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मैसूरु में नौ दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 संपन्न

सामाजिक न्याय मंत्रालय का नौ दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 कर्नाटक के मैसूरु में संपन्न हुआ, जिसमें 12 राज्यों के कारीगरों के लिए 83 स्टॉल लगाए गए थे।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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मैसूरु में नौ दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 संपन्न

चर्चा में क्यों

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का नौ दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026, 20 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक के मैसूरु स्थित दशहरा प्रदर्शनी मैदान में संपन्न हुआ, जिसमें 83 स्टॉल लगे और 12 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के कारीगर शामिल हुए।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का नौ दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 20 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक के मैसूरु स्थित दशहरा प्रदर्शनी मैदान में संपन्न हो गया। समाप्ति तक हजारों लोग मेले में पहुंचे और कारीगरों के हस्तशिल्प तथा हथकरघा उत्पाद देखे।

मेला किसके लिए

यह मेला अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सफाई कर्मचारी वर्ग के कारीगरों को अपना सामान सीधे ग्राहक तक पहुंचाने का मंच देता है। इन कारीगरों को मंत्रालय के अधीन काम करने वाले तीन राष्ट्रीय निगमों का सहारा मिलता है - राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (NSFDC), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC) तथा राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC)।

मैसूरु संस्करण के आंकड़े

कुल स्टॉल83
कारीगरों को दिए गए स्टॉल80
इनमें महिला कारीगर37
शामिल राज्य और केंद्रशासित प्रदेश12
अब तक लगे ऐसे मेले13
अब तक लाभ पाने वाले कारीगर975

NBCFDC के उपमहाप्रबंधक रजनीश बैंकर के मुताबिक मैसूरु का यह आयोजन वित्त वर्ष 2026-27 का पहला शिल्प समागम मेला था। मंत्रालय ने यह सिलसिला 2022 में शुरू किया था और अब तक लगे 13 मेलों से 975 कारीगरों को बाजार मिला है।

स्टॉल पर क्या था

यहां हथकरघा साड़ियां और कांजीवरम साड़ियां, ब्लॉक प्रिंट उत्पाद, मसाले, अचार, शहद उत्पाद, अगरबत्ती, चमड़े का सामान, लकड़ी के खिलौने, टेराकोटा वस्तुएं, कृत्रिम आभूषण, शीशम की दीवार सज्जा, बैग, पर्स तथा बेड और कुशन कवर बिक रहे थे। खाने के स्टॉल पर पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। कारीगर आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, पुडुचेरी, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश से आए थे।

भारत ट्यूलिप

मंत्रालय ने BHARAT TULIP यानी पारंपरिक कारीगर उत्थान जीविका कार्यक्रम भी शुरू किया है। इसके तहत लक्षित वर्गों के उत्पादों को इसी नाम से ब्रांड बनाकर देश और विदेश के डिजिटल मंचों पर बेचा जाता है, जिससे कारीगर केवल मेले में आने वाले ग्राहकों तक सीमित नहीं रहता।

कारीगरों को मदद और आगे की योजना

कारीगर से स्टॉल का किराया नहीं लिया जाता। मंत्रालय यात्रा खर्च, दैनिक भत्ता, सामान की ढुलाई तथा दोपहर और रात का भोजन देता है। केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने मेले में स्टॉल देखे और केंद्रीय सचिव सुधांश पंत भी पहुंचे, जो राज्य समाज कल्याण विभाग के साथ मंत्रालय की योजनाओं की समीक्षा के लिए दो दिन के दौरे पर थे। इस वित्त वर्ष में गुवाहाटी, नई दिल्ली के दिल्ली हाट, जोधपुर और लखनऊ में भी शिल्प समागम मेले लगेंगे। मंत्रालय और उसके तीनों निगम नई दिल्ली के भारत मंडपम में 14 से 27 नवंबर 2026 तक चलने वाले भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF) 2026 तथा फरवरी 2027 में फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में भी भाग लेंगे।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजनशिल्प समागम मेला 2026 (नौ दिन)
स्थानदशहरा प्रदर्शनी मैदान, मैसूरु, कर्नाटक
आयोजकसामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय
संबंधित निगमNSFDC, NBCFDC और NSKFDC
स्टॉलकुल 83, जिनमें 80 कारीगरों को
महिला कारीगर37
शामिल राज्य/केंद्रशासित प्रदेश12
2022 से लगे मेले13, जिनसे 975 कारीगरों को लाभ
संस्करणवित्त वर्ष 2026-27 का पहला शिल्प समागम मेला
दौरा करने वालेराज्य मंत्री रामदास आठवले और सचिव सुधांश पंत
संबंधित कार्यक्रमBHARAT TULIP - पारंपरिक कारीगर उत्थान जीविका कार्यक्रम
आगामी मेलेगुवाहाटी, दिल्ली हाट (नई दिल्ली), जोधपुर और लखनऊ

परीक्षा की दृष्टि से

स्थान (दशहरा प्रदर्शनी मैदान, मैसूरु), मंत्रालय (सामाजिक न्याय और अधिकारिता), तीन निगम (NSFDC, NBCFDC, NSKFDC), स्टॉल की संख्या (83, जिनमें 80 कारीगरों के और 37 महिला कारीगर), 12 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश, शुरुआत का वर्ष 2022, अब तक 13 मेले और 975 कारीगर तथा BHARAT TULIP का पूरा नाम याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंआसान

20 अक्टूबर 2026 को संपन्न शिल्प समागम मेला 2026 कहां आयोजित किया गया था?

  1. A.दशहरा प्रदर्शनी मैदान, मैसूरु
  2. B.दिल्ली हाट, नई दिल्ली
  3. C.सूरजकुंड, फरीदाबाद
  4. D.भारत मंडपम, नई दिल्ली
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. दशहरा प्रदर्शनी मैदान, मैसूरु

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का नौ दिवसीय यह मेला कर्नाटक के मैसूरु स्थित इसी मैदान में लगा था और 20 अक्टूबर 2026 को संपन्न हुआ, जिसमें हजारों लोग हस्तशिल्प तथा हथकरघा उत्पाद देखने पहुंचे।

Q2.सरकारी योजनाएंमध्यम

मैसूरु के शिल्प समागम मेला 2026 में कुल 83 स्टॉल में से कितने कारीगरों को दिए गए थे?

  1. A.60
  2. B.75
  3. C.80
  4. D.83, सभी
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 80

मेले में कुल 83 स्टॉल लगाए गए थे और इनमें 80 स्टॉल कारीगरों को दिए गए, बाकी में खाने के स्टॉल शामिल थे जहां पारंपरिक व्यंजन परोसे गए।

Q3.सरकारी योजनाएंमध्यम

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का BHARAT TULIP किस कार्यक्रम का नाम है?

  1. A.पारंपरिक कारीगर उत्थान जीविका कार्यक्रम
  2. B.जनजातीय उत्थान और स्थानीय उद्योग प्रोत्साहन योजना
  3. C.वस्त्र इकाई जीविका सुधार कार्यक्रम
  4. D.पारंपरिक उपयोगिता और स्थानीय निवेश योजना
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. पारंपरिक कारीगर उत्थान जीविका कार्यक्रम

BHARAT TULIP वह ब्रांड है जिसके नाम से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय अपने लक्षित वर्गों के उत्पाद देश और विदेश के डिजिटल मंचों पर बेचता है, ताकि कारीगर मेले के मैदान से बहुत आगे के ग्राहकों तक पहुंच सके।

Q4.सरकारी योजनाएंमध्यम

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय किस वर्ष से शिल्प समागम मेले लगा रहा है?

  1. A.2015
  2. B.2019
  3. C.2022
  4. D.2024
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2022

मंत्रालय इसी वर्ष से ये मेले लगा रहा है और अब तक 13 मेले हो चुके हैं, जिनसे 975 कारीगरों को अपना सामान ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिला।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिल्प समागम मेला 2026 कहां आयोजित हुआ था?

कर्नाटक के मैसूरु स्थित दशहरा प्रदर्शनी मैदान में। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का यह नौ दिवसीय मेला 20 अक्टूबर 2026 को संपन्न हुआ और यह वित्त वर्ष 2026-27 का पहला ऐसा मेला था।

शिल्प समागम मेले के कारीगरों को कौन से निगम सहयोग देते हैं?

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तीन राष्ट्रीय निगम - राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (NSFDC), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC)।

BHARAT TULIP का पूरा नाम क्या है?

पारंपरिक कारीगर उत्थान जीविका कार्यक्रम (Traditional Artisans Upliftment Livelihood Programme)। इसके तहत मंत्रालय लक्षित वर्गों के उत्पादों को इसी ब्रांड नाम से देश और विदेश के डिजिटल मंचों पर बेचता है।

मैसूरु मेले में कितने स्टॉल और कारीगर थे?

कुल 83 स्टॉल लगे, जिनमें 80 कारीगरों को दिए गए और भाग लेने वाले कारीगरों में 37 महिलाएं थीं। ये कारीगर कर्नाटक, बिहार, केरल, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित 12 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों से आए थे।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLSSC CHSL