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GK क्विजपर्यावरण और पारिस्थितिकी

पर्यावरण और पारिस्थितिकी क्विज: जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग

  • 10 प्रश्न
  • 10 मिनट
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इस क्विज के बारे में

पर्यावरण और पारिस्थितिकी के अंतर्गत "जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग" विषय पर यह क्विज़ 10 बहुविकल्पीय प्रश्न रखता है, जो GK24 के इसी विषय के नोट्स के साथ प्रकाशित सत्यापित प्रश्न हैं, जिनमें 1 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे गए हैं। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और शेष विकल्पों के गलत होने की पूरी व्याख्या दी गई है, ताकि आप केवल उत्तर याद न करें बल्कि उसके पीछे का तथ्य समझें। नोट्स पढ़ने के तुरंत बाद इसे हल करें, निर्धारित समय का पालन करें, और अंत में व्याख्याएं पढ़कर कमजोर बिंदु चिह्नित करें। परीक्षा से पहले दोहराव के लिए इसे दोबारा दें।

इस क्विज के प्रश्न

10 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 15th December 2021, Shift 3आसान

वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से ________ होता है।

  1. A.ग्लोबल वार्मिंग
  2. B.वायुदाब
  3. C.संरक्षण
  4. D.वर्षा
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ग्लोबल वार्मिंग

व्याख्या

सही उत्तर A, ग्लोबल वार्मिंग है। कार्बन डाइऑक्साइड एक ग्रीनहाउस गैस है: यह सूर्य के लघु तरंगदैर्घ्य विकिरण को भीतर आने देती है पर गर्म पृथ्वी द्वारा लौटाए जाने वाले दीर्घ तरंगदैर्घ्य के अवरक्त विकिरण का एक भाग सोख लेती है और उसे फिर नीचे की ओर विकीर्ण कर देती है। कोयले, तेल और गैस के दहन तथा वनोन्मूलन से जैसे-जैसे इसकी सांद्रता बढ़ती है, निचले वायुमंडल में अधिक ऊष्मा रुकती है और पृथ्वी का औसत सतही तापमान बढ़ता है। यही वृद्धि ग्लोबल वार्मिंग है और आज के जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण है।

विकल्प B वायुदाब तापमान, ऊँचाई और ऊपर की वायु की मात्रा पर निर्भर करता है, किसी अल्प मात्रा वाली गैस के अंश पर नहीं। विकल्प C संरक्षण संसाधनों की रक्षा और विवेकपूर्ण उपयोग है, कोई परिणाम नहीं। विकल्प D वर्षा का स्वरूप जलवायु गर्म होने पर बदल सकता है, पर वह अप्रत्यक्ष प्रभाव है।

Q2.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की स्थापना 1988 में किन दो संगठनों ने की थी?

  1. A.यूनेस्को और एफएओ
  2. B.विश्व मौसम विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम
  3. C.विश्व बैंक और आईएमएफ
  4. D.डब्ल्यूएचओ और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. विश्व मौसम विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम

व्याख्या

सही उत्तर B, विश्व मौसम विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम है। इन दोनों संस्थाओं ने 1988 में यह पैनल इसलिए बनाया कि सरकारों को जलवायु परिवर्तन पर विज्ञान का एक प्रामाणिक सारांश मिल सके। यह पैनल स्वयं शोध या निगरानी नहीं करता; यह प्रकाशित वैज्ञानिक साहित्य की समीक्षा कर आकलन रिपोर्ट तथा विशेष रिपोर्ट प्रकाशित करता है, जिनका नीति निर्माताओं हेतु सारांश सदस्य सरकारें पंक्ति दर पंक्ति स्वीकृत करती हैं।

विकल्प A संयुक्त राष्ट्र की शिक्षा और कृषि संस्थाओं के नाम देता है, जिनकी ऐसी कोई भूमिका नहीं। विकल्प C वित्तीय संस्थाएँ हैं, जो जलवायु परियोजनाओं को धन तो देती हैं पर पैनल उन्होंने नहीं बनाया। विकल्प D स्वास्थ्य और विकास संस्थाओं के नाम हैं। आईपीसीसी को 2007 का नोबेल शांति पुरस्कार अल गोर के साथ मिला था।

Q3.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र संरचना समझौता किस सम्मेलन में अपनाया गया था?

  1. A.स्टॉकहोम सम्मेलन, 1972
  2. B.रियो दे जनेरो का पृथ्वी सम्मेलन, 1992
  3. C.जोहानसबर्ग शिखर सम्मेलन, 2002
  4. D.कोपेनहेगन सम्मेलन, 2009
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रियो दे जनेरो का पृथ्वी सम्मेलन, 1992

व्याख्या

सही उत्तर B, 1992 का रियो दे जनेरो पृथ्वी सम्मेलन है। पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, जिसे लोकप्रिय रूप से पृथ्वी सम्मेलन कहा जाता है, ने जैव विविधता अभिसमय तथा एजेंडा 21 के साथ यह संरचना समझौता भी दिया। इस समझौते ने ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता सुरक्षित स्तर पर स्थिर करने का लक्ष्य रखा और यह साझी किंतु विभेदित जिम्मेदारियों के सिद्धांत पर टिका है, जो मानता है कि संचित उत्सर्जन का अधिकांश भाग औद्योगिक देशों का है।

विकल्प A 1972 का स्टॉकहोम सम्मेलन पर्यावरण पर पहला विश्व सम्मेलन था, जिससे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम बना। विकल्प C जोहानसबर्ग शिखर सम्मेलन ने सतत विकास की प्रगति की समीक्षा की। विकल्प D कोपेनहेगन सम्मेलन इसी समझौते के पक्षकारों की बाद की बैठक थी, अर्थात कोई नया समझौता वहाँ नहीं अपनाया गया।

Q4.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

बाध्यकारी उत्सर्जन लक्ष्य तय करने वाला क्योटो प्रोटोकॉल किस वर्ष अपनाया गया था?

  1. A.1987
  2. B.1992
  3. C.1997
  4. D.2005
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1997

व्याख्या

सही उत्तर C, 1997 है। क्योटो प्रोटोकॉल जापान के क्योटो शहर में हुए पक्षकारों के तीसरे सम्मेलन में 1997 में अपनाया गया और पर्याप्त देशों के अनुसमर्थन के बाद 2005 में प्रभावी हुआ। यह उत्सर्जन पर कानूनी रूप से बाध्यकारी सीमा तय करने वाला पहला समझौता था, पर यह सीमा केवल समझौते के संलग्नक एक में सूचीबद्ध विकसित देशों पर थी, और इसने तीन बाजार तंत्र बनाए: उत्सर्जन व्यापार, संयुक्त क्रियान्वयन तथा स्वच्छ विकास तंत्र, जिसके अंतर्गत किसी विकासशील देश की परियोजना क्रेडिट अर्जित कर सकती थी।

विकल्प A 1987 ओजोन क्षयकारी पदार्थों पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का वर्ष है। विकल्प B 1992 रियो पृथ्वी सम्मेलन और संरचना समझौते का वर्ष है। विकल्प D 2005 वह वर्ष है जब प्रोटोकॉल प्रभावी हुआ, अपनाया नहीं गया, और यही इस प्रश्न का सबसे आम जाल है।

Q5.पर्यावरण और पारिस्थितिकीआसान

2015 के पेरिस समझौते के अंतर्गत देशों ने वैश्विक औसत तापमान की वृद्धि को किस सीमा में रखने पर सहमति दी?

  1. A.पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2 डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे, डेढ़ डिग्री की दिशा में प्रयास सहित
  2. B.वर्तमान स्तर से ठीक 3 डिग्री सेल्सियस
  3. C.वर्ष 2100 तक 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे
  4. D.कोई संख्यात्मक सीमा नहीं
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2 डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे, डेढ़ डिग्री की दिशा में प्रयास सहित

व्याख्या

सही उत्तर A है। पेरिस समझौता, जो 2015 में पक्षकारों के इक्कीसवें सम्मेलन में अपनाया गया और नवंबर 2016 से प्रभावी है, अपने पक्षकारों को इस बात के लिए प्रतिबद्ध करता है कि वैश्विक औसत तापमान की वृद्धि पूर्व-औद्योगिक स्तर से दो डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे रखी जाए और उसे डेढ़ डिग्री तक सीमित करने के प्रयास किए जाएँ। क्योटो प्रोटोकॉल के विपरीत यह सभी देशों पर लागू है, और हर देश अपना राष्ट्रीय निर्धारित योगदान स्वयं तय करता है, जिसकी रिपोर्ट देकर उसे समय के साथ बढ़ाना होता है।

विकल्प B एक गढ़ा हुआ आँकड़ा है और उसे पूर्व-औद्योगिक के बजाय वर्तमान स्तर से मापता है। विकल्प C ऐसी सीमा देता है जो समझौते की कल्पना से कहीं ऊपर है। विकल्प D गलत है क्योंकि संख्यात्मक लक्ष्य ही इस समझौते की सबसे प्रसिद्ध बात है।

Q6.पर्यावरण और पारिस्थितिकीकठिन

निम्नलिखित में से किस गैस की ग्लोबल वार्मिंग क्षमता सबसे अधिक है?

  1. A.कार्बन डाइऑक्साइड
  2. B.मीथेन
  3. C.नाइट्रस ऑक्साइड
  4. D.सल्फर हेक्साफ्लोराइड
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. सल्फर हेक्साफ्लोराइड

व्याख्या

सही उत्तर D, सल्फर हेक्साफ्लोराइड है। ग्लोबल वार्मिंग क्षमता मापती है कि किसी गैस की दी गई मात्रा चुनी गई अवधि में उतनी ही मात्रा की कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में कितनी ऊष्मा रोकती है, और कार्बन डाइऑक्साइड को मान एक दिया जाता है। उच्च वोल्टेज के विद्युत स्विचगियर में विद्युतरोधी गैस के रूप में प्रयुक्त सल्फर हेक्साफ्लोराइड की क्षमता क्योटो सूची की गैसों में कहीं अधिक है, क्योंकि यह अवरक्त विकिरण को प्रबलता से सोखती है और वायुमंडल में हजारों वर्ष टिकी रहती है।

विकल्प A कार्बन डाइऑक्साइड संदर्भ गैस है, जिसकी क्षमता एक है; वह अपनी विशाल मात्रा के कारण सबसे बड़ी समस्या है, प्रबलता के कारण नहीं। विकल्प B मीथेन सौ वर्ष में कहीं अधिक ऊष्मा रोकती है पर लगभग एक दशक में टूट जाती है। विकल्प C नाइट्रस ऑक्साइड और भी प्रबल है तथा ओजोन पर भी प्रहार करती है, पर दोनों सल्फर हेक्साफ्लोराइड के आसपास नहीं ठहरतीं।

Q7.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

भारत की 2008 में जारी जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना में कितने राष्ट्रीय मिशन हैं?

  1. A.पाँच
  2. B.छह
  3. C.आठ
  4. D.दस
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. आठ

व्याख्या

सही उत्तर C, आठ है। जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना 2008 में जारी हुई और आठ राष्ट्रीय मिशनों के इर्द-गिर्द बनी है: राष्ट्रीय सौर मिशन, संवर्धित ऊर्जा दक्षता मिशन, सतत आवास मिशन, राष्ट्रीय जल मिशन, हिमालयी पारितंत्र के संरक्षण का मिशन, हरित भारत मिशन, सतत कृषि मिशन और जलवायु परिवर्तन हेतु रणनीतिक ज्ञान मिशन। इनमें कुछ उत्सर्जन घटाने से जुड़े हैं और कुछ बदली हुई जलवायु के साथ अनुकूलन से।

विकल्प A, B और D गलत संख्याएँ हैं। अभ्यर्थी को कम से कम सौर, जल, हिमालयी और हरित भारत मिशन के नाम याद रखने चाहिए, क्योंकि प्रश्न प्रायः यह पूछता है कि दिए गए चार में से कौन सा मिशन इस योजना का भाग नहीं है। इस योजना को प्रधानमंत्री की जलवायु परिवर्तन संबंधी परिषद ने स्वीकृत किया था।

Q8.पर्यावरण और पारिस्थितिकीआसान

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल किस पर्यावरणीय समस्या से संबंधित है?

  1. A.ओजोन परत का क्षरण
  2. B.आर्द्रभूमियों का संरक्षण
  3. C.संकटग्रस्त प्रजातियों का व्यापार
  4. D.खतरनाक अपशिष्ट का आवागमन
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ओजोन परत का क्षरण

व्याख्या

सही उत्तर A, ओजोन परत का क्षरण है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987 में वियना अभिसमय के अंतर्गत उन पदार्थों को चरणबद्ध रूप से हटाने के लिए हुआ जो समतापमंडलीय ओजोन को नष्ट करते हैं, मुख्यतः प्रशीतन, वातानुकूलन और एरोसोल स्प्रे में प्रयुक्त क्लोरोफ्लोरोकार्बन। इसे सबसे सफल पर्यावरणीय संधि माना जाता है, क्योंकि यह चरणबद्ध निष्कासन वास्तव में हुआ और ओजोन परत के सुधरने की आशा है। इसके 2016 के किगाली संशोधन ने हाइड्रोफ्लोरोकार्बन जोड़े, जो ओजोन को हानि नहीं पहुँचाते पर प्रबल ग्रीनहाउस गैसें हैं।

विकल्प B आर्द्रभूमियों पर रामसर अभिसमय का विषय है। विकल्प C साइटीस का विषय है। विकल्प D खतरनाक अपशिष्ट के सीमापार आवागमन पर बेसल अभिसमय का विषय है। इन चारों अभिसमयों के विषय और वर्ष एक साथ तालिका बनाकर याद रखने चाहिए, क्योंकि प्रश्न प्रायः इन्हें एक-दूसरे के विकल्प के रूप में रखता है।

Q9.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का मुख्यालय कहाँ स्थित है?

  1. A.पेरिस, फ्रांस
  2. B.गुरुग्राम, भारत
  3. C.नैरोबी, केन्या
  4. D.अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. गुरुग्राम, भारत

व्याख्या

सही उत्तर B, गुरुग्राम, भारत है। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की शुरुआत भारत और फ्रांस ने 2015 के पेरिस जलवायु सम्मेलन में उन देशों के बीच सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए की, जो मुख्यतः कर्क और मकर रेखा के बीच पड़ते हैं, और इसका सचिवालय हरियाणा के गुरुग्राम में ग्वाल पहाड़ी स्थित राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के परिसर में बना। यह संधि आधारित पहला अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसका मुख्यालय भारत में है, और परीक्षक प्रायः यही बिंदु जाँचते हैं।

विकल्प A पेरिस वह स्थान है जहाँ गठबंधन की घोषणा हुई, मुख्यालय नहीं। विकल्प C नैरोबी में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम है। विकल्प D अबू धाबी में अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी है, जो अलग संस्था है और इस प्रश्न का आम भ्रामक विकल्प है। गठबंधन का एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड का विचार भी इसी से जुड़ा है।

Q10.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

निम्नलिखित में से कौन सा ग्लोबल वार्मिंग का परिणाम नहीं है?

  1. A.समुद्र तल में वृद्धि
  2. B.हिमनदों का पीछे हटना
  3. C.प्रवाल विरंजन
  4. D.सतह तक अधिक पराबैंगनी विकिरण का पहुँचना
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. सतह तक अधिक पराबैंगनी विकिरण का पहुँचना

व्याख्या

सही उत्तर D, सतह तक अधिक पराबैंगनी विकिरण का पहुँचना है। यह ओजोन क्षरण का परिणाम है, जो अलग समस्या है और क्लोरोफ्लोरोकार्बन द्वारा समतापमंडल की ओजोन परत के पतला होने से होती है; इसके लिए मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल बना है। इन दोनों समस्याओं को मिला देना पाठ्यक्रम के इस भाग की सबसे आम भूल है।

विकल्प A समुद्र तल की वृद्धि गर्म होने पर समुद्री जल के फैलने तथा स्थल की बर्फ के पिघलने दोनों से होती है। विकल्प B हिमनदों का पीछे हटना हिमालय, आल्प्स और एंडीज में देखा गया है और इससे उन पर निर्भर नदियों का प्रवाह संकट में है। विकल्प C प्रवाल विरंजन तब होता है जब असामान्य रूप से गर्म जल के कारण मूँगे अपने भीतर रहने वाले और उन्हें रंग देने वाले शैवाल बाहर निकाल देते हैं और सफेद पड़कर मरने लगते हैं।

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