक रेडियन में लगभग 2,06,265 आर्क-सेकंड होते हैं, इसलिए एक पारसेक में उतनी ही खगोलीय इकाइयां होती हैं। यह लगभग 3·26 प्रकाश वर्ष या 3·1 × 10¹⁶ m के बराबर है और तारों के बीच की दूरियां मापने में काम आता है।

A गलत है: 2,000 A.U. सही मान से लगभग सौ गुना छोटा है।

B गलत है: 20,000 A.U. भी पारसेक से दस गुना कम है।

D गलत है: 2 × 10⁶ A.U. पारसेक से दस गुना अधिक है।

परीक्षा टिप: 1 पारसेक ≈ 2·06 × 10⁵ A.U. ≈ 3·26 प्रकाश वर्ष; क्रम याद रखें: A.U. < प्रकाश वर्ष < पारसेक।

Q5.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2021, Paper Iआसान

निम्नलिखित में से कौन-सा संयोजी ऊतक नहीं है?

  1. A.स्नायुबंधन (लिगामेंट)
  2. B.कंडरा (टेंडन)
  3. C.चिकनी पेशी
  4. D.उपास्थि (कार्टिलेज)
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. चिकनी पेशी

व्याख्या

सही उत्तर है C, चिकनी पेशी। चिकनी पेशी पेशीय ऊतक है, जो चार मूल जंतु ऊतकों में से एक है; यह संयोजी ऊतक नहीं है।

जंतु ऊतक चार प्रकार के होते हैं: उपकला, संयोजी, पेशीय और तंत्रिका। संयोजी ऊतक में कोशिकाएँ एक आधात्री (मैट्रिक्स) में फैली होती हैं और ये दूसरे अंगों को जोड़ते या सहारा देते हैं; अस्थि, उपास्थि, रक्त, एरिओलर ऊतक, वसा ऊतक, स्नायुबंधन और कंडरा इसी में आते हैं। चिकनी पेशी तर्कु आकार की, बिना धारियों वाली कोशिकाओं से बनी होती है और आमाशय, आँत, रक्त वाहिकाओं तथा परितारिका की दीवारों में हमारी इच्छा के बिना सिकुड़ती है।

A गलत है: स्नायुबंधन हड्डी को हड्डी से जोड़ने वाला सघन संयोजी ऊतक है।

B गलत है: कंडरा पेशी को हड्डी से जोड़ने वाला सघन संयोजी ऊतक है।

D गलत है: उपास्थि ठोस आधात्री वाला संयोजी ऊतक है, जो नाक, कान, श्वासनली और जोड़ों में मिलता है।

परीक्षा टिप: स्नायुबंधन = हड्डी से हड्डी, कंडरा = पेशी से हड्डी; पेशियाँ अलग ऊतक हैं।

Q6.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2020, Paper Iकठिन

निम्नलिखित में से कौन-सा घटक पेंट का अंग नहीं है?

  1. A.तारपीन का तेल (थिनर)
  2. B.पॉली-हाइड्रॉक्सी फ़ीनॉल (एंटी-स्किनिंग एजेंट)
  3. C.थायोयूरिया (त्वरक)
  4. D.टाइटेनियम डाइऑक्साइड (वर्णक)
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. थायोयूरिया (त्वरक)

व्याख्या

सही उत्तर है C, थायोयूरिया (त्वरक)। त्वरक रबर के वल्कनीकरण को तेज़ करते हैं; वे पेंट का हिस्सा नहीं होते।

तेल वाले पेंट में ये घटक होते हैं: रंग और ढकने की क्षमता देने वाला वर्णक, परत को बाँधने वाला वाहक या सूखने वाला तेल जैसे अलसी का तेल, फैलाने में आसानी देने वाला थिनर, जल्दी सुखाने वाला ड्रायर, गाढ़ापन देने वाले फ़िलर, और डिब्बे में ऊपर परत जमने से रोकने वाला एंटी-स्किनिंग एजेंट। टाइटेनियम डाइऑक्साइड सबसे अधिक प्रयुक्त सफ़ेद वर्णक है, तारपीन पारंपरिक थिनर है और पॉली-हाइड्रॉक्सी फ़ीनॉल एंटी-स्किनिंग एजेंट के रूप में काम आते हैं। थायोयूरिया जैसे यौगिक रबर उद्योग से जुड़े हैं, जहाँ त्वरक सल्फ़र द्वारा रबर के क्रॉस-लिंक बनने का समय घटाते हैं।

A गलत है: तारपीन का तेल पेंट का सामान्य थिनर है।

B गलत है: पॉली-हाइड्रॉक्सी फ़ीनॉल पेंट में एंटी-स्किनिंग एजेंट हैं।

D गलत है: टाइटेनियम डाइऑक्साइड पेंट का मुख्य सफ़ेद वर्णक है।

परीक्षा टिप: पेंट = वर्णक + वाहक (अलसी का तेल) + थिनर (तारपीन) + ड्रायर + फ़िलर + एंटी-स्किनिंग एजेंट।

Q7.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2021, Paper Iआसान

निम्नलिखित में से किस पादप ऊतक में बड़े वायु-स्थान होते हैं?

  1. A.दृढ़ोतक (स्क्लेरेनकाइमा)
  2. B.विभज्योतक (मेरिस्टेम)
  3. C.स्थूलकोणोतक (कोलेनकाइमा)
  4. D.वायूतक (एरेनकाइमा)
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. वायूतक (एरेनकाइमा)

व्याख्या

सही उत्तर है D, वायूतक (एरेनकाइमा)। एरेनकाइमा मृदूतक का एक प्रकार है, जिसकी कोशिकाओं के बीच हवा से भरे बड़े स्थान होते हैं।

ये वायु-गुहाएँ जलकुंभी, कमल और हाइड्रिला जैसे जलीय पौधों को पानी पर तैरने में मदद करती हैं और पानी में डूबी जड़ों व तनों तक ऑक्सीजन पहुँचाती हैं। धान और दलदली पौधों की जड़ों में भी जलभराव होने पर एरेनकाइमा बनता है। नाम से ही याद रहता है: 'एयर' यानी हवा।

A गलत है: स्क्लेरेनकाइमा की कोशिकाएँ मृत, मोटी लिग्निनयुक्त भित्ति वाली और सटी हुई होती हैं; यह कठोरता देता है, जैसे नारियल का रेशा।

B गलत है: विभज्योतक की कोशिकाएँ छोटी, जीवित और विभाजित होने वाली होती हैं, उनके बीच कोई अंतराकोशिकीय स्थान नहीं होता।

C गलत है: कोलेनकाइमा की जीवित कोशिकाएँ कोनों पर मोटी होती हैं और बीच में बहुत कम स्थान होता है; यह तनों को लचीलापन देता है।

परीक्षा टिप: एरेनकाइमा = वायु-स्थान और तैरना; स्क्लेरेनकाइमा = कठोरता; कोलेनकाइमा = लचीलापन।

Q8.सामान्य विज्ञानपूछा गया: हरियाणा · 29 Feb 2020, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से कौन पौधों को प्रभावित करने वाला जीवाणु जनित रोग है?

  1. A.क्राउन गॉल
  2. B.मोज़ेक
  3. C.कंडुआ (स्मट)
  4. D.ब्लिस्टर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. क्राउन गॉल

व्याख्या

सही उत्तर है A, क्राउन गॉल। क्राउन गॉल रोग एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमिफेशिएंस नामक जीवाणु से होता है, जो तने के आधार यानी क्राउन के पास किसी घाव से भीतर पहुँचता है और वहाँ गाँठ जैसी खुरदरी सूजन बना देता है। यह जीवाणु अपने Ti प्लाज्मिड का एक टुकड़ा पौधे की कोशिकाओं में डालकर उन्हें लगातार विभाजित होने पर मजबूर करता है, और इसी प्राकृतिक गुण के कारण प्रयोगशालाओं में इसे पौधों में नए जीन पहुँचाने वाले वाहक के रूप में उपयोग किया जाता है। अंगूर, सेब, गुलाब, अखरोट और गुठलीदार फलों में यह रोग सबसे अधिक होता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि मोज़ेक रोग, जैसे तंबाकू मोज़ेक, विषाणु से होते हैं और पत्तियों पर हल्के-गहरे धब्बे बनाते हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि गेहूँ, बाजरा और गन्ने का कंडुआ कवक जनित रोग है, जो बालियों को काले चूर्ण जैसे बीजाणुओं से भर देता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि सरसों जैसी फसलों का सफेद ब्लिस्टर या सफेद रस्ट भी कवक जनित है और पत्तियों व तनों पर सफेद फफोले बनाता है। परीक्षा टिप: जीवाणु — क्राउन गॉल, सिट्रस कैंकर, धान का जीवाणु झुलसा; विषाणु — मोज़ेक; कवक — कंडुआ, रस्ट।

Q9.सामान्य विज्ञानकठिन

उत्सर्जन तथा परिसरणीय नियमन करने वाली ज्वाला कोशिकाएं किस समूह के जंतुओं में पाई जाती हैं?

  1. A.चपटे कृमि
  2. B.गोल कृमि
  3. C.केंचुए
  4. D.कीट
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. चपटे कृमि

व्याख्या

सही उत्तर A, चपटे कृमि, अर्थात संघ प्लेटीहेल्मिंथीज है। ज्वाला कोशिकाएं, जिन्हें सोलेनोसाइट भी कहते हैं, वे विशिष्ट कोशिकाएं हैं जिनमें स्पंदनशील पक्ष्माभों का गुच्छ होता है, जो अपशिष्ट द्रव को नलिकाओं के तंत्र में धकेलता है, और वे प्लेनेरिया, टीनिया तथा फैसिओला जैसे जंतुओं में नाइट्रोजनी अपशिष्ट निकालने और जल संतुलन, दोनों का कार्य करती हैं।

विकल्प B, एस्कहेल्मिंथीज के गोल कृमि साधारण उत्सर्जी छिद्र तथा रेनेट कोशिकाओं से उत्सर्जन करते हैं, ज्वाला कोशिकाओं से नहीं। विकल्प C, केंचुए तथा अन्य एनेलिड लगभग प्रत्येक खंड में बनी वृक्कक नलिकाओं से उत्सर्जन करते हैं। विकल्प D, कीट आहार नाल में खुलने वाली मैलपीगी नलिकाओं से उत्सर्जन करते हैं, जिससे उनका जल बहुत कम नष्ट होता है। उत्सर्जी रचना को संघ से मिलाना मानक प्रश्न है।

Q10.सामान्य विज्ञानपूछा गया: RRB ALP · 29 Aug 2018, Shift 3आसान

60 g हीलियम में कितने मोल उपस्थित हैं?

  1. A.12 मोल
  2. B.15 मोल
  3. C.10 मोल
  4. D.25 मोल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 15 मोल

व्याख्या

सही उत्तर है B, 15 मोल। मोलों की संख्या दिए गए द्रव्यमान भाग मोलर द्रव्यमान होती है, इसलिए 60 ग्राम हीलियम भाग 4 ग्राम प्रति मोल से 15 मोल मिलते हैं। हीलियम का परमाणु द्रव्यमान 4 है, और उत्कृष्ट गैस होने के कारण उसके अणु एकपरमाणुक होते हैं, इसलिए उसका मोलर द्रव्यमान 4 ग्राम है, 8 ग्राम नहीं। इन 15 मोलों में से प्रत्येक में 6.022 गुणा 10 की घात 23 परमाणु रहते हैं, और मानक ताप तथा दाब पर यह नमूना लगभग 336 लीटर घेरेगा, क्योंकि किसी भी गैस का एक मोल 22.4 लीटर लेता है। A गलत है क्योंकि 12 मोल पाने के लिए मोलर द्रव्यमान 5 मानना पड़ेगा और यह कार्बन के 12 से भ्रमित होकर दिया गया विकल्प है। C गलत है क्योंकि 10 मोल के लिए मोलर द्रव्यमान 6 चाहिए, जो हीलियम का नहीं है। D गलत है क्योंकि 25 मोल के लिए मोलर द्रव्यमान 2.4 चाहिए, जो किसी तत्व का नहीं है। परीक्षा टिप: मोल बराबर ग्राम में द्रव्यमान भाग मोलर द्रव्यमान, इसलिए 4 ग्राम हीलियम ठीक एक मोल है।

Q11.सामान्य विज्ञानआसान

मलेरिया किस जीव से होता है और उसका वाहक कौन है?

  1. A.विषाणु से, वाहक एडीज एजिप्टाई मच्छर
  2. B.प्रोटोजोआ प्लाज्मोडियम से, वाहक मादा एनोफिलीज मच्छर
  3. C.जीवाणु से, वाहक चूहे का पिस्सू
  4. D.कवक से, प्रसार दूषित जल से
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्रोटोजोआ प्लाज्मोडियम से, वाहक मादा एनोफिलीज मच्छर

व्याख्या

सही उत्तर B है। मलेरिया प्रोटोजोआ परजीवी प्लाज्मोडियम से होता है, जिसकी कई जातियां मनुष्य को संक्रमित करती हैं, और यह संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है; नर मच्छर पौधों का रस पीता है। विकल्प A गलत है क्योंकि एडीज एजिप्टाई डेंगू, चिकनगुनिया, पीत ज्वर और जीका जैसे विषाणु रोग फैलाता है, और यही जोड़ा इस अध्याय में सर्वाधिक भ्रम पैदा करता है। विकल्प C गलत है क्योंकि चूहे का पिस्सू प्लेग फैलाता है, जिसका कारक जीवाणु यर्सीनिया पेस्टिस है। विकल्प D गलत है क्योंकि कोई कवक मलेरिया नहीं करता; दूषित जल से फैलने वाले रोग हैजा, टाइफाइड और अमीबीय अतिसार हैं। भारत में कार्यरत रोनाल्ड रॉस ने मलेरिया के प्रसार में मच्छर की भूमिका सिद्ध की थी। रोकथाम का आधार मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करना, मच्छरदानी का प्रयोग और रोगी का समय पर उपचार है, क्योंकि परजीवी अपना जीवन चक्र आंशिक रूप से मच्छर में और आंशिक रूप से मनुष्य के यकृत तथा लाल रक्त कणिकाओं में पूरा करता है।

Q12.सामान्य विज्ञानपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 12 Feb 2019, Shift 1आसान

पत्ती की निचली सतह पर पाए जाने वाले छोटे छिद्रों को ________ कहा जाता है।

  1. A.छिद्र
  2. B.द्वार
  3. C.पक्ष्माभ
  4. D.रंध्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. रंध्र

व्याख्या

सही उत्तर है D, रंध्र। पत्ती की सतह पर पाए जाने वाले बहुत छोटे छिद्रों को, जो अधिकतर उसकी निचली सतह पर होते हैं, रंध्र कहा जाता है।

प्रत्येक रंध्र एक दरार होती है, जिसके दोनों ओर सेम के बीज जैसी दो द्वार कोशिकाएँ होती हैं; ये फूलकर उसे खोलती हैं और सिकुड़कर बंद कर देती हैं। इन छिद्रों से पौधा प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड लेता है, ऑक्सीजन छोड़ता है, और इन्हीं से वाष्पोत्सर्जन में जलवाष्प बाहर निकलती है। छायादार निचली सतह पर होने से जल की हानि कम होती है। कुमुदिनी जैसे तैरने वाले पौधों में रंध्र ऊपरी सतह पर होते हैं, और डूबे पौधों में ये लगभग नहीं होते।

A गलत है: 'छिद्र' केवल किसी भी सुराख का सामान्य शब्द है, वनस्पति विज्ञान का नाम नहीं। B गलत है: 'द्वार' भी एक साधारण वर्णन है, कोई नाम नहीं। C गलत है: पक्ष्माभ बाल जैसी छोटी रचनाएँ हैं, जो कुछ कोशिकाओं और जीवों को चलने में मदद करती हैं और पत्तियों पर नहीं होती हैं।

परीक्षा टिप: रंध्र पत्ती के वे छिद्र हैं जिन्हें द्वार कोशिकाएँ घेरती हैं, जो मुख्यतः निचली सतह पर होते हैं और गैसों के आदान-प्रदान तथा वाष्पोत्सर्जन का काम करते हैं।

Q13.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2020, Paper Iमध्यम

निम्नलिखित में से किस विधि का उपयोग जल की स्थायी कठोरता दूर करने के लिए किया जा सकता है?

  1. A.उबालना
  2. B.आयन-विनिमय
  3. C.चूना उपचार
  4. D.सल्फर डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित करना
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आयन-विनिमय

व्याख्या

सही उत्तर है B, आयन-विनिमय। आयन-विनिमय रेज़िन या ज़िओलाइट स्थायी कठोरता पैदा करने वाले कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों को सोडियम या हाइड्रोजन आयनों से बदल देता है।

स्थायी कठोरता कैल्शियम और मैग्नीशियम के क्लोराइडों और सल्फेटों से होती है, जो गर्म करने पर नहीं टूटते। ज़िओलाइट (परम्यूटिट) विधि में सोडियम एल्युमिनियम सिलिकेट Ca2+ और Mg2+ को ले लेता है और Na+ छोड़ता है, जिससे जल कठोर नहीं होता; उपयोग हो चुके ज़िओलाइट को नमक के घोल से धोकर फिर तैयार कर लिया जाता है। कृत्रिम रेज़िन भी इसी तरह काम करते हैं। धोने का सोडा और कैलगॉन भी स्थायी कठोरता दूर करते हैं।

A गलत है: उबालने से केवल अस्थायी कठोरता दूर होती है, क्योंकि घुलनशील बाइकार्बोनेट अघुलनशील कार्बोनेट बन जाते हैं।

C गलत है: चूना उपचार (क्लार्क विधि) भी केवल अस्थायी कठोरता दूर करता है।

D गलत है: सल्फर डाइऑक्साइड प्रवाहित करने से जल केवल अम्लीय होता है; कैल्शियम या मैग्नीशियम नहीं निकलते।

परीक्षा टिप: अस्थायी कठोरता = बाइकार्बोनेट, उबालने या क्लार्क विधि से; स्थायी = क्लोराइड और सल्फेट, धोने का सोडा, कैलगॉन या आयन-विनिमय से।

Q14.सामान्य विज्ञानपूछा गया: बिहार · BPSC AE Paper 5 (Civil Engineering) 2012मध्यम

निम्नलिखित में से सही कथन चुनें: 1. हुक का नियम समानुपातिकता सीमा तक मान्य है। 2. हुक का नियम प्रत्यास्थता सीमा तक मान्य है। 3. समानुपातिकता सीमा सदैव प्रत्यास्थता सीमा से कम होती है। 4. समानुपातिकता सीमा प्रत्यास्थता सीमा के बराबर या उससे कम होती है। सही उत्तर है

  1. A.1 और 4
  2. B.2 और 4
  3. C.1 और 3
  4. D.2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 1 और 4

व्याख्या

सही उत्तर है A, 1 और 4। हुक का नियम केवल समानुपातिकता सीमा तक लागू होता है, और यह सीमा प्रत्यास्थता सीमा के बराबर या उससे कम होती है, इसलिए कथन 1 और 4 ही सही जोड़ी बनाते हैं। हुक के नियम के अनुसार प्रतिबल विकृति के समानुपाती होता है, और यही प्रतिबल-विकृति ग्राफ का सीधा भाग है; जहाँ वक्र सीधी रेखा छोड़ देता है, वही बिंदु समानुपातिकता सीमा है। उससे कुछ आगे तक भी पदार्थ बल हटाने पर अपने मूल रूप में लौट आता है, और जहाँ तक ऐसा होता है वह अंतिम बिंदु प्रत्यास्थता सीमा कहलाता है। अधिकांश धातुओं में ये दोनों बिंदु बहुत पास होते हैं और आदर्श पदार्थ में एक ही हो जाते हैं। B गलत है क्योंकि कथन 2 नियम को ग्राफ के सीधे भाग से आगे तक खींच देता है, जहाँ समानुपात नहीं रहता। C और D गलत हैं क्योंकि कथन 3 सदैव कम कहता है, जबकि दोनों सीमाएँ बराबर भी हो सकती हैं। परीक्षा टिप: क्रम याद रखें - समानुपातिकता सीमा, प्रत्यास्थता सीमा, पराभव बिंदु, परम प्रतिबल।

