रोज़गार के प्रतिष्ठित (क्लासिकी) सिद्धांत के अनुसार पूर्ण रोज़गार की स्थिति से विचलन होते हैं
- A.पूर्णतः अस्थायी प्रकृति के
- B.स्थायी प्रकृति के
- C.काल्पनिक स्थितियाँ
- D.सामान्य स्थितियाँ
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, पूर्णतः अस्थायी प्रकृति के। क्लासिकी अर्थशास्त्री मानते थे कि अर्थव्यवस्था हमेशा पूर्ण रोज़गार की ओर लौटती है, इसलिए कोई भी बेरोज़गारी थोड़े समय की होती है।
क्लासिकी सिद्धांत से के नियम पर टिका है, जिसके अनुसार पूर्ति अपनी माँग स्वयं पैदा करती है, इसलिए सामान्य अति-उत्पादन संभव नहीं। यह सिद्धांत यह भी मानता है कि मज़दूरी, कीमतें और ब्याज दर पूरी तरह लचीली हैं। यदि मज़दूर बेरोज़गार हों तो मज़दूरी तब तक घटती है जब तक प्रचलित दर पर काम करने को तैयार हर व्यक्ति को काम न मिल जाए; बचत बढ़े तो ब्याज दर घटकर निवेश बढ़ा देती है। इसलिए बेरोज़गारी केवल घर्षणात्मक या स्वैच्छिक हो सकती है, जो सरकारी हस्तक्षेप के बिना अपने आप ठीक हो जाती है। महामंदी के बाद जॉन मेनार्ड कीन्स ने अपनी 'जनरल थ्योरी' (1936) में इस विचार को चुनौती दी।
विकल्प B गलत है क्योंकि स्थायी बेरोज़गारी कीन्स की संभावना है, क्लासिकी नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि क्लासिकी अर्थशास्त्री विचलन होना मानते थे, बस उनके टिके रहने से इनकार करते थे। विकल्प D गलत है क्योंकि उनके लिए सामान्य स्थिति पूर्ण रोज़गार है, उससे विचलन नहीं।
परीक्षा टिप: क्लासिकी = से का नियम + लचीली मज़दूरी, पूर्ण रोज़गार सामान्य; कीन्स = प्रभावी माँग, अपूर्ण रोज़गार संतुलन।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंअमर्त्य सेन को किस क्षेत्र में योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया था?
- A.मौद्रिक अर्थशास्त्र
- B.कल्याणकारी अर्थशास्त्र
- C.पर्यावरणीय अर्थशास्त्र
- D.विकास अर्थशास्त्र
उत्तर देखें
अमर्त्य सेन को 1998 का आर्थिक विज्ञान का नोबेल स्मृति पुरस्कार "कल्याणकारी अर्थशास्त्र में उनके योगदान के लिए" दिया गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में लगाया जाने वाला संभावित वस्तु एवं सेवा कर (GST) निम्नलिखित में से क्या नहीं है?
- A.सकल मूल्य कर
- B.मूल्य वर्धित कर
- C.उपभोग कर
- D.गंतव्य आधारित कर
उत्तर देखें
GST हर चरण पर केवल जोड़े गए मूल्य पर लगता है और पहले चुकाए गए कर का क्रेडिट मिलता है, इसलिए यह बार-बार सकल मूल्य पर नहीं लगता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) के गठन की घोषणा केंद्रीय बजट 2015-16 में की गई थी।
- B.NIIF देश में अवसंरचना सुविधाएँ बढ़ाने के लिए एक कोष है।
- C.NIIF और NIF (राष्ट्रीय निवेश कोष) एक ही संगठन के नाम हैं।
- D.NIIF के एक से अधिक वैकल्पिक निवेश कोष हो सकते हैं।
उत्तर देखें
NIIF और राष्ट्रीय निवेश कोष दो अलग संस्थाएँ हैं, जिनके उद्देश्य भी अलग हैं। राष्ट्रीय निवेश कोष (NIF) 2005 में बनाया गया था, ताकि सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश से सरकार को मिली राशि उसमें रखी जा सके; यह भारत के लोक लेखे का हिस्सा है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →WTO व्यवस्था के अंतर्गत सर्वाधिक अनुग्रहीत राष्ट्र (MFN) खंड किस सिद्धांत पर आधारित है?
- A.राष्ट्रों के बीच भेदभाव न करना
- B.राष्ट्रों के बीच भेदभाव करना
- C.स्थानीय लोगों और विदेशियों के बीच भिन्न व्यवहार
- D.सभी वस्तुओं पर समान शुल्क
उत्तर देखें
MFN के तहत किसी एक व्यापारिक साझेदार को दी गई रियायत सभी WTO सदस्यों को देनी होती है। MFN नियम शुल्क और व्यापार पर सामान्य समझौते (GATT) का अनुच्छेद I है और यह WTO के सेवा तथा बौद्धिक संपदा समझौतों में भी है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारतीय रिज़र्व बैंक भारत में मुद्रास्फीति की दर मापने के लिए अब निम्नलिखित में से किस सूचकांक का प्रयोग करता है?
- A.नैस्डैक सूचकांक
- B.BSE सूचकांक
- C.उपभोक्ता मूल्य सूचकांक
- D.थोक मूल्य सूचकांक
उत्तर देखें
RBI अपनी मौद्रिक नीति के लिए अखिल भारतीय CPI (संयुक्त) मुद्रास्फीति को आधार बनाता है। लंबे समय तक थोक मूल्य सूचकांक भारत में मुद्रास्फीति का मुख्य पैमाना रहा।
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