निर्वात में विद्युत चुंबकीय तरंगों की चाल लगभग कितनी होती है?
- A.3 गुणा 10 की घात 8 मीटर प्रति सेकंड
- B.3 गुणा 10 की घात 6 मीटर प्रति सेकंड
- C.340 मीटर प्रति सेकंड
- D.1,500 मीटर प्रति सेकंड
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर A, 3 गुणा 10 की घात 8 मीटर प्रति सेकंड है, अर्थात लगभग तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड। मैक्सवेल ने दिखाया कि यह चाल निर्वात की विद्युतशीलता और चुंबकशीलता से तय होती है, और प्रकाश की मापी गई चाल से इसका मेल ही यह प्रमाण बना कि प्रकाश विद्युत चुंबकीय तरंग है; निर्वात में स्पेक्ट्रम का प्रत्येक बैंड यही मान रखता है। विकल्प B सौ गुना कम है और उससे सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक लगभग आठ मिनट के बजाय कई घंटों में पहुंचता। विकल्प C गलत है क्योंकि 340 मीटर प्रति सेकंड वायु में ध्वनि की लगभग चाल है, जो माध्यम चाहने वाली यांत्रिक तरंग है। विकल्प D गलत है क्योंकि लगभग 1,500 मीटर प्रति सेकंड जल में ध्वनि की चाल है, जिसका उपयोग सोनार में होता है।
पूरा लेख पढ़ें: विद्युत चुंबकीय तरंगें और स्पेक्ट्रम: परीक्षा नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंविद्युत चुंबकीय तरंगों को प्रयोगशाला में सबसे पहले किस वैज्ञानिक ने उत्पन्न कर पहचाना?
- A.जेम्स क्लर्क मैक्सवेल
- B.हाइनरिख हर्ट्ज
- C.माइकल फैराडे
- D.गुग्लिएल्मो मार्कोनी
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उन्होंने 1887 में स्पार्क गैप दोलित्र से तरंगें उत्पन्न कीं और अंतराल वाले लूप से उनका पता लगाया, उनका तरंगदैर्घ्य मापा और दिखाया कि वे परावर्तन तथा अपवर्तन में प्रकाश जैसा व्यवहार करती हैं, जिससे सिद्धांत की पुष्टि हुई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विद्युत चुंबकीय तरंगों के विषय में निम्नलिखित में से कौन कथन सही है?
- A.ये अनुदैर्घ्य तरंगें हैं और इन्हें भौतिक माध्यम चाहिए
- B.ये अनुप्रस्थ तरंगें हैं और निर्वात से गुजर सकती हैं
- C.प्रबल चुंबकीय क्षेत्र इन्हें विचलित कर देता है
- D.निर्वात में इनकी चाल आवृत्ति पर निर्भर करती है
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विद्युत चुंबकीय तरंग में विद्युत क्षेत्र, चुंबकीय क्षेत्र और संचरण की दिशा परस्पर लंबवत होते हैं, और चूंकि तरंग क्षेत्रों से बनी है, कंपन करते कणों से नहीं, इसे माध्यम की आवश्यकता नहीं होती; इसी कारण सूर्य का प्रकाश रिक्त अंतरिक्ष पार कर लेता है पर ध्वनि नहीं कर पाती।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम के किस भाग का तरंगदैर्घ्य सबसे अधिक होता है?
- A.रेडियो तरंगें
- B.अवरक्त किरणें
- C.पराबैंगनी किरणें
- D.गामा किरणें
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इनका तरंगदैर्घ्य लगभग एक दशमांश मीटर से लेकर कई किलोमीटर तक होता है, जो इन्हें पूरे स्पेक्ट्रम में सबसे लंबा और इसलिए सबसे कम आवृत्ति तथा ऊर्जा वाला बैंड बनाता है; ये प्रसारण, मोबाइल संचार और रेडियो खगोल विज्ञान में प्रयुक्त होती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किस विद्युत चुंबकीय विकिरण की आवृत्ति और भेदन क्षमता सबसे अधिक होती है?
- A.एक्स किरणें
- B.गामा किरणें
- C.माइक्रो तरंगें
- D.दृश्य प्रकाश
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इनका तरंगदैर्घ्य स्पेक्ट्रम में सबसे कम है और इसलिए आवृत्ति तथा ऊर्जा सबसे अधिक, और आवेशरहित तथा अत्यंत ऊर्जावान होने से ये सीसे की कई सेंटीमीटर मोटी परत भी पार कर जाती हैं, इसीलिए विकिरण चिकित्सा कक्षों में मोटा परिरक्षण लगाया जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन विकिरणों को बढ़ते तरंगदैर्घ्य के क्रम में रखता है?
- A.गामा किरणें, एक्स किरणें, पराबैंगनी, अवरक्त, रेडियो तरंगें
- B.रेडियो तरंगें, अवरक्त, पराबैंगनी, एक्स किरणें, गामा किरणें
- C.एक्स किरणें, गामा किरणें, अवरक्त, पराबैंगनी, रेडियो तरंगें
- D.अवरक्त, पराबैंगनी, रेडियो तरंगें, एक्स किरणें, गामा किरणें
उत्तर देखें
बढ़ते तरंगदैर्घ्य के क्रम में स्पेक्ट्रम गामा किरणें, एक्स किरणें, पराबैंगनी, दृश्य प्रकाश, अवरक्त, माइक्रो तरंगें और रेडियो तरंगें है, और यह विकल्प उसी क्रम का पालन करता है, जिसमें दृश्य तथा माइक्रो तरंग बैंड छोड़ दिए गए हैं।
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