Q15.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2018, Paper Iमध्यम

पौधों में परिवहन क्रियाविधि के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. A.कोशिका झिल्ली के आर-पार आयनों और छोटे अणुओं के विसरण के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  2. B.सांद्रता प्रवणता के विरुद्ध कोशिका झिल्ली के आर-पार आयनों और छोटे अणुओं के सक्रिय परिवहन के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  3. C.कोशिकाएँ ऊर्जा बचाती हैं और सांद्रता प्रवणता के विरुद्ध आयनों व छोटे अणुओं के परिवहन के लिए कोई ऊर्जा नहीं लगती।
  4. D.कोशिकाएँ अपनी झिल्ली के आर-पार आयनों का परिवहन नहीं करतीं, क्योंकि ये आवेशित अणु होते हैं।
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सांद्रता प्रवणता के विरुद्ध कोशिका झिल्ली के आर-पार आयनों और छोटे अणुओं के सक्रिय परिवहन के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

व्याख्या

सही उत्तर है B, सांद्रता प्रवणता के विरुद्ध कोशिका झिल्ली के आर-पार आयनों और छोटे अणुओं के सक्रिय परिवहन के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। किसी पदार्थ को कम सांद्रता से अधिक सांद्रता की ओर ले जाना चढ़ाई जैसा काम है, और कोशिका इसके लिए ATP खर्च करती है।

सक्रिय परिवहन में झिल्ली के वाहक प्रोटीन, जिन्हें पंप कहते हैं, ATP की ऊर्जा से K+ और नाइट्रेट जैसे आयनों को मूलरोम कोशिकाओं में धकेलते हैं, चाहे मिट्टी में उनकी मात्रा कोशिका से बहुत कम हो। इसके विपरीत विसरण और परासरण निष्क्रिय क्रियाएँ हैं: पदार्थ अधिक से कम सांद्रता की ओर बिना ऊर्जा खर्च किए चलते हैं।

A गलत है: विसरण निष्क्रिय है और इसमें कोशिका की ऊर्जा नहीं लगती।

C गलत है: सांद्रता प्रवणता के विरुद्ध कुछ भी ले जाने में हमेशा ऊर्जा लगती है।

D गलत है: पादप कोशिकाएँ चैनलों, वाहकों और पंपों से लगातार आयन झिल्ली के आर-पार ले जाती हैं; जड़ें इसी तरह खनिज लेती हैं।

परीक्षा टिप: प्रवणता के साथ = विसरण या परासरण, ऊर्जा नहीं; प्रवणता के विरुद्ध = सक्रिय परिवहन, ATP चाहिए।

Q16.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · 10 April 2022मध्यम

1 मीटर लंबे दोलक (पेंडुलम) का आवर्तकाल लगभग कितना होता है?

  1. A.6 s
  2. B.4 s
  3. C.2 s
  4. D.1 s
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2 s

व्याख्या

सही उत्तर है C, 2 s। लगभग एक मीटर लंबा सरल दोलक एक पूरा दोलन करीब दो सेकंड में पूरा करता है, और इतनी लंबाई वाले दोलक को सेकंड दोलक कहा जाता है। सरल दोलक का आवर्तकाल T = 2 पाई गुणा L बटा g का वर्गमूल होता है, जहाँ L धागे की लंबाई है और g गुरुत्वीय त्वरण, जो लगभग 9.8 मीटर प्रति सेकंड वर्ग होता है। L = 1 मीटर रखने पर T = 2 x 3.14 x एक बटा 9.8 का वर्गमूल आता है, जो लगभग 2.01 सेकंड है। आवर्तकाल केवल लंबाई और g पर निर्भर करता है, गोलक के द्रव्यमान या उसे कितना किनारे खींचा गया है इस पर नहीं, बशर्ते दोलन छोटा हो। A गलत है क्योंकि 6 सेकंड के आवर्तकाल के लिए धागा लगभग 9 मीटर लंबा चाहिए। B गलत है क्योंकि 4 सेकंड के आवर्तकाल के लिए धागा लगभग 4 मीटर लंबा चाहिए। D गलत है क्योंकि 1 सेकंड का आवर्तकाल केवल लगभग 25 सेंटीमीटर के धागे का होता है। परीक्षा टिप: लंबाई चार गुनी होने पर ही आवर्तकाल दोगुना होता है।

Q17.सामान्य विज्ञानपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2024, Paper Iमध्यम

निम्नलिखित में से कौन-से काँच के निर्माण के मुख्य घटक हैं?

  1. A.सिलिका, सोडियम कार्बोनेट, बोरेक्स, एल्यूमिना और कलेट
  2. B.आयरन ऑक्साइड, लेड, सोडियम बाइकार्बोनेट, एल्यूमिना और कलेट
  3. C.मैग्नीशियम कार्बोनेट, एल्यूमिना, सिलिका और कलेट
  4. D.आयरन ऑक्साइड, सोडियम, एल्यूमिना, सिलिका और कलेट
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सिलिका, सोडियम कार्बोनेट, बोरेक्स, एल्यूमिना और कलेट

व्याख्या

सही उत्तर है A, सिलिका, सोडियम कार्बोनेट, बोरेक्स, एल्यूमिना और कलेट। काँच सिलिका रेत को गलनकारकों और स्थायीकारकों के साथ पिघलाकर बनता है, और यह विकल्प मानक मिश्रण बताता है।

शुद्ध रेत से मिलने वाली सिलिका काँच का ढाँचा बनाती है। सोडियम कार्बोनेट, यानी सोडा ऐश, सिलिका के लगभग 1700 °C के गलनांक को काम लायक स्तर तक घटाता है। बोरेक्स बोरॉन देता है, जिससे पाइरेक्स जैसा ऊष्मारोधी बोरोसिलिकेट काँच बनता है, और एल्यूमिना काँच को मजबूत व टिकाऊ बनाता है। कलेट टूटा हुआ बेकार काँच है जिसे भट्ठी में वापस डाला जाता है; यह आसानी से पिघलता है, ईंधन बचाता है और पुनर्चक्रण का सरल रूप है। साधारण सोडा-लाइम काँच में चूना पत्थर भी डाला जाता है।

B गलत है: आयरन ऑक्साइड केवल काँच को हरा या भूरा रंग देता है, और लेड व सोडियम बाइकार्बोनेट मुख्य घटक नहीं हैं।

C गलत है: इसमें सोडा गलनकारक नहीं है, जिसके बिना सिलिका पिघलाने में बहुत अधिक ऊष्मा लगेगी।

D गलत है: धात्विक सोडियम कभी प्रयोग नहीं होता, और आयरन ऑक्साइड अशुद्धि या रंजक है।

परीक्षा टिप: काँच = सिलिका (रेत) + सोडा ऐश + चूना पत्थर; ऊष्मारोधी काँच के लिए बोरेक्स, ईंधन बचाने के लिए कलेट।

Q18.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · NDA-II 2019, GATमध्यम

एक पतली चकती और एक पतली वलय, दोनों का द्रव्यमान M और त्रिज्या R है। दोनों अपने द्रव्यमान केंद्र से होकर जाने वाली और अपनी सतह के लंबवत अक्षों के परितः समान कोणीय वेग से घूम रही हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा सत्य है?

  1. A.वलय की गतिज ऊर्जा अधिक है
  2. B.चकती की गतिज ऊर्जा अधिक है
  3. C.वलय और चकती की गतिज ऊर्जा समान है
  4. D.दोनों पिंडों की गतिज ऊर्जा शून्य है, क्योंकि वे रैखिक गति में नहीं हैं
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. वलय की गतिज ऊर्जा अधिक है

व्याख्या

सही उत्तर है A, वलय की गतिज ऊर्जा अधिक है। घूर्णन गतिज ऊर्जा ½Iω² होती है, और वलय का जड़त्व आघूर्ण अधिक है।

पतली वलय में पूरा द्रव्यमान केंद्र से R दूरी पर होता है, इसलिए उसके तल के लंबवत केंद्रीय अक्ष के परितः I = MR² है। एकसमान चकती में बहुत-सा द्रव्यमान अक्ष के पास रहता है, इसलिए I = ½MR² होता है। समान कोणीय वेग ω पर वलय की ऊर्जा ½MR²ω² और चकती की केवल ¼MR²ω² होती है। यानी वलय की घूर्णन गतिज ऊर्जा चकती की दोगुनी है। द्रव्यमान अक्ष से जितना दूर होगा, पिंड को घुमाना उतना कठिन होगा और वह उतनी अधिक ऊर्जा रखेगा।

