उत्तर प्रदेश के मध्यवर्ती जिलों की ऊसर मिट्टी का सुधार मुख्यतः किसके प्रयोग से किया जाता है?
- A.जिप्सम
- B.चूना
- C.यूरिया
- D.रॉक फॉस्फेट
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर A, जिप्सम है। ऊसर, जिसे रेह भी कहते हैं, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई, कानपुर और अलीगढ़ जैसे जिलों की लवणीय तथा क्षारीय मिट्टी है, जहां सोडियम के लवण सतह पर जमा हो जाते हैं; जिप्सम अर्थात कैल्शियम सल्फेट मिट्टी के कणों पर जमे सोडियम को कैल्शियम से बदल देता है, फिर सोडियम जल निकास से बह जाता है और भूमि फसल योग्य हो जाती है, तथा हरी खाद के लिए ढैंचा बोया जाता है। विकल्प B, चूना, इसके उलट समस्या अर्थात अम्लीय मिट्टी में डाला जाता है, जैसे पश्चिमी घाट या पूर्वोत्तर की लैटेराइट भूमि में। विकल्प C, यूरिया, नाइट्रोजन उर्वरक है, जो पोषक तत्व देता है परंतु क्षारीयता पर कोई असर नहीं डालता। विकल्प D, रॉक फॉस्फेट, फॉस्फोरस देता है। सरल नियम याद रखें: क्षारीय ऊसर के लिए जिप्सम और अम्लीय मिट्टी के लिए चूना।
पूरा लेख पढ़ें: उत्तर प्रदेश की जलवायु, मिट्टियां और वन: परीक्षा नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंउत्तर प्रदेश की अधिकांश वर्षा किससे होती है?
- A.दक्षिण पश्चिम मानसून की अरब सागर शाखा
- B.दक्षिण पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा
- C.लौटता हुआ उत्तर पूर्वी मानसून
- D.पश्चिमी विक्षोभ
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, दक्षिण पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा है। यह शाखा गंगा के डेल्टा से टकराती है, हिमालय से मुड़कर पश्चिम की ओर गंगा के मैदान पर बढ़ती है, इसलिए यह जून के मध्य के आसपास पूर्वी उत्तर प्रदेश पहुंचती है और फिर पश्चिम की ओर जाती है, जिससे राज्य के पूर्वी भाग में वर्षा पहले और अधिक होती है। विकल्प A, अरब सागर शाखा, पश्चिमी तट, गुजरात और दक्कन को सींचती है और उत्तर प्रदेश के अत्यंत पश्चिमी भाग तक क्षीण रूप में ही पहुंचती है। विकल्प C, लौटता हुआ अर्थात उत्तर पूर्वी मानसून, अक्टूबर और नवंबर में तमिलनाडु तथा तटीय आंध्र प्रदेश को वर्षा देता है और यहां उसका लगभग कोई प्रभाव नहीं है। विकल्प D, पश्चिमी विक्षोभ, राज्य को शीत ऋतु में कुछ वर्षा देते हैं, जिसे महावट कहा जाता है, परंतु वह वार्षिक वर्षा का बहुत छोटा अंश है, मुख्य स्रोत नहीं।
उत्तर प्रदेश में वार्षिक वर्षा की मात्रा किस दिशा में घटती जाती है?
- A.दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम की ओर
- B.उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्व की ओर
- C.उत्तर से दक्षिण की ओर
- D.राज्य में सर्वत्र समान वर्षा होती है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम की ओर है। मानसून की धारा दक्षिण पूर्व में बंगाल की खाड़ी से प्रवेश करती है और मैदान पर आगे बढ़ते हुए नमी खोती जाती है, इसलिए पूर्वी जिले तथा गोरखपुर, बहराइच और लखीमपुर खीरी की तराई सर्वाधिक आर्द्र हैं, जबकि मथुरा, आगरा और झांसी, जालौन तथा बांदा जैसे बुंदेलखंड के जिले सबसे शुष्क तथा सूखे के प्रति संवेदनशील हैं। विकल्प B ढाल को उलट देता है और उससे शुष्क पश्चिम सबसे आर्द्र भाग बन जाएगा, जो सही नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि कमी उत्तर से दक्षिण की ओर नहीं है; उत्तर की तलहटी पट्टी तो आर्द्र है। विकल्प D गलत है, क्योंकि राज्य में पूर्व से पश्चिम तक वर्षा का बड़ा अंतर दिखता है। चित्र का दूसरा भाग भी याद रखें: आर्द्र पूर्वी तराई घाघरा, राप्ती और गंडक की बाढ़ भी झेलती है।
मई और जून के आरंभ में उत्तर प्रदेश के मैदानों पर चलने वाली गर्म, शुष्क और धूल भरी पवन को क्या कहा जाता है?
- A.महावट
- B.लू
- C.पाला
- D.काल बैसाखी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, लू है। यह गर्म, शुष्क और धूल भरी पवन मई तथा जून के आरंभ की दोपहर में पश्चिम से उत्तरी मैदानों पर चलती है, आगरा, झांसी और बांदा में तापमान पैंतालीस डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचा देती है, लू लगने का कारण बनती है, और मानसून के आने पर ही रुकती है। विकल्प A, महावट, विपरीत ऋतु की बात है: वह पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली हल्की शीतकालीन वर्षा है, जो रबी फसल को लाभ देती है। विकल्प C, पाला, जनवरी का तुषार है, जो आलू, सरसों और चने को हानि पहुंचा सकता है। विकल्प D, काल बैसाखी, अप्रैल में पश्चिम बंगाल तथा पूर्वी राज्यों में आने वाला प्रचंड सांध्य तूफान है, जिसे नॉरवेस्टर भी कहा जाता है, और वह उत्तर प्रदेश की विशेषता नहीं है। तीनों स्थानीय शब्द लू, महावट और पाला साथ याद करें, क्योंकि प्रश्न प्रायः इन्हें आपस में मिला देता है।
पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली उत्तर प्रदेश की शीतकालीन वर्षा महावट किसके लिए सर्वाधिक उपयोगी है?
- A.खरीफ के धान और गन्ने के लिए
- B.रबी के गेहूं और चने के लिए
- C.तराई के जूट के लिए
- D.फूल आए आम के बागों के लिए
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, रबी के गेहूं और चने के लिए है। पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर से ईरान और पाकिस्तान के रास्ते आते हैं और दिसंबर, जनवरी तथा फरवरी में मैदानों को हल्की वर्षा के कुछ दौर देते हैं, ठीक उस समय जब खेत में गेहूं, चना, जौ और सरसों खड़े होते हैं, इसलिए किसान इस वर्षा को सोने की बूंद कहते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि धान और गन्ना खरीफ की फसलें हैं, जो मानसून में उगती हैं और शीत ऋतु तक कट चुकी होती हैं या पक चुकी होती हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि जूट आर्द्र पूर्व की खरीफ फसल है, जो मुख्यतः पश्चिम बंगाल में होती है, उत्तर प्रदेश में नहीं। विकल्प D पूछे गए अर्थ में गलत है, क्योंकि आम में फूल आने के समय बेमौसम वर्षा और ओले फसल को लाभ के बजाय हानि पहुंचाते हैं। यह वर्षा मात्रा में कम, परंतु रबी की उपज के लिए मूल्य में बहुत बड़ी होती है।
उत्तर प्रदेश के ऊंचे भागों की वह पुरानी जलोढ़ मिट्टी, जिसमें चूनेदार कंकड़ मिलते हैं, क्या कहलाती है?
- A.खादर
- B.बांगर
- C.भाबर
- D.भूड़
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व्याख्या
सही उत्तर B, बांगर है। बांगर वर्तमान नदी मार्गों से दूर ऊंची भूमि की पुरानी जलोढ़ मिट्टी है; यह अधिक गहरे रंग की, अधिक चिकनी और कंकड़ नामक चूने की गांठों से युक्त होती है, तथा इसमें नई गाद नहीं जुड़ती। विकल्प A, खादर, इसके विपरीत है: वह बाढ़ क्षेत्र की नवीन जलोढ़ मिट्टी है, रंग और गठन में हल्की, प्रत्येक बाढ़ में नई गाद से भरने वाली और इसलिए अधिक उपजाऊ, जिसे स्थानीय भाषा में कछार कहा जाता है। विकल्प C, भाबर, हिमालय की तलहटी की संकरी कंकरीली और छिद्रयुक्त पट्टी है, जिसमें धाराएं भूमि के भीतर लुप्त हो जाती हैं। विकल्प D, भूड़, ऊपरी गंगा यमुना दोआब की बलुई पवन जनित मिट्टी है। खादर और बांगर की जोड़ी अभ्यर्थी इस अध्याय में सबसे अधिक उलटते हैं, इसलिए इसे नवीन और पुरानी शब्दों से पक्का करें।