प्रयोगशाला परीक्षण में टीटीटी-डीएचटीडी ने कितने घंटे लगातार संचालन के बाद भी अपना प्रदर्शन बनाए रखा?
- A.48 घंटे
- B.72 घंटे
- C.120 घंटे
- D.240 घंटे
सही उत्तर
C. 120 घंटे
व्याख्या
सही उत्तर 120 घंटे है। परीक्षणों में देखा गया कि इतनी लंबी अवधि तक लगातार चलने के बाद भी पदार्थ का प्रदर्शन बना रहा और धातु आधारित उत्प्रेरकों में सामान्यतः होने वाला क्षरण या संदूषण नहीं हुआ। यह टिकाऊपन उतना ही महत्वपूर्ण है जितना सक्रियता का आंकड़ा, क्योंकि जो उत्प्रेरक कुछ समय शानदार काम करके क्षीण हो जाए वह परिवहन या नवीकरणीय बिजली के भंडारण वाली बैटरी में व्यावहारिक रूप से उपयोगी नहीं रहता। विकल्प A और B में परीक्षण अवधि कम बताई गई है, जबकि विकल्प D में यह बहुत अधिक बढ़ाकर दी गई है। परीक्षार्थी इस आंकड़े को उसी अध्ययन के दूसरे प्रमुख आंकड़े के साथ जोड़कर याद रखें, अर्थात व्यावसायिक प्लैटिनम उत्प्रेरकों के प्रदर्शन का लगभग छियानबे प्रतिशत, और यह भी कि अनुकरण में इसका कारण आणविक संरचना के वे स्थान बताए गए जहां ऑक्सीजन सहजता से जुड़ती है।
पूरा लेख पढ़ें: धातु-मुक्त उत्प्रेरक टीटीटी-डीएचटीडी जिंक-एयर बैटरी में कारगर
अभ्यास प्रश्न
नया धातु-मुक्त उत्प्रेरक टीटीटी-डीएचटीडी स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों में प्रयुक्त किस महंगी धातु का विकल्प बनने के लिए विकसित किया गया है?
- A.पैलेडियम
- B.प्लैटिनम
- C.इरिडियम
- D.रुथेनियम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्लैटिनम
व्याख्या
सही उत्तर प्लैटिनम है। अनेक स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियां, विशेष रूप से हाइड्रोजन ईंधन सेल, ऑक्सीजन अपचयन अभिक्रिया को तेज करने के लिए प्लैटिनम पर निर्भर रहती हैं, और चूंकि यह उपलब्ध सबसे दुर्लभ तथा महंगी धातुओं में से एक है, इसकी कीमत और सीमित आपूर्ति बड़े पैमाने पर उपयोग में बाधा बनती है। नए कार्बनिक पदार्थ ने किसी बहुमूल्य धातु के बिना व्यावसायिक प्लैटिनम उत्प्रेरकों के प्रदर्शन का लगभग छियानबे प्रतिशत प्राप्त किया, इसी कारण यह शोध जिंक-एयर सेल की लागत के लिए महत्वपूर्ण है। विकल्प A, C और D में पैलेडियम, इरिडियम और रुथेनियम हैं, जो विभिन्न उत्प्रेरकीय कार्यों में प्रयुक्त महंगी धातुएं हैं, परंतु इस अध्ययन में मानक और अड़चन के रूप में इनमें से कोई नहीं बताई गई। परीक्षार्थी इस पदार्थ को प्लैटिनम, ऑक्सीजन अपचयन अभिक्रिया और जिंक-एयर बैटरी तीनों से जोड़कर याद रखें।
टीटीटी-डीएचटीडी किन संस्थानों के शोधकर्ताओं ने विकसित किया?
- A.आईआईटी मद्रास, आईआईएससी बेंगलुरु और सीएसआईआर-एनसीएल पुणे
- B.एस. एन. बोस राष्ट्रीय मौलिक विज्ञान केंद्र, नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान तथा एसआरएम विश्वविद्यालय अमरावती
- C.टीआईएफआर मुंबई, आईआईएसईआर पुणे और बार्क
- D.आईआईटी कानपुर, जेएनसीएएसआर और एआरसीआई हैदराबाद
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एस. एन. बोस राष्ट्रीय मौलिक विज्ञान केंद्र, नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान तथा एसआरएम विश्वविद्यालय अमरावती
व्याख्या
सही उत्तर एस. एन. बोस राष्ट्रीय मौलिक विज्ञान केंद्र कोलकाता, नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान मोहाली तथा एसआरएम विश्वविद्यालय अमरावती है। इनमें पहले दो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के संस्थान हैं और दल का नेतृत्व क्रमशः डॉ. प्रदीप पचफुले, प्रो. रमेंद्र सुंदर डे तथा प्रो. रंजीत थापा ने किया, जबकि निष्कर्ष साइंस एडवांसेज पत्रिका में प्रकाशित हुए। विकल्प A, C और D में भारत के प्रसिद्ध शोध संस्थानों, अभियांत्रिकी संस्थानों तथा राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के नाम हैं, परंतु इस विशेष पदार्थ का श्रेय इनमें से किसी समूह को नहीं है। ध्यान रखें कि ऐसी घोषणाओं पर प्रश्न प्रायः प्रमुख संस्थान, मूल विभाग या पत्रिका के बारे में पूछे जाते हैं, इसलिए तीनों याद रखना उचित है: मूल विभाग के रूप में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, संस्थानों के स्थान कोलकाता और मोहाली, तथा पत्रिका साइंस एडवांसेज।
एनएसएएम के तहत अब तक कितने एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग स्टार्ट-अप को सहायता दी गई है?
- A.26
- B.36
- C.46
- D.56
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 56
व्याख्या
सही उत्तर 56 है। रणनीति जारी होने के चार वर्ष से अधिक समय बाद सरकार के अनुसार 56 एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग स्टार्ट-अप को सहायता दी गई है, जिससे देश में नवाचार और उद्यमिता का आधार मजबूत हुआ है। इसके साथ 1,54,000 से अधिक लोगों को एएम से जुड़े कौशल का प्रशिक्षण मिला है और राष्ट्रीय केंद्रों के नेटवर्क ने सामग्री, मशीन, एएम के लिए डिजाइन और प्रिंटेड उत्पादों सहित 65 भारत-विशिष्ट प्रौद्योगिकियां विकसित की हैं, जो एयरोस्पेस, चिकित्सा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और फोटोनिक्स में काम आ रही हैं। विकल्प क, ख और ग में दी गई संख्याएं इस प्रगति से मेल नहीं खातीं। यह भी याद रखें कि रणनीति का लक्ष्य 100 नए स्टार्ट-अप है, इसलिए 56 का आंकड़ा उस लक्ष्य की दिशा में प्रगति दिखाता है।
भारत मंडपम, नई दिल्ली में 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक होने वाला ईएसटीआईसी-2026 किस संस्था द्वारा आयोजित किया जा रहा है?
- A.भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
- B.रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन
- C.वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद
- D.भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद
व्याख्या
सही उत्तर वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) है। ईएसटीआईसी भारत का उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन है और इसका दूसरा संस्करण सीएसआईआर 'रचनात्मक मस्तिष्क, विज्ञान को गति, प्रौद्योगिकियों को सशक्त बनाना' विषय पर आयोजित कर रही है। यह सम्मेलन 12 विषयगत क्षेत्रों में पूर्ण सत्र, तकनीकी चर्चाओं और प्रदर्शनियों के साथ होगा, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाएगा और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को समर्थन देगा। विकल्प क, इसरो, अंतरिक्ष एजेंसी है और एएम से उसका नाता प्रिंटेड रॉकेट हार्डवेयर तक सीमित है। विकल्प ख, डीआरडीओ, रक्षा अनुसंधान करता है और आयोजक नहीं है। विकल्प घ, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि अनुसंधान की शीर्ष संस्था है। परीक्षा के लिए आयोजक संस्था, स्थान भारत मंडपम, तारीखें और सम्मेलन का विषय चारों अलग-अलग पूछे जा सकते हैं, इसलिए इन्हें एक साथ याद रखना उपयोगी रहता है।
एनएसएएम के तहत भारत वैश्विक एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग बाजार में कितनी हिस्सेदारी का लक्ष्य रखता है?
- A.2 प्रतिशत
- B.5 प्रतिशत
- C.10 प्रतिशत
- D.15 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 5 प्रतिशत
व्याख्या
सही उत्तर 5 प्रतिशत है। राष्ट्रीय रणनीति ने समयबद्ध लक्ष्य रखा है कि भारत वैश्विक एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग बाजार का बीसवां हिस्सा हासिल करे और देश के सकल घरेलू उत्पाद में करीब एक अरब अमेरिकी डॉलर जोड़े। इसी के साथ अन्य लक्ष्य भी जुड़े हैं—सामग्री, मशीन, प्रक्रिया और सॉफ्टवेयर को समेटते हुए भारत की जरूरत के अनुरूप 50 प्रौद्योगिकियां, 100 नए स्टार्ट-अप, 500 नए उत्पाद, एक लाख कुशल कर्मियों का प्रशिक्षण और 10 मौजूदा तथा उभरते विनिर्माण क्षेत्रों में क्षमता निर्माण। विकल्प क लक्ष्य को कम आंकता है, और विकल्प ग तथा घ उसे बढ़ाकर बताते हैं; रणनीति में ऐसी कोई हिस्सेदारी नहीं दी गई है। यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रगति इसी के सापेक्ष मापी जाती है और अगला चरण एनएसएएम 2.0 बाजार में और तेजी लाने के लिए तैयार किया जा रहा है।