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GK24
भूगोलमध्यमपूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2023, GS Paper I

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. भूकंपलेखी (सिस्मोग्राफ़) में P तरंगें S तरंगों से पहले अंकित होती हैं। 2. P तरंगों में अलग-अलग कण तरंग के संचरण की दिशा में आगे-पीछे कंपन करते हैं, जबकि S तरंगों में कण तरंग के संचरण की दिशा के समकोण पर ऊपर-नीचे कंपन करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.1 और 2 दोनों
  4. D.न तो 1 और न ही 2

सही उत्तर

C. 1 और 2 दोनों

व्याख्या

सही उत्तर है C, 1 और 2 दोनों। P तरंगें सबसे तेज़ भूकंपीय तरंगें हैं और भूकंपलेखी तक सबसे पहले पहुँचती हैं; वे कणों को चलने की दिशा में हिलाती हैं, जबकि S तरंगें उसके समकोण पर।

भूकंप से दो तरह की भूगर्भीय (बॉडी) तरंगें निकलती हैं। प्राथमिक या P तरंगें ध्वनि की तरह अनुदैर्ध्य होती हैं: वे चट्टान को तरंग की दिशा में आगे-पीछे धकेलती-खींचती हैं और ठोस, द्रव तथा गैस तीनों से गुज़र सकती हैं। द्वितीयक या S तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं: कण चलने की दिशा के लंबवत ऊपर-नीचे या दाएँ-बाएँ हिलते हैं और ये द्रव से नहीं गुज़र पातीं। इसीलिए अधिकेंद्र से लगभग 103° से आगे S तरंगें छाया क्षेत्र में ग़ायब हो जाती हैं, जिससे वैज्ञानिकों को पता चला कि बाहरी क्रोड द्रव है। धरातलीय तरंगें सबसे बाद में पहुँचती हैं और सबसे ज़्यादा नुकसान करती हैं।

A गलत है क्योंकि कथन 2 भी सही है। B गलत है क्योंकि कथन 1 भी सही है। D गलत है क्योंकि दोनों कथन सही हैं।

Exam tip: P = प्राथमिक, धक्का-खिंचाव, हर माध्यम में; S = द्वितीयक, अपरूपण, केवल ठोस में।

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Q1.भूगोलपूछा गया: NDA · NDA-I 2019, GATआसान

निम्नलिखित में से कौन-सी नदी पहले "वितस्ता" के नाम से जानी जाती थी?

  1. A.तीस्ता
  2. B.झेलम
  3. C.तुंगभद्रा
  4. D.भरतपुझा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. झेलम

ऋग्वेद और बाद के संस्कृत ग्रंथों में झेलम को वितस्ता कहा गया है। पंजाब क्षेत्र की नदियों के वैदिक नाम थे: झेलम के लिए वितस्ता, चिनाब के लिए असिक्नी, रावी के लिए परुष्णी, ब्यास के लिए विपाशा और सतलुज के लिए शुतुद्री।

Q2.भूगोलपूछा गया: NDA · NDA-I 2019, GATमध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सी नदी पश्चिम की ओर बहने वाली नहीं है?

  1. A.पेरियार
  2. B.भरतपुझा
  3. C.पंबा
  4. D.ताम्रपर्णी
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. ताम्रपर्णी

ताम्रपर्णी पश्चिमी घाट की अगस्त्यमलै पहाड़ियों से निकलकर तमिलनाडु के तिरुनेलवेली और तूतुकुडी ज़िलों से पूर्व की ओर बहती हुई मन्नार की खाड़ी में गिरती है।

Q3.भूगोलपूछा गया: NDA · NDA-I 2023, GATमध्यम

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव पर देशांतर रेखाओं के बीच की दूरी शून्य हो जाती है। 2. देशांतर रेखाओं के बीच की दूरी भूमध्य रेखा पर अधिकतम होती है। 3. देशांतर रेखाओं की संख्या अक्षांश रेखाओं की संख्या से अधिक है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3

तीनों कथन सही हैं। देशांतर रेखाएँ (याम्योत्तर) उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक जाने वाले अर्धवृत्त हैं, इसलिए भूमध्य रेखा पर वे सबसे दूर होती हैं, लगभग 111 किमी प्रति अंश, और ध्रुवों की ओर पास आते-आते वहाँ मिल जाती हैं, जहाँ दूरी शून्य हो जाती है।

Q4.भूगोलपूछा गया: NDA · NDA-I 2025, GATमध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सी ठंडी महासागरीय धारा/धाराएँ है/हैं? 1. अलास्का धारा 2. उत्तर अटलांटिक प्रवाह 3. पछुआ पवन प्रवाह नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए:

  1. A.केवल 1
  2. B.1 और 2
  3. C.2 और 3
  4. D.केवल 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. केवल 3

तीनों में केवल पछुआ पवन प्रवाह ठंडी धारा है; अलास्का धारा और उत्तर अटलांटिक प्रवाह गर्म धाराएँ हैं। पछुआ पवन प्रवाह, जिसे अंटार्कटिक परिध्रुवीय धारा भी कहते हैं, पछुआ पवनों के नीचे अंटार्कटिका के चारों ओर पूर्व दिशा में बहता है और उप-अंटार्कटिक ठंडा जल लाता है।

Q5.भूगोलपूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2017, Paper Iआसान

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वे क्षेत्र जहाँ वर्षा 250 सेमी से अधिक होती है 2. वार्षिक तापमान 25°C - 27°C 3. औसत आर्द्रता 75% से अधिक 4. वृक्ष अपनी पत्तियाँ नहीं गिराते उपर्युक्त विशेषताएँ निम्नलिखित में से किस प्रकार की वनस्पति को दर्शाती हैं?

  1. A.उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार
  2. B.उष्णकटिबंधीय अर्ध-सदाबहार
  3. C.उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती
  4. D.उष्णकटिबंधीय शुष्क सदाबहार
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार

बहुत भारी वर्षा, ऊँचा और स्थिर तापमान, 75 प्रतिशत से अधिक आर्द्रता और साल भर हरे रहने वाले वृक्ष उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वनों की पहचान हैं।