B गलत है: चकती का जड़त्व आघूर्ण कम है, इसलिए समान ω पर उसकी ऊर्जा भी कम है।

C गलत है: समान द्रव्यमान और त्रिज्या का अर्थ समान जड़त्व आघूर्ण नहीं है; द्रव्यमान का वितरण मायने रखता है।

D गलत है: घूमते पिंड में घूर्णन गतिज ऊर्जा होती है, भले ही उसका द्रव्यमान केंद्र स्थिर हो।

परीक्षा टिप: वलय I = MR², चकती I = ½MR², ठोस गोला I = ⅖MR²; घूर्णन गतिज ऊर्जा = ½Iω²।

Q19.सामान्य विज्ञानकठिन

निम्नलिखित में से कौन लाख कीट का पोषक पौधा नहीं है?

  1. A.पलास
  2. B.कुसुम
  3. C.बेर
  4. D.अरंडी
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. अरंडी

व्याख्या

सही उत्तर D, अरंडी है, जो एरी रेशम कीट का पोषक पौधा है और लाख कीट पालन से इसका कोई संबंध नहीं है। विकल्प A, B और C तीनों वास्तविक लाख पोषक हैं: पलास, कुसुम और बेर वे तीन मुख्य वृक्ष हैं जिनकी कोमल टहनियों पर लाख कीट का संचारण किया जाता है। कुसुम पर कुसुमी प्रजाति पलती है, जो अगहनी और जेठवी फसलें देती है, जबकि पलास और बेर पर रंगीनी प्रजाति पलती है, जो कातकी और बैसाखी फसलें देती है, इस प्रकार दो वर्षों में चार फसलें ली जाती हैं। विश्व में सबसे अधिक लाख भारत उत्पन्न करता है और झारखंड अग्रणी राज्य है; रांची के निकट नामकुम में 1924 में स्थापित संस्थान आज भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान है। इसी कारण लाख कीट पालन वन क्षेत्रों की आय का साधन है, क्योंकि ये तीनों वृक्ष मध्य भारत की वन पट्टी में स्वाभाविक रूप से मिलते हैं।

Q20.सामान्य विज्ञानपूछा गया: NDA · NDA-I 2026, GATकठिन

L लंबाई का एक लोलक θ = 60° के कोणीय आयाम और T आवर्तकाल के साथ दोलन करता है। मान लीजिए छोटे कोण के दोलनों के लिए आवर्तकाल T₀ = 2π√(L/g) है, जहाँ g गुरुत्वीय त्वरण है। यदि वायु प्रतिरोध नगण्य है और धागा सीधा रहता है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?

  1. A.T, T₀ से थोड़ा अधिक होगा।
  2. B.T, T₀ से थोड़ा कम होगा।
  3. C.T ठीक T₀ के बराबर होगा।
  4. D.T गोलक के द्रव्यमान पर निर्भर करेगा।
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. T, T₀ से थोड़ा अधिक होगा।

व्याख्या

सही उत्तर है A, T, T₀ से थोड़ा अधिक होगा। सूत्र T₀ = 2π√(L/g) केवल छोटे दोलनों पर लागू होता है; बड़े आयाम पर आवर्तकाल बढ़ जाता है।

छोटे कोण वाला सूत्र sin θ ≈ θ मानकर बनता है। बड़े कोण पर प्रत्यानयन बल mg sin θ, mgθ से कम होता है, इसलिए गोलक को वापस खींचने वाला बल थोड़ा कमज़ोर पड़ता है और हर दोलन में ज़्यादा समय लगता है। एक अच्छा सन्निकटन T ≈ T₀(1 + θ²/16) है, जहाँ θ रेडियन में है। 60° (लगभग 1.05 रेडियन) पर आवर्तकाल T₀ से करीब 7% अधिक आता है।

B गलत है: कमज़ोर प्रत्यानयन बल आवर्तकाल को केवल बढ़ा सकता है, घटा नहीं सकता।

C गलत है: T ठीक T₀ के बराबर केवल बहुत छोटे आयाम पर होता है, 60° पर नहीं।

D गलत है: गति के समीकरण में गोलक का द्रव्यमान हर आयाम पर कट जाता है।

परीक्षा टिप: सरल लोलक का आवर्तकाल द्रव्यमान से हमेशा स्वतंत्र है, पर आयाम से केवल छोटे दोलनों में।

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