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सीसीआई ने सैफायर-देवयानी विलय और नवी सौदे को मंजूरी दी

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने सैफायर फूड्स इंडिया के देवयानी इंटरनेशनल में विलय और नवी लिमिटेड में एमआईएच पेमेंट्स की हिस्सेदारी खरीद को मंजूरी दी।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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सीसीआई ने सैफायर-देवयानी विलय और नवी सौदे को मंजूरी दी — GK24 title card

चर्चा में क्यों

31 अक्टूबर 2026 को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने सैफायर फूड्स इंडिया के देवयानी इंटरनेशनल में विलय को मंजूरी दी और अलग से एमआईएच पेमेंट्स होल्डिंग्स बी.वी. द्वारा नवी लिमिटेड में हिस्सेदारी खरीद को भी हरी झंडी दी।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने दो अलग-अलग संयोजनों को मंजूरी दी है, एक तेज सेवा वाले रेस्तरां कारोबार से जुड़ा है और दूसरा डिजिटल वित्तीय सेवाओं से। दोनों मंजूरियां 31 अक्टूबर 2026 को सामने आईं।

सैफायर फूड्स का देवयानी में विलय

पहली मंजूरी सैफायर फूड्स इंडिया लिमिटेड के देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड में विलय से जुड़ी है, जिसके साथ कुछ संबंधित लेन-देन भी शामिल हैं। दोनों पक्षों ने इन सबको एक ही प्रस्तावित संयोजन के रूप में आयोग के सामने रखा था। चूंकि विलय इस रूप में है कि सैफायर देवयानी में समाहित हो रहा है, इसलिए विलय के बाद देवयानी ही बची रहने वाली कंपनी होगी।

दोनों कंपनियां एक ही कारोबार में हैं और प्रतिस्पर्धा कानून की दृष्टि से यही बात सौदे को महत्वपूर्ण बनाती है। देवयानी देश भर में केएफसी और पिज्जा हट के फ्रेंचाइजी आउटलेट चलाती है, और सैफायर भी भारत में केएफसी तथा पिज्जा हट के आउटलेट चलाती है। देवयानी का दायरा इन दो ब्रांडों से आगे जाता है: वह भारत में कोस्टा कॉफी, न्यूयॉर्क फ्राइज और सानूक किचन की एकमात्र फ्रेंचाइजी धारक है, और उसके अपने स्वदेशी ब्रांड भी हैं जिन्हें वह स्वयं चलाती है।

दूसरी मंजूरी में आयोग ने एमआईएच पेमेंट्स होल्डिंग्स बी.वी. को नवी लिमिटेड में कुछ शेयरधारिता खरीदने की अनुमति दी। नवी लिमिटेड, नवी समूह की होल्डिंग कंपनी है, जो एक ही मोबाइल ऐप के जरिये ग्राहकों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाती है, और उत्पाद उसकी सहायक कंपनियां देती हैं।

अधिग्रहणकर्ता प्रोसस एनवी की अप्रत्यक्ष रूप से पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। वह स्वयं कोई कारोबार नहीं करती; उसका काम केवल उन पोर्टफोलियो कंपनियों में निवेश रखना है जिनकी गतिविधियां भारत में हैं।

आयोग की भूमिका क्यों

प्रतिस्पर्धा कानून में तय सीमाओं से बड़ा कोई भी विलय या अधिग्रहण आयोग की जांच और मंजूरी के बिना पूरा नहीं किया जा सकता। आयोग यह देखता है कि सौदे से भारत के संबंधित बाजार में प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचने की आशंका है या नहीं।

महत्वपूर्ण तथ्य

नियामकभारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई)
पहला सौदासैफायर फूड्स इंडिया लिमिटेड का देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड में विलय तथा संबंधित लेन-देन
बची रहने वाली कंपनीदेवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड
साझा ब्रांडकेएफसी और पिज्जा हट, जिन्हें दोनों कंपनियां चलाती हैं
देवयानी की विशेष फ्रेंचाइजीकोस्टा कॉफी, न्यूयॉर्क फ्राइज और सानूक किचन
दूसरा सौदाएमआईएच पेमेंट्स होल्डिंग्स बी.वी. द्वारा नवी लिमिटेड में कुछ शेयरधारिता का अधिग्रहण
अधिग्रहणकर्ता की मूल कंपनीप्रोसस एनवी, जिसकी एमआईएच पेमेंट्स होल्डिंग्स बी.वी. अप्रत्यक्ष पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक है
नवी लिमिटेड क्या हैनवी समूह की होल्डिंग कंपनी, जो एक ही उपभोक्ता मोबाइल ऐप से वित्तीय सेवाएं देती है

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि विलय के बाद कौन सी कंपनी बची रहेगी (देवयानी इंटरनेशनल), दोनों कंपनियां केएफसी और पिज्जा हट चलाती हैं, देवयानी के तीन विशेष फ्रेंचाइजी ब्रांड कौन हैं, एमआईएच पेमेंट्स होल्डिंग्स बी.वी. किसकी सहायक कंपनी है, और नवी लिमिटेड नवी समूह की होल्डिंग कंपनी है जो एक ही ऐप से सेवाएं देती है।

अभ्यास प्रश्न

Q1.अर्थव्यवस्थाआसान

सीसीआई की मंजूरी के अनुसार सैफायर फूड्स इंडिया लिमिटेड का विलय किस कंपनी में होगा?

  1. A.जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड
  2. B.देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड
  3. C.वेस्टलाइफ फूडवर्ल्ड लिमिटेड
  4. D.बारबेक्यू नेशन हॉस्पिटैलिटी लिमिटेड
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने सैफायर फूड्स इंडिया लिमिटेड के देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड में विलय और उससे जुड़े कुछ लेन-देन को मंजूरी दी, जिन्हें एक ही प्रस्तावित संयोजन के रूप में आयोग के सामने रखा गया था।

Q2.अर्थव्यवस्थामध्यम

देवयानी इंटरनेशनल और सैफायर फूड्स, दोनों भारत में किन दो फ्रेंचाइजी ब्रांडों के आउटलेट चलाती हैं?

  1. A.डोमिनोज पिज्जा और सबवे
  2. B.केएफसी और पिज्जा हट
  3. C.मैकडॉनल्ड्स और बर्गर किंग
  4. D.स्टारबक्स और टैको बेल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केएफसी और पिज्जा हट

दोनों कंपनियां भारत में इन्हीं दो ब्रांडों के फ्रेंचाइजी आउटलेट चलाती हैं, और यही साझा दायरा इस विलय को प्रतिस्पर्धा की जांच का विषय बनाता है, वरना यह एक सामान्य कॉर्पोरेट कदम होता।

Q3.अर्थव्यवस्थामध्यम

नवी लिमिटेड में हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी पाने वाली एमआईएच पेमेंट्स होल्डिंग्स बी.वी. किस कंपनी की अप्रत्यक्ष पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक है?

  1. A.प्रोसस एनवी
  2. B.सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉर्प
  3. C.अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग
  4. D.टेमासेक होल्डिंग्स
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. प्रोसस एनवी

आयोग की मंजूरी में कहा गया है कि अधिग्रहणकर्ता एमआईएच पेमेंट्स होल्डिंग्स बी.वी. प्रोसस एनवी की अप्रत्यक्ष रूप से पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है, और वह स्वयं कोई कारोबार नहीं करती, केवल उन पोर्टफोलियो कंपनियों में निवेश रखती है जिनकी गतिविधियां भारत में हैं।

Q4.अर्थव्यवस्थाकठिन

देवयानी इंटरनेशनल भारत में किस कॉफी शृंखला की एकमात्र फ्रेंचाइजी धारक है?

  1. A.कोस्टा कॉफी
  2. B.टिम हॉर्टन्स
  3. C.डंकिन
  4. D.ग्लोरिया जीन्स कॉफीज
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कोस्टा कॉफी

देश भर में केएफसी और पिज्जा हट के फ्रेंचाइजी आउटलेट चलाने के अलावा देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड भारत में कोस्टा कॉफी की एकमात्र फ्रेंचाइजी धारक है, और उसके साथ न्यूयॉर्क फ्राइज तथा सानूक किचन की भी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सैफायर-देवयानी विलय के बाद कौन सी कंपनी बची रहेगी?

देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड। सैफायर फूड्स इंडिया लिमिटेड उसमें समाहित हो जाएगी, और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने विलय तथा संबंधित लेन-देन को मंजूरी दे दी है।

एमआईएच पेमेंट्स होल्डिंग्स बी.वी. किसकी सहायक कंपनी है?

वह प्रोसस एनवी की अप्रत्यक्ष रूप से पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। वह स्वयं कोई कारोबार नहीं करती और केवल भारत में काम करने वाली पोर्टफोलियो कंपनियों में निवेश रखती है।

नवी लिमिटेड क्या करती है?

वह नवी समूह की होल्डिंग कंपनी है, जो एक ही उपभोक्ता मोबाइल ऐप के जरिये वित्तीय सेवाएं देती है और उत्पाद उसकी सहायक कंपनियों के माध्यम से दिए जाते हैं।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLबैंकिंग