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GK24

पिथौरागढ़ शीतजल मत्स्य क्लस्टर और मुनस्यारी की ट्राउट

मत्स्य पालन सचिव अभिलक्ष लिखी ने पिथौरागढ़ के मुनस्यारी में ट्राउट पालन देखा; शीतजल क्षेत्रों में पीएमएमएसवाई का निवेश 2,299 करोड़ रुपये पार कर गया है।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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पिथौरागढ़ शीतजल मत्स्य क्लस्टर और मुनस्यारी की ट्राउट

चर्चा में क्यों

18 अक्टूबर 2026 को मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित मुनस्यारी शीतजल मत्स्य क्लस्टर का दौरा किया, रेनबो ट्राउट किसानों से मुलाकात की और देश के 34 अधिसूचित मत्स्य क्लस्टरों में शामिल इस क्लस्टर के विकास की समीक्षा की।

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने 18 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी का दौरा किया और हिमालयी क्षेत्र में शीतजल जलकृषि की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने जोहार मत्स्य स्वायत्त सहकारिता तथा नमजला ट्राउट फार्म के किसानों से बात की और रेनबो ट्राउट पालन को आजीविका बनाने में स्थानीय सहकारी समितियों की भूमिका की सराहना की।

मुनस्यारी ही क्यों

गोरी गंगा की हिमनद धाराएं और उनका अनुकूल जल तापमान इस कस्बे को रेनबो ट्राउट पालन का केंद्र बना चुके हैं, जिससे यहां की खेती निर्वाह स्तर से आगे बढ़कर अर्ध-व्यावसायिक रूप ले चुकी है। केंद्र सरकार ने देश भर में 34 मत्स्य क्लस्टर अधिसूचित किए हैं और इनमें पिथौरागढ़ को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत शीतजल मत्स्य क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किया गया है।

योजना से क्या मिला

भारत की शीतजल मत्स्य पालन गतिविधियां छह पहाड़ी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में केंद्रित हैं: उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश। योजना के तहत इन क्षेत्रों में निवेश 2,299 करोड़ रुपये से आगे निकल चुका है, जो रेसवे, हैचरी, फीड मिल, शीतगृह तथा कटाई-पश्चात ढांचे पर लगा है।

पीएमएमएसवाई के तहत स्वीकृतसंख्या
रेसवे5,600 से अधिक
हैचरी54
शीतगृह293
फीड मिल260

पिछले दस वर्षों में ट्राउट उत्पादन छह गुना बढ़कर सालाना लगभग 5,000 मीट्रिक टन पर पहुंच गया है।

उत्तराखंड की तैयारी

राज्य में 317 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर हुई हैं, जिनमें आधुनिक मछली बाजार, लैंडिंग केंद्र और सितारगंज में एकीकृत एक्वापार्क शामिल हैं। राज्य ने 170 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली ट्राउट प्रोत्साहन योजना भी शुरू की है, जिसका लक्ष्य 2028-29 तक 1,500 रेसवे, 100 मिनी हैचरी और 600 शीतगृह स्थापित करना है।

बाजार देश में और बाहर

उत्तराखंड ने जून 2026 में नेपाल को ट्राउट की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप भेजी, जो राज्य से इस मछली का पहला निर्यात था। देश के भीतर राज्य सरकार और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के बीच हुए समझौते के तहत बल को ट्राउट की आपूर्ति होती है, जिससे किसानों को पक्का खरीदार मिलता है। सचिव ने आईसीएआर-शीतजल मत्स्य अनुसंधान निदेशालय (डीसीएफआर), भीमताल को मुनस्यारी में रेनबो ट्राउट पहुंचाने तथा बीज उत्पादन, रोग प्रबंधन और किसान प्रशिक्षण में सहयोग का श्रेय दिया।

महत्व क्यों

सचिव के अनुसार पहाड़ी राज्यों के लिए शीतजल जलकृषि रणनीतिक महत्व रखती है: यह आजीविका में विविधता लाती है, पोषण सुरक्षा बढ़ाती है, निर्यात की राह खोलती है, पर्यावरण-पर्यटन को बल देती है, महसीर जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में मदद करती है और सीमावर्ती गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत करती है।

महत्वपूर्ण तथ्य

दौरा कियाडॉ. अभिलक्ष लिखी, सचिव, मत्स्य पालन विभाग
स्थानमुनस्यारी, पिथौरागढ़ जिला, उत्तराखंड
क्लस्टरपिथौरागढ़, पीएमएमएसवाई के तहत शीतजल मत्स्य क्लस्टर
देश में अधिसूचित क्लस्टर34 मत्स्य क्लस्टर
शीतजल क्षेत्रों में निवेश2,299 करोड़ रुपये से अधिक
शीतजल राज्य और केंद्रशासित प्रदेशउत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश
ट्राउट उत्पादनसालाना लगभग 5,000 मीट्रिक टन, दस वर्षों में छह गुना वृद्धि
पहला निर्यातजून 2026 में नेपाल को, राज्य का पहला ट्राउट निर्यात
राज्य की योजनाट्राउट प्रोत्साहन योजना, परिव्यय 170 करोड़ रुपये, 1,500 रेसवे का लक्ष्य
अनुसंधान संस्थानआईसीएआर-शीतजल मत्स्य अनुसंधान निदेशालय (डीसीएफआर), भीमताल
पक्का खरीदारभारत-तिब्बत सीमा पुलिस, राज्य सरकार के साथ समझौते के तहत

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि पीएमएमएसवाई के तहत शीतजल मत्स्य क्लस्टर पिथौरागढ़ है और कुल 34 क्लस्टर अधिसूचित हैं; शीतजल क्षेत्रों में 2,299 करोड़ रुपये का निवेश; छह शीतजल राज्य तथा केंद्रशासित प्रदेश; छह गुना वृद्धि के बाद लगभग 5,000 मीट्रिक टन ट्राउट उत्पादन; जून 2026 में नेपाल को पहला निर्यात; 170 करोड़ रुपये की ट्राउट प्रोत्साहन योजना; और शीतजल मत्स्य संस्थान आईसीएआर-डीसीएफआर, भीमताल।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंमध्यम

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत किस जिले को शीतजल मत्स्य क्लस्टर अधिसूचित किया गया है?

  1. A.नैनीताल
  2. B.पिथौरागढ़
  3. C.चमोली
  4. D.अल्मोड़ा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पिथौरागढ़

उत्तराखंड के इस जिले को योजना के तहत शीतजल मत्स्य क्लस्टर अधिसूचित किया गया है, और मत्स्य पालन विभाग के सचिव ने मुनस्यारी पहुंचकर इसकी प्रगति की समीक्षा की।

Q2.सरकारी योजनाएंमध्यम

उत्तराखंड की ट्राउट प्रोत्साहन योजना का परिव्यय कितना है?

  1. A.70 करोड़ रुपये
  2. B.170 करोड़ रुपये
  3. C.270 करोड़ रुपये
  4. D.317 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 170 करोड़ रुपये

यह राज्य की अपनी ट्राउट योजना का परिव्यय है, जिसके तहत उत्तराखंड 2028-29 तक 1,500 रेसवे, 100 मिनी हैचरी और 600 शीतगृह बनाने का लक्ष्य रखता है।

Q3.सरकारी योजनाएंमध्यम

उत्तराखंड ने जून 2026 में ट्राउट का पहला अंतरराष्ट्रीय निर्यात किस देश को किया?

  1. A.भूटान
  2. B.नेपाल
  3. C.बांग्लादेश
  4. D.श्रीलंका
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नेपाल

राज्य के मत्स्य पालन विभाग ने ट्राउट की पहली खेप इसी पड़ोसी देश को भेजी, जिसे सचिव ने पहाड़ी किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार की नई राह खोलने वाली उपलब्धि बताया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएमएमएसवाई के तहत शीतजल मत्स्य क्लस्टर कौन सा जिला है?

उत्तराखंड का पिथौरागढ़। यह देश में अधिसूचित 34 मत्स्य क्लस्टरों में शामिल है, और मुनस्यारी के आसपास गोरी गंगा की हिमनद धाराएं रेनबो ट्राउट के लिए जरूरी जल तापमान देती हैं।

शीतजल मत्स्य पालन में योजना का निवेश कितना है?

शीतजल क्षेत्रों में 2,299 करोड़ रुपये से अधिक, जो रेसवे, हैचरी, फीड मिल, शीतगृह और कटाई-पश्चात ढांचे पर खर्च हुआ है। इन राज्यों में 5,600 से अधिक रेसवे, 54 हैचरी, 293 शीतगृह तथा 260 फीड मिल स्वीकृत हुए हैं।

ट्राउट प्रोत्साहन योजना क्या है?

यह उत्तराखंड की अपनी योजना है, जिसका परिव्यय 170 करोड़ रुपये है। इसका लक्ष्य 2028-29 तक 1,500 रेसवे, 100 मिनी हैचरी और 600 शीतगृह बनाना है; इसके अलावा राज्य के लिए 317 करोड़ रुपये की केंद्रीय परियोजनाएं मंजूर हुई हैं।

उत्तराखंड ने ट्राउट का पहला निर्यात कहां किया?

जून 2026 में नेपाल को, जो राज्य से इस मछली की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप थी। देश के भीतर राज्य सरकार और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के बीच समझौते के तहत बल को ट्राउट की आपूर्ति होती है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CHSLNABARD