सिंगापुर के राष्ट्रपति कौन हैं, जिनसे केंद्रीय वित्त मंत्री इस यात्रा में भेंट करेंगी?
- A.लॉरेंस वोंग
- B.गन किम योंग
- C.थर्मन शनमुगरत्नम
- D.विवियन बालाकृष्णन
सही उत्तर
C. थर्मन शनमुगरत्नम
व्याख्या
सही उत्तर थर्मन शनमुगरत्नम हैं, जो सिंगापुर के राष्ट्रपति हैं। अपनी सरकारी यात्रा में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री उच्चस्तरीय बैठकों की शृंखला के तहत उनसे भेंट करेंगी। शेष तीनों विकल्पों में दिए नाम भी उन पदाधिकारियों के हैं जिनसे इसी यात्रा में मुलाकात होगी, और यही बात इस प्रश्न को नाम के बजाय पद की पहचान की परीक्षा बना देती है। विकल्प A यानी लॉरेंस वोंग सिंगापुर के प्रधानमंत्री हैं। विकल्प B यानी गन किम योंग उपप्रधानमंत्री हैं। विकल्प D यानी विवियन बालाकृष्णन विदेश मंत्री हैं। सामान्य ज्ञान के प्रश्नपत्रों में इस तरह के प्रश्न बार-बार आते हैं और सबसे आम चूक राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री को आपस में बदल देना है। इसलिए इन चार नामों को उनके पदों के साथ एक समूह में याद करें और इन्हें भारत-सिंगापुर व्यापक सामरिक भागीदारी से जोड़कर रखें।
पूरा लेख पढ़ें: सिंगापुर भारत में एफडीआई का सबसे बड़ा स्रोत, सीतारमण की यात्रा
अभ्यास प्रश्न
भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत कौन-सा देश है?
- A.मॉरीशस
- B.सिंगापुर
- C.संयुक्त राज्य अमेरिका
- D.जापान
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व्याख्या
सही उत्तर सिंगापुर है। सिंगापुर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत है, और अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच वहां से लगभग 194.68 अरब अमेरिकी डॉलर का संचयी निवेश भारत आया है। जीआईसी और टेमासेक जैसे सिंगापुरी संस्थागत निवेशकों की भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी है, और यही कारण है कि वित्त मंत्री की वहां की बातचीत में पूंजी बाजार, कराधान तथा डिजिटल वित्तीय संपर्क केंद्र में हैं। विकल्प A यानी मॉरीशस वर्षों तक भारत में निवेश का प्रमुख रास्ता रहा और आज भी बड़ा स्रोत है, इसलिए यह सबसे भ्रमित करने वाला विकल्प है। विकल्प C यानी अमेरिका और विकल्प D यानी जापान भी बड़े निवेशक तथा महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार हैं, लेकिन संचयी निवेश की सूची में इनमें से कोई पहले स्थान पर नहीं है। परीक्षा के लिए सिंगापुर को पहले और मॉरीशस को उसके ठीक पीछे रखकर याद करें।
अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच सिंगापुर से भारत में आया संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लगभग कितना है?
- A.94.68 अरब अमेरिकी डॉलर
- B.144.68 अरब अमेरिकी डॉलर
- C.194.68 अरब अमेरिकी डॉलर
- D.234.68 अरब अमेरिकी डॉलर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 194.68 अरब अमेरिकी डॉलर है। यह आंकड़ा अप्रैल 2000 से मार्च 2026 की अवधि में सिंगापुर से भारत आए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का संचयी योग है, और इसी के आधार पर सिंगापुर को भारत में एफडीआई का सबसे बड़ा स्रोत कहा जाता है। विकल्प A यानी 94.68 अरब डॉलर तथा विकल्प B यानी 144.68 अरब डॉलर दर्ज कुल से काफी कम हैं और इनसे सिंगापुर निवेशक देशों की सूची में वास्तविक स्थान से नीचे दिखेगा। विकल्प D यानी 234.68 अरब डॉलर इस निवेश को बढ़ा-चढ़ाकर बताता है। आंकड़े के साथ उसकी अवधि भी याद रखें, जो अप्रैल 2000 से शुरू होती है, क्योंकि अवधि के बिना यह संख्या अधूरी है। साथ में दो सिंगापुरी संस्थागत निवेशक, अर्थात जीआईसी और टेमासेक, तथा दो भारतीय मंच, अर्थात एनआईआईएफ और गिफ्ट सिटी, भी याद रखें।
भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़े निवेश वाले सिंगापुर के किन दो संस्थागत निवेशकों का नाम लिया गया है?
- A.जीआईसी और टेमासेक
- B.टेमासेक और मुबादला
- C.जीआईसी और खजाना नैशनल
- D.एनआईआईएफ और गिफ्ट सिटी
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व्याख्या
सही उत्तर जीआईसी और टेमासेक है। जीआईसी, अर्थात गवर्नमेंट ऑफ सिंगापुर इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन, और टेमासेक होल्डिंग्स ही वे दो सिंगापुरी संस्थागत निवेशक हैं जिनका भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ा निवेश बताया गया है, और वित्त मंत्री इन दोनों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों से अलग-अलग बैठक करेंगी। विकल्प B में टेमासेक के साथ मुबादला का नाम है, जो संयुक्त अरब अमीरात की निवेश कंपनी है, सिंगापुर की नहीं। विकल्प C में जीआईसी के साथ खजाना नैशनल है, जो मलेशिया का सरकारी कोष है, इसलिए यह जोड़ी भी देश के स्तर पर गलत है। विकल्प D में राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष तथा गिफ्ट सिटी हैं, जो लेन-देन के दूसरे छोर पर खड़े हैं, अर्थात ये भारतीय मंच हैं जिनके जरिये सिंगापुर की पूंजी अधिक भागीदारी कर सकती है, ये सिंगापुर के निवेशक नहीं हैं।
फरवरी 2019 में कितनी चुनी हुई गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापार मार्जिन सीमित किया गया था?
- A.24
- B.42
- C.52
- D.92
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व्याख्या
सही उत्तर 42 है। फरवरी 2019 में सरकार के निर्देश पर मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत 42 चुनी हुई गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापार मार्जिन सीमित किया था। उस फैसले से 526 ब्रांडों में खुदरा कीमतें 91 प्रतिशत तक घटीं और मरीजों को सालाना 984 करोड़ रुपये की बचत बताई गई, इसी कारण इसे अब मंजूर व्यापक सीमा का आधार बताया जाता है। विकल्प A, C और D जानबूझकर इसके आसपास के आंकड़े हैं, ताकि परखा जाए कि संख्या मोटे तौर पर याद है या ठीक-ठीक, इनमें से कोई भी दवाओं की संख्या नहीं थी। 2019 के फैसले को याद रखने का आसान तरीका इससे जुड़ी चार संख्याओं की श्रृंखला है, अर्थात 42 दवाएं, 526 ब्रांड, कीमतों में 91 प्रतिशत तक कमी और 984 करोड़ रुपये की सालाना बचत।
इन मार्जिन को सीमित करने का निर्णय लेकर अधिसूचना कौन जारी करेगा?
- A.नीति आयोग
- B.राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण
- C.केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन
- D.स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय
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व्याख्या
सही उत्तर राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण है। यहां दो संस्थाओं की भूमिकाएं अलग-अलग हैं और प्रश्न उन्हें पहचानने पर आधारित है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अधीन एक विशेषज्ञ समिति यह सूची तय करेगी कि सीमा किन दवाओं पर लागू होगी, और सूची तैयार होने के बाद राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण निर्णय लेकर अधिसूचना जारी करेगा, जिससे सीमा को कानूनी रूप मिलेगा। इसलिए विकल्प D यानी स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय प्रक्रिया में पहले आता है और कीमतें अधिसूचित नहीं करता। विकल्प A नीति आयोग सरकार का नीति विषयक संस्थान है और दवाओं की कीमत तय करने में इसकी कोई भूमिका नहीं है। विकल्प C केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन देश का औषधि नियामक है, जिसका काम दवाओं की मंजूरी, गुणवत्ता और सुरक्षा देखना है, कीमत तय करना नहीं। यही मूल्य निर्धारण प्राधिकरण फरवरी 2019 में भी चुनी हुई कैंसर दवाओं पर व्यापार मार्जिन सीमित कर चुका है।