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GK24

पुणे में डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 कार्यों की समीक्षा

भूमि संसाधन विभाग के सचिव दिलीप कुमार ने पुणे के खेड़ में जलग्रहण कार्यों की समीक्षा की और महाराष्ट्र के 76 सूखा प्रभावित तालुकों में तेजी लाने को कहा।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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पुणे में डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 कार्यों की समीक्षा

चर्चा में क्यों

30 अक्टूबर 2026 को भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री दिलीप कुमार ने पुणे जिले के तीन गांवों में डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 के जलग्रहण विकास कार्यों की समीक्षा की और महाराष्ट्र के सूखा प्रवण तालुकों में जल संरक्षण कार्य शीघ्र पूरे करने का निर्देश दिया।

पश्चिमी महाराष्ट्र के गांवों में जल संरक्षण के कार्य इस सप्ताह आधिकारिक समीक्षा के दायरे में आए। ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री दिलीप कुमार ने 30 अक्टूबर 2026 को पुणे जिले के वरुडे, गुलानी और वाफगांव गांवों में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के जलग्रहण विकास घटक (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0) के तहत हुए कार्यों का निरीक्षण किया।

सचिव ने क्या कहा

निरीक्षण के बाद ग्रामीणों से बातचीत में उन्होंने कहा कि पानी हमारे भविष्य की नींव है और गांवों को जल सुरक्षित तथा आत्मनिर्भर बनाने के लिए बारिश की हर बूंद को रोकना होगा। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि योजना के तहत बनी जल संचयन संरचनाओं की मरम्मत और रखरखाव की सामूहिक जिम्मेदारी लें, जिससे ये परिसंपत्तियां अगले बीस वर्ष तक काम करती रहें। उन्होंने खेड़ परियोजना के गांवों के लिए महाराष्ट्र के प्रसिद्ध जल सुरक्षित गांव हिवरे बाजार को आदर्श बताया।

जमीन पर बनी संरचनाएं

कार्य रिज-टू-वैली यानी ढलान के ऊपरी भाग से नीचे की ओर उपचार की पद्धति पर आधारित हैं। दौरे में देखी गई संरचनाओं में सतत समतल खाइयां (सीसीटी), मिट्टी के नाला बांध, सीमेंट नाला बांध, कोल्हापुरी प्रकार के बंधारे और जल भंडारण तालाब शामिल हैं। सचिव ने देखा कि इन संरचनाओं से वर्षा जल का बहाव कितना घटा, भूजल पुनर्भरण कितना हुआ और खेती के लिए पानी की उपलब्धता कितनी बढ़ी। उन्होंने खेत तालाबों, बागवानी रोपण, लाभार्थियों को दिए गए कृषि उपकरणों तथा महिला स्वयं सहायता समूहों को मिले लाभों की भी समीक्षा की।

ग्रामीणों ने क्या बताया

  • खेड़ परियोजना के ग्यारह गांवों में जलग्रहण कार्यों से भूजल स्तर बढ़ा है
  • किसान अब वर्ष में दो से तीन फसलें ले पा रहे हैं, जिससे कृषि आय और ग्रामीण आजीविका सुधरी है
  • इस वर्ष सूखे जैसी स्थिति के बावजूद खेत तालाबों तथा सीमेंट नाला बांध और खाइयों के पास के कुओं के पानी से खड़ी फसलों की सिंचाई हो सकी

समीक्षा बैठक

इससे एक दिन पहले, 29 अक्टूबर 2026 को सचिव ने पुणे के यशदा में महाराष्ट्र सरकार के मृदा एवं जल संरक्षण विभाग के सचिव के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की और योजना की भौतिक तथा वित्तीय प्रगति देखी। अल नीनो की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्होंने राज्य के 304 सूखा प्रभावित तालुकों में से योजना के अंतर्गत आने वाले 76 तालुकों में कार्य तेज करने पर बल दिया। प्राथमिकता वाले कार्यों में परकोलेशन टैंक, भंडारण तालाब, भंडारण बांध और कोल्हापुरी प्रकार के बंधारे गिनाए गए। अधिकारियों से कहा गया कि समय सीमा का पालन करें, गुणवत्ता बनाए रखें, केंद्र-राज्य समन्वय मजबूत करें और उपलब्ध धन का प्रभावी उपयोग करें।

दौरे में अन्य कौन शामिल थे

भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव (जलग्रहण प्रबंधन) श्री नितिन खाड़े, महाराष्ट्र के मृदा एवं जल संरक्षण विभाग के सचिव डॉ. जितेंद्र पापलकर तथा वसुंधरा जलग्रहण विकास अभिकरण की उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती अश्विनी जगताप दौरे में शामिल रहे।

महत्वपूर्ण तथ्य

योजनाडब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का जलग्रहण विकास घटक
क्रियान्वयन विभागभूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय
समीक्षा करने वाले अधिकारीश्री दिलीप कुमार, सचिव, भूमि संसाधन विभाग
दौरा किए गए गांववरुडे, गुलानी और वाफगांव, खेड़, पुणे जिला, महाराष्ट्र
दौरे की तिथि30 अक्टूबर 2026
समीक्षा बैठक29 अक्टूबर 2026, यशदा, पुणे
महाराष्ट्र में कवरेज304 सूखा प्रभावित तालुकों में से 76 तालुके योजना के अंतर्गत
आदर्श गांवहिवरे बाजार
पद्धति एवं संरचनाएंरिज-टू-वैली; सतत समतल खाइयां, नाला बांध, कोल्हापुरी बंधारे, तालाब

परीक्षा की दृष्टि से

डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई का पूरा नाम (प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का जलग्रहण विकास घटक) और यह कि इसे ग्रामीण विकास मंत्रालय का भूमि संसाधन विभाग चलाता है, जल शक्ति मंत्रालय नहीं, यह याद रखें। आंकड़े भी याद रखें: महाराष्ट्र के 304 सूखा प्रभावित तालुकों में से 76 योजना में, खेड़ परियोजना के ग्यारह गांव, बीस वर्ष के रखरखाव की बात, रिज-टू-वैली पद्धति और आदर्श गांव हिवरे बाजार।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंमध्यम

पुणे जिले में जिन जलग्रहण कार्यों की समीक्षा हुई, वह डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 किस विभाग द्वारा क्रियान्वित है?

  1. A.भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय
  2. B.जल संसाधन विभाग, जल शक्ति मंत्रालय
  3. C.कृषि एवं किसान कल्याण विभाग
  4. D.पेयजल एवं स्वच्छता विभाग
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का जलग्रहण विकास घटक इसी विभाग के पास है, इसलिए विभाग के सचिव श्री दिलीप कुमार ने पुणे जिले के वरुडे, गुलानी और वाफगांव गांवों में कार्यों का निरीक्षण किया और राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

Q2.सरकारी योजनाएंमध्यम

खेड़ परियोजना के गांवों को जल सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए किस गांव को आदर्श बताया गया?

  1. A.राळेगण सिद्धि
  2. B.हिवरे बाजार
  3. C.पुनसारी
  4. D.धरनई
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. हिवरे बाजार

भूमि संसाधन विभाग के सचिव ने कहा कि पुणे जिले की खेड़ परियोजना के गांवों को इसी तरह जल सुरक्षित और आत्मनिर्भर समुदायों में बदला जाए।

Q3.सरकारी योजनाएंकठिन

महाराष्ट्र के 304 सूखा प्रभावित तालुकों में से कितने तालुके डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई के अंतर्गत आते हैं?

  1. A.47 तालुके
  2. B.76 तालुके
  3. C.104 तालुके
  4. D.150 तालुके
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 76 तालुके

पुणे के यशदा में हुई समीक्षा बैठक में भूमि संसाधन विभाग के सचिव ने अल नीनो की स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य के 304 सूखा प्रभावित तालुकों में से योजना के अंतर्गत आने वाले 76 तालुकों में कार्य तेज करने पर बल दिया।

Q4.सरकारी योजनाएंकठिन

पुणे जिले में समीक्षित जलग्रहण कार्यों में अपनाई गई 'रिज-टू-वैली' पद्धति का अर्थ क्या है?

  1. A.जलग्रहण क्षेत्र का उपचार ऊपरी ढलान से नीचे की ओर करना
  2. B.बांध से खेत तक नहरों की लाइनिंग करना
  3. C.अधिशेष नदी घाटियों से कमी वाली घाटियों में पानी ले जाना
  4. D.केवल घाटी के सबसे निचले भाग में चेक डैम बनाना
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जलग्रहण क्षेत्र का उपचार ऊपरी ढलान से नीचे की ओर करना

दौरे में देखी गई संरचनाएं इसी पद्धति पर बनी हैं, जिनमें सतत समतल खाइयां, मिट्टी के नाला बांध, सीमेंट नाला बांध, कोल्हापुरी प्रकार के बंधारे और भंडारण तालाब शामिल हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई का पूरा नाम क्या है?

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का जलग्रहण विकास घटक। इसका दूसरा चरण डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0 ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग द्वारा चलाया जाता है।

महाराष्ट्र के कितने तालुके इस योजना में शामिल हैं?

राज्य के 304 सूखा प्रभावित तालुकों में से 76 तालुके योजना के अंतर्गत हैं, जहां अल नीनो को देखते हुए कार्य तेज करने को कहा गया है।

जल सुरक्षित गांव के आदर्श रूप में किस गांव का उल्लेख हुआ?

हिवरे बाजार। सचिव ने कहा कि पुणे जिले की खेड़ परियोजना के गांवों को इसी तरह जल सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाया जाए।

जलग्रहण विकास के तहत कौन सी संरचनाएं बनती हैं?

सतत समतल खाइयां, मिट्टी के नाला बांध, सीमेंट नाला बांध, कोल्हापुरी प्रकार के बंधारे, परकोलेशन टैंक, भंडारण तालाब और खेत तालाब, जो रिज-टू-वैली पद्धति पर बनते हैं।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLNABARD