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GK24
अर्थव्यवस्थामध्यम

नई मार्जिन सीमा से कैंसर के मरीजों को हर साल कितनी बचत होने का अनुमान है?

  1. A.984 करोड़ रुपये
  2. B.1,500 करोड़ रुपये
  3. C.2,500 करोड़ रुपये
  4. D.5,000 करोड़ रुपये

सही उत्तर

C. 2,500 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 2,500 करोड़ रुपये है। औषध विभाग का अनुमान है कि गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर मार्जिन की सीमा से मरीजों को हर साल लगभग 2,500 करोड़ रुपये की बचत होगी और अपनी जेब से होने वाला खर्च घटेगा। विकल्प A में दिया 984 करोड़ रुपये का आंकड़ा फरवरी 2019 के बहुत सीमित फैसले से जुड़ा है, जब 42 चुनी हुई गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर मार्जिन सीमित किया गया और 526 ब्रांडों में कीमतें 91 प्रतिशत तक घटी थीं, इसलिए यह पुराने निर्णय का आंकड़ा है, वर्तमान का नहीं। विकल्प B और D में दिए 1,500 करोड़ रुपये और 5,000 करोड़ रुपये सुनने में संभव लगते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी घोषित नहीं किया गया। परीक्षार्थी दोनों आंकड़े अलग-अलग याद रखें, अर्थात 2019 की सीमा के लिए 984 करोड़ रुपये और अब मंजूर व्यापक सीमा के लिए 2,500 करोड़ रुपये।

पूरा लेख पढ़ें: गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित

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Q1.अर्थव्यवस्थाआसान

गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं की आपूर्ति और बिक्री में मार्जिन किस स्तर तक सीमित किया गया है?

  1. A.एमआरपी का 10 प्रतिशत
  2. B.एमआरपी का 20 प्रतिशत
  3. C.एमआरपी का 30 प्रतिशत
  4. D.एमआरपी का 50 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. एमआरपी का 30 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर एमआरपी का 30 प्रतिशत है। सरकार ने गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं के निर्माता से मरीज तक पहुंचने के रास्ते में जोड़े जाने वाले मार्जिन पर सीमा मंजूर की है और यह सीमा अधिकतम खुदरा मूल्य के 30 प्रतिशत पर तय की गई है। इस कदम से कीमतें 70 प्रतिशत तक घटने और कैंसर के मरीजों को हर साल लगभग 2,500 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। विकल्प A और B में दी गई 10 प्रतिशत और 20 प्रतिशत की सीमा मंजूर किए गए स्तर से कड़ी है, ऐसी कोई सीमा घोषित नहीं हुई है और इन्हें लिखना विक्रेता के पