प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नवंबर 2026 में किस ठिकाने पर दीवाली मनाई?
- A.कोबरा ऑपरेशन्स बेस, करणपुर
- B.आईएनएस विक्रांत
- C.सर क्रीक
- D.कारगिल
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर करणपुर का कोबरा ऑपरेशन्स बेस है, जो छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में है। प्रधानमंत्री 8 नवंबर 2026 को वहां पहुंचे, सुरक्षाकर्मियों के साथ पर्व मनाया, उन्हें मिठाई बांटी और कहा कि यह पहली ऐसी दीवाली है जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है। यही ठिकाना बस्तर और अबूझमाड़ में नक्सल विरोधी कार्रवाइयों का प्रशिक्षण केंद्र तथा शुरुआती मोर्चा रहा है, इसीलिए इस अवसर के लिए इसे चुना गया। बाकी तीनों विकल्प वे जगहें हैं जहां उन्होंने पहले के वर्षों में सैनिकों के साथ यह पर्व मनाया था, इस बार नहीं। उन्होंने समुद्र में आईएनएस विक्रांत पर, तट पर सर क्रीक में तथा हिमालय में कारगिल और लेपचा में बिताई दीवाली को याद किया। इस तरह विकल्प बी, सी और डी उनकी पुरानी यात्राओं से जुड़े हैं, जबकि इस वर्ष का आयोजन बस्तर में हुआ।
पूरा लेख पढ़ें: बस्तर में प्रधानमंत्री ने सुरक्षाबलों के संग मनाई दीवाली
अभ्यास प्रश्न
बस्तर के संबोधन के अनुसार, कितने वर्षों में पहली बार ड्यूटी पर किसी सीआरपीएफ जवान की जान नहीं गई?
- A.25 वर्ष
- B.37 वर्ष
- C.47 वर्ष
- D.57 वर्ष
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बस्तर में जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते एक साल में ड्यूटी के दौरान किसी भी सीआरपीएफ जवान की जान नहीं गई, और इससे पहले सैंतालीस बरस तक ऐसा नहीं हुआ था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बस्तर के संबोधन में बताए अनुसार, वामपंथी उग्रवाद कभी भारत के कितने जिलों को प्रभावित करता था?
- A.130 से अधिक जिले
- B.230 से अधिक जिले
- C.330 से अधिक जिले
- D.430 से अधिक जिले
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कठिन दौर को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद ने करीब बीस राज्यों में फैले दो सौ तीस से ज्यादा जिलों को जकड़ रखा था, जिनमें बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों की विशेष विकास मुहिम में कितने किलोमीटर सड़कें बनीं?
- A.5,000 किलोमीटर से अधिक
- B.10,000 किलोमीटर से अधिक
- C.15,000 किलोमीटर से अधिक
- D.25,000 किलोमीटर से अधिक
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प्रधानमंत्री ने बताया कि नक्सलवाद से लड़ाई के साथ-साथ प्रभावित इलाकों के विकास के लिए विशेष अभियान भी चलाया गया, और उसकी उपलब्धियां गिनाईं- पंद्रह हजार किलोमीटर से अधिक सड़कें, नौ हजार पांच सौ से ज्यादा मोबाइल टावर, लगभग एक सौ पचहत्तर एकलव्य विद्यालय, करीब पचास औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान तथा…
पूरी व्याख्या पढ़ें →तवांग प्रदर्शनी के तुरंत बाद पवित्र अवशेषों को कहां ले जाया गया?
- A.गोल्डन पैगोडा, नामसाई
- B.टीजीएल मठ (निचला गोंपा), बोमडिला
- C.राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली
- D.कलावांगपो कन्वेंशन सेंटर, तवांग
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तवांग चरण 7 नवंबर 2026 को समाप्त होने के बाद भारतीय वायु सेना अगले दिन अवशेषों को बोमडिला ले गई; ऊपरी गोंपा में संक्षिप्त ठहराव के बाद उन्हें टीजीएल मठ यानी निचले गोंपा में स्थापित किया गया, जहां 8 से 13 नवंबर 2026 तक जनता दर्शन कर सकेगी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तवांग पहुंचने पर शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों को औपचारिक रूप से किसने ग्रहण किया?
- A.अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल
- B.मुख्यमंत्री पेमा खांडू
- C.अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव
- D.राष्ट्रीय संग्रहालय के निदेशक
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जब अवशेष नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय से तवांग पहुंचे, तो अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने पूरे विधि-विधान के साथ उन्हें ग्रहण किया और इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी उपस्थित थे।
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