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GK24
अर्थव्यवस्थामध्यम

सुझाए गए सुधारों के अनुसार रिफंड दावे की पावती कितने दिनों में देनी होगी?

  1. A.7 दिन
  2. B.10 दिन
  3. C.15 दिन
  4. D.30 दिन

सही उत्तर

B. 10 दिन

व्याख्या

सही उत्तर 10 दिन है। रिफंड तेज करने के उपायों में पावती की अवधि छोटी करना शामिल है। यह अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी जाएगी और यदि इस अवधि में कोई जवाब न दिया जाए तो दावे की पावती मान ली जाएगी। विकल्प ग यानी 15 दिन गलत है, क्योंकि यह वही पुरानी अवधि है जिसे बदला जा रहा है; यह एक आम जाल है और बदलाव की दिशा ध्यान से पढ़ने वाला अभ्यर्थी ही बचता है। विकल्प क और घ यानी 7 दिन और 30 दिन गलत हैं, क्योंकि ऐसी कोई अवधि पत्र में प्रस्तावित नहीं है। छोटी अवधि के साथ-साथ सुधारों में नकद खाता-बही की अतिरिक्त राशि का रिफंड अपने आप देने और शून्य दर वाली आपूर्ति तथा उलटे शुल्क ढांचे के दावों में जोखिम आंकलन पर करीब 90 प्रतिशत राशि मंजूर करने की बात कही गई है।

पूरा लेख पढ़ें: जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में अगली पीढ़ी के प्रक्रिया सुधार

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Q1.अर्थव्यवस्थामध्यम

अगली पीढ़ी के जीएसटी प्रक्रिया सुधारों की सिफारिश जीएसटी परिषद की किस बैठक ने की?

  1. A.55वीं
  2. B.56वीं
  3. C.57वीं
  4. D.58वीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 57वीं

व्याख्या

सही उत्तर 57वीं बैठक है। पृष्ठभूमि पत्र बताता है कि पंजीकरण, रिटर्न भरने, रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट और विवाद निपटान से जुड़े प्रक्रिया सुधार जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में सुझाए गए, जो अक्टूबर 2026 में हुई। विकल्प ख यानी 56वीं बैठक गलत है, क्योंकि उस बैठक का विषय प्रक्रिया नहीं बल्कि दरें थीं। उसने चार खानों वाले पुराने ढांचे की जगह 5 और 18 प्रतिशत की दो मुख्य दरें रखीं और चुनी हुई वस्तुओं तथा सेवाओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर बनाए रखी। विकल्प क यानी 55वीं बैठक गलत है, क्योंकि पत्र में इन सिफारिशों का श्रेय उसे कहीं नहीं दिया गया। विकल्प घ यानी 58वीं बैठक गलत है, क्योंकि 9 अक्टूबर 2026 को पत्र जारी होने तक वह हुई ही नहीं थी। याद रखने का सरल तरीका यह है कि 56वीं परिषद ने दरें सरल कीं और 57वीं परिषद ने प्रक्रिया सरल की।

Q2.अर्थव्यवस्थाआसान

सितंबर 2026 तक जीएसटी के पंजीकृत करदाताओं की संख्या कितनी थी?

  1. A.60 लाख
  2. B.1.20 करोड़
  3. C.1.70 करोड़
  4. D.2.50 करोड़
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1.70 करोड़

व्याख्या

सही उत्तर 1.70 करोड़ है। पृष्ठभूमि पत्र के अनुसार करदाताओं का आधार शुरुआत के करीब 60 लाख से बढ़कर सितंबर 2026 में लगभग 1.70 करोड़ हो गया, यानी नौ साल में यह लगभग तीन गुना हुआ। विकल्प क यानी 60 लाख गलत है, क्योंकि यह 2017 का आंकड़ा है, जिस साल जीएसटी लागू हुआ था, और वह आज की संख्या नहीं है। विकल्प ख और घ यानी 1.20 करोड़ और 2.50 करोड़ गलत हैं, क्योंकि ये अंक पत्र में कहीं नहीं आते; इन्हें केवल यह परखने के लिए रखा गया है कि अभ्यर्थी ठीक संख्या याद रखता है या नहीं। इसके साथ दो आंकड़े जोड़कर याद रखें: 30 सितंबर 2026 तक 3,053 करोड़ बीजक अपलोड और 833.82 करोड़ ई-वे बिल निपटाए गए, तथा अप्रैल से सितंबर 2026 की सकल वसूली करीब 12.46 लाख करोड़ रुपये रही।

Q3.अर्थव्यवस्थाकठिन

जीएसटी परिषद ने अभियोजन की सीमा बढ़ाकर कितनी करने की सिफारिश की?

  1. A.1 करोड़ रुपये
  2. B.2 करोड़ रुपये
  3. C.5 करोड़ रुपये
  4. D.10 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 5 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 5 करोड़ रुपये है। भरोसे पर टिकी कर व्यवस्था बनाने और धोखाधड़ी पर अंकुश बनाए रखने के लिए परिषद ने अभियोजन की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने तथा जीएसटी के तहत गिरफ्तारी की कुछ शक्तियां हटाने की सिफारिश की। विकल्प क यानी 1 करोड़ रुपये गलत है, क्योंकि यह पुरानी सीमा है जिसे बढ़ाया जा रहा है, नई नहीं। विकल्प ख और घ यानी 2 करोड़ और 10 करोड़ रुपये गलत हैं, क्योंकि ये अंक सिफारिशों में नहीं आते। इसी समूह के कुछ और आंकड़े साथ याद रखें: 10,000 रुपये से कम कर पर कारण बताओ नोटिस नहीं दिया जाएगा, अधिकतम सामान्य जुर्माना 25,000 रुपये से घटकर 10,000 रुपये रह जाएगा, तथा गैर-धोखाधड़ी मामलों में 10,000 रुपये का न्यूनतम जुर्माना हटा दिया जाएगा।

Q4.अर्थव्यवस्थामध्यम

व्यय पद्धति से जीएसडीपी अनुमानों का मसौदा दिशानिर्देश किस संस्था ने जारी किया?

  1. A.नीति आयोग
  2. B.राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय
  3. C.भारतीय रिज़र्व बैंक
  4. D.वित्त आयोग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय

व्याख्या

सही उत्तर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय है, जो सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन काम करता है। उसने व्यय पक्ष से सकल राज्य घरेलू उत्पाद के अनुमान तैयार करने का मसौदा दिशानिर्देश बनाया और उसे व्यापक प्रसार तथा प्रतिक्रिया के लिए मंत्रालय की वेबसाइट पर रखा। विकल्प A गलत है क्योंकि नीति आयोग सरकार का नीति थिंक टैंक है और राष्ट्रीय लेखा तैयार नहीं करता। विकल्प C गलत है क्योंकि भारतीय रिज़र्व बैंक देश का केंद्रीय बैंक और मौद्रिक प्राधिकरण है, भले वह राज्य वित्त पर अपने अध्ययन प्रकाशित करता हो। विकल्प D गलत है क्योंकि वित्त आयोग संघ और राज्यों के बीच करों के बँटवारे की सिफारिश करता है। नए दिशानिर्देश के तहत वास्तविक संकलन राज्य अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय करेंगे।

Q5.अर्थव्यवस्थामध्यम

विज्ञप्ति के अनुसार कौन-सा व्यय घटक अभी किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश द्वारा तैयार नहीं किया जा रहा है?

  1. A.सकल स्थिर पूँजी निर्माण
  2. B.सरकारी अंतिम उपभोग व्यय
  3. C.निजी अंतिम उपभोग व्यय
  4. D.शुद्ध निर्यात
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. निजी अंतिम उपभोग व्यय

व्याख्या

सही उत्तर निजी अंतिम उपभोग व्यय है, जिसे संक्षेप में पीएफसीई कहा जाता है। विज्ञप्ति स्पष्ट कहती है कि कुछ राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सकल स्थिर पूँजी निर्माण तथा सरकारी अंतिम उपभोग व्यय के अनुमान तैयार करते हैं, परंतु निजी अंतिम उपभोग व्यय के अनुमान अभी कोई भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश तैयार नहीं कर रहा। इसी कारण विकल्प A और B गलत हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि शुद्ध निर्यात उन घटकों में गिना गया है जिन्हें रूपरेखा में शामिल किया गया है, उस घटक के रूप में नहीं जो हर जगह अनुपस्थित है। इसलिए मसौदा दिशानिर्देश राज्य स्तर पर इन घटकों को बनाने के लिए अवधारणाएँ, दायरा, आँकड़ों के स्रोत और आकलन पद्धतियाँ देता है। यह भी याद रखें कि मसौदा दिशानिर्देश 2022-23 को आधार वर्ष मानकर बना है और हितधारकों से 28 अक्टूबर 2026 तक सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से सुझाव माँगे गए थे, जबकि वास्तविक संकलन का काम राज्य अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालयों के पास रहेगा।