पालि भाषा के बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक के तीन भाग कौन से हैं?
- A.विनय, सुत्त और अभिधम्म पिटक
- B.विनय, जातक और अभिधम्म पिटक
- C.सुत्त, जातक और अंग पिटक
- D.अंग, उपांग और सुत्त पिटक
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. विनय, सुत्त और अभिधम्म पिटक
व्याख्या
सही उत्तर A, विनय, सुत्त और अभिधम्म पिटक है। पिटक का अर्थ पिटारी है, इसलिए इस संग्रह को तीन पिटारियाँ कहा जाता है। विनय पिटक में भिक्षु और भिक्षुणियों के अनुशासन के नियम हैं, सुत्त पिटक में बुद्ध के उपदेश हैं और अभिधम्म पिटक में दर्शन तथा चित्त एवं पदार्थ का विश्लेषण है।
विकल्प B में सुत्त की जगह जातक रख दिया गया है, जो सबसे आम भूल है: बुद्ध के पूर्व जन्मों की जातक कथाएँ कोई चौथी पिटारी नहीं, बल्कि सुत्त पिटक का ही भाग हैं। विकल्प C जातक और अंग को मिला देता है, और विकल्प D में अंग तथा उपांग हैं, जो प्राकृत में लिखे जैन आगम के विभाग हैं, बौद्ध ग्रंथ के नहीं। साथ में यह भी याद रखिए कि भिक्षु नागसेन और इंडो-ग्रीक राजा मिनांडर के संवाद वाली मिलिंदपन्हो पालि की रचना है पर त्रिपिटक से बाहर है।