राजस्थान में किस लोक देवता की फड़ सबसे लंबी मानी जाती है?
- A.पाबूजी
- B.देवनारायणजी
- C.रामदेवजी
- D.गोगाजी
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, देवनारायणजी। गुर्जरों के देवता देवनारायणजी, जिनका धाम भीलवाड़ा जिले के आसींद में मालासेरी डूंगरी है, उनकी फड़ सभी चित्रित फड़ों में सबसे लंबी है और उसे गुर्जर भोपे तंतुवाद्य जंतर पर गाते हैं। विकल्प A गलत है, यद्यपि वह लुभावना विकल्प है, क्योंकि पाबूजी की फड़ सबसे प्रसिद्ध अवश्य है पर लंबाई में कम है और उसे नायक भोपे रावणहत्था पर गाते हैं; वह सर्वाधिक लोकप्रिय है, सबसे लंबी नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि रामदेवजी की उपासना पगल्या तथा तेरह ताली नृत्य से होती है, उस आकार की फड़ से नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि गोगाजी की कथा लोकगाथाओं तथा गोगामेड़ी के मेले से चलती है। परीक्षा भवन में ले जाने योग्य दो जोड़ियाँ हैं: पाबूजी के साथ रावणहत्था और देवनारायण के साथ जंतर तथा सबसे लंबी फड़।
पूरा लेख पढ़ें: राजस्थान के लोक देवता और संत: परीक्षा नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंऊँटों के रक्षक के रूप में पूजे जाने वाले राजस्थान के किस लोक देवता का संबंध कोलू गाँव से है?
- A.पाबूजी
- B.तेजाजी
- C.गोगाजी
- D.देवनारायणजी
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पाबूजी जोधपुर प्रदेश के कोलू के राठौड़ वीर थे, जिन्होंने लोक कथा के अनुसार चारण देवल की गायों की रक्षा करते हुए प्राण दिए, और उनकी पूजा सबसे अधिक ऊँट पालक करते हैं, जो बीमार पशु लेकर उनके थान पर जाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सर्प देवता गोगाजी का प्रमुख धाम गोगामेड़ी राजस्थान के किस जिले में है?
- A.चूरू
- B.हनुमानगढ़
- C.बीकानेर
- D.नागौर
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गोगामेड़ी हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील में है, और वहाँ भाद्रपद मास की गोगा नवमी को लगने वाला मेला उत्तरी राजस्थान के सबसे बड़े मेलों में है, जिसमें हिंदू तथा मुसलमान दोनों आते हैं और देवता को जाहर पीर कहते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बाबा रामदेवजी का प्रसिद्ध मेला रामदेवरा, जिसे रुणिचा भी कहते हैं, किस जिले में लगता है?
- A.बाड़मेर
- B.जोधपुर
- C.जैसलमेर
- D.बीकानेर
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पुराना रुणिचा, अर्थात रामदेवरा, जैसलमेर जिले की पोकरण तहसील में है, और भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से आरंभ होने वाले मेले में हर जाति तथा दोनों धर्मों के यात्री आते हैं, जिनमें बहुत से ध्वज लेकर कई दिन पैदल चलते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नागौर जिले के खरनाल में जन्मे राजस्थान के किस लोक देवता की पूजा सर्पदंश से रक्षा के लिए की जाती है?
- A.तेजाजी
- B.मल्लीनाथ
- C.हरभूजी
- D.मेहाजी मांगलिया
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सर्प के काटे लोगों को आज भी उनके थान पर लाया जाता है, किसान उनकी तांती बाँधते हैं, और नागौर जिले का विशाल परबतसर पशु मेला उन्हीं के नाम पर लगता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →गुरु जांभोजी द्वारा चलाया गया बिश्नोई संप्रदाय कितने नियमों पर आधारित है?
- A.इक्कीस
- B.सत्ताईस
- C.उनतीस
- D.इकतीस
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नागौर जिले के पीपासर में जन्मे जांभोजी ने यह आचार संहिता दी, जिसके नियमों में हरे वृक्ष काटने तथा जीव हत्या करने का निषेध भी है, और संप्रदाय की प्रमुख पीठ बीकानेर जिले में नोखा के पास मुकाम है।
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