सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की नई पत्रिका विज्ञान वेलुगु किस भाषा में प्रकाशित होती है?
- A.तमिल
- B.तेलुगु
- C.मराठी
- D.असमिया
सही उत्तर
B. तेलुगु
व्याख्या
सही उत्तर तेलुगु है। विमोचित पांच पत्रिकाओं में विज्ञान वेलुगु तेलुगु भाषा की पत्रिका है। विकल्प A गलत है, क्योंकि तमिल पत्रिका का नाम अरिवियाल अरिक्कैयालर है। विकल्प C गलत है, क्योंकि मराठी पत्रिका विद्न्यान क्षितिज है। विकल्प D गलत है, क्योंकि असमिया पत्रिका बिग्यान लहर है, जबकि बंगाली पत्रिका का नाम बिग्यान ब्रिटान्टो है। ये सभी पत्रिकाएं सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान प्रकाशित करता है और इनमें अनुवादित सामग्री के साथ अपने क्षेत्र के मौलिक लेख भी रहते हैं। हर पत्रिका को उसकी भाषा के साथ मिलाकर याद रखना सबसे उपयोगी है, क्योंकि परीक्षा में यही जोड़ी पूछी जाती है। यह भी ध्यान रखें कि इन पांच नई पत्रिकाओं के जुड़ने से संस्थान का लोकप्रिय विज्ञान प्रकाशन तीन भाषाओं से बढ़कर आठ भाषाओं तक पहुंच गया है, और यही विस्तार इस समाचार का सबसे बड़ा तथ्य है, जिस पर सीधा प्रश्न बन सकता है।
पूरा लेख पढ़ें: सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर ने पांच भाषाओं में विज्ञान पत्रिकाएं शुरू कीं
अभ्यास प्रश्न
सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की पांच नई लोकप्रिय विज्ञान पत्रिकाओं का विमोचन किस अवसर पर हुआ?
- A.सीएसआईआर के 75वें स्थापना दिवस पर
- B.सीएसआईआर के 80वें स्थापना दिवस पर
- C.सीएसआईआर के 85वें स्थापना दिवस पर
- D.सीएसआईआर के 90वें स्थापना दिवस पर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. सीएसआईआर के 85वें स्थापना दिवस पर
व्याख्या
सही उत्तर सीएसआईआर के 85वें स्थापना दिवस पर है। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने अपना 85वां स्थापना दिवस मनाया और इसी अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री ने सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर द्वारा प्रकाशित पांच लोकप्रिय विज्ञान पत्रिकाओं का विमोचन किया। यह दिवस परिषद के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय विकास में 84 वर्षों के योगदान का प्रतीक भी है। विकल्प A, B और D में दिए गए वर्ष इस आयोजन से मेल नहीं खाते, इसलिए वे गलत हैं। परीक्षार्थियों को इस अवसर के साथ पांच भाषाओं, पत्रिकाओं के नाम और प्रकाशित करने वाले संस्थान को भी जोड़कर याद रखना चाहिए, क्योंकि प्रश्न अक्सर अवसर पर ही केंद्रित होता है। पत्रिकाओं का विमोचन नई दिल्ली में हुआ और पांचों शीर्षकों के संपादक भी वहां उपस्थित रहे, इसलिए यह आयोजन केवल वर्षगांठ का नहीं बल्कि विज्ञान संचार के विस्तार का भी अवसर था। इसी कारण यह समाचार परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर की सचिव कौन हैं?
- A.डॉ. गीता वाणी रायसम
- B.डॉ. एन. कलाइसेल्वी
- C.डॉ. मेहर वान
- D.डॉ. जितेंद्र सिंह
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. डॉ. एन. कलाइसेल्वी
व्याख्या
सही उत्तर डॉ. एन. कलाइसेल्वी हैं, जो वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की महानिदेशक होने के साथ वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव भी हैं और पत्रिकाओं के विमोचन में उपस्थित रहीं। विकल्प A गलत है, क्योंकि डॉ. गीता वाणी रायसम सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक हैं, जो इन पत्रिकाओं का प्रकाशन करता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि डॉ. मेहर वान उन दो अधिकारियों में से एक हैं जिन्होंने श्री मुकेश अंबादास पुंड के साथ प्रकाशन का समन्वय किया। विकल्प D गलत है, क्योंकि डॉ. जितेंद्र सिंह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री हैं, जिन्होंने पत्रिकाओं का विमोचन किया, परिषद का नेतृत्व नहीं करते। पद और व्यक्ति का मेल याद रखना जरूरी है। इसके अलावा यह भी याद रखें कि विमोचन का अवसर परिषद का 85वां स्थापना दिवस था और पत्रिकाएं पांच भारतीय भाषाओं में प्रकाशित हुई हैं।
अध्ययन के अनुसार ब्लैक होल का जेट आकाशगंगा के चारों ओर की गैस को कैसे प्रभावित करता है?
- A.वह सभी दिशाओं में गैस को ठंडा करता है, जिससे तारे तेजी से बनते हैं
- B.वह केवल अपनी दिशा की गैस को ऊर्जावान करता है और तारों का बनना दबा देता है
- C.वह पूरा गैस आवरण कुछ वर्षों में ब्लैक होल के भीतर खींच लेता है
- D.आकाशगंगा के केंद्रीय हिस्से से बाहर उसका कोई असर नहीं होता
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. वह केवल अपनी दिशा की गैस को ऊर्जावान करता है और तारों का बनना दबा देता है
व्याख्या
सही उत्तर है कि वह केवल अपनी दिशा की गैस को ऊर्जावान करता है और तारों का बनना दबा देता है। जब टीम ने आकाशगंगाओं के चारों ओर सभी दिशाओं के मापों का औसत निकाला, तो कोई संकेत नहीं मिला, लेकिन जेट की दिशा में जांच करने पर मजबूत संकेत मिला, जिससे साफ हुआ कि जेट केवल अपने रास्ते की गैस को रोशन करता है। संकेत वहां सबसे तेज था, जहां जेट तारकीय डिस्क के किनारे पर बाहरी गैस से पहली बार टकराता है और फिर आवरण की बाहरी सीमा पर, जहां धीमा पड़ चुका जेट दोबारा टकराता है और दोनों जगह ऊर्जा जमा होती है। तारे बनने के लिए गैस का ठंडा होना जरूरी है, इसलिए यह गर्मी आकाशगंगा को शांत बना देती है और विकल्प ए निष्कर्ष के ठीक उलट है। इसी कारण विकल्प सी और डी भी गलत हैं।
एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर यह अध्ययन किस भारतीय संस्थान ने किया?
- A.भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान
- B.रमन अनुसंधान संस्थान
- C.भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला
- D.टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रमन अनुसंधान संस्थान
व्याख्या
सही उत्तर रमन अनुसंधान संस्थान है, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है और जिसके वैज्ञानिकों ने अमेरिका की एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के साथियों के साथ मिलकर यह काम किया। द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में छपे इस शोधपत्र की प्रमुख लेखिका नम्रता रॉय हैं, जो इसी संस्थान के खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी प्रभाग में सहायक प्रोफेसर हैं, और निष्कर्ष पर टिप्पणी करने वाली सह-लेखिका संचयीता बोर्थाकुर अमेरिकी विश्वविद्यालय से हैं। बाकी तीनों विकल्प खगोल विज्ञान और भौतिकी के जाने-माने भारतीय संस्थान हैं, इसीलिए वे भ्रम पैदा करते हैं, पर इस विशेष अध्ययन का श्रेय उनमें से किसी को नहीं है। करेंट अफेयर्स में किसी खोज को संस्थान, प्रमुख शोधकर्ता और पत्रिका, तीनों के साथ जोड़कर याद रखना चाहिए।
अध्ययन में उल्लिखित सर्कमगैलेक्टिक मीडियम (सीजीएम) का सबसे सही वर्णन क्या है?
- A.आकाशगंगा का घना केंद्र, जहां तारे ठसाठस भरे होते हैं
- B.आकाशगंगा की डिस्क से आगे फैला गैस का धुंधला आवरण
- C.धूल का वह छल्ला, जो आकाशगंगा की सर्पिल भुजाएं बनाता है
- D.ब्लैक होल के घटना क्षितिज के भीतर का क्षेत्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आकाशगंगा की डिस्क से आगे फैला गैस का धुंधला आवरण
व्याख्या
सही उत्तर है आकाशगंगा की डिस्क से आगे फैला गैस का धुंधला आवरण। अध्ययन के अनुसार सीजीएम गैस का वह विरल भंडार है, जो तारों की डिस्क के किनारे से आगे शुरू होता है और आकाशगंगा के आकार से दस से बीस गुना दूर तक फैलता है, और यही भंडार आगे चलकर तारों के बनने का ईंधन देता है। विकल्प ए में आकाशगंगा के भीड़भाड़ वाले केंद्र की बात है, जो बिल्कुल अलग चीज है। विकल्प सी में सर्पिल भुजाओं की धूल है, जो दिखाई देने वाली डिस्क के भीतर होती है, बाहर नहीं। विकल्प डी में ब्लैक होल के घटना क्षितिज के भीतर का क्षेत्र है, जहां से कुछ भी बाहर नहीं आ सकता और जिसका इस बाहरी गैस से कोई संबंध नहीं। पूरे अध्ययन की बात ही यह है कि केंद्र के ब्लैक होल से निकला जेट इसी आवरण तक पहुंचता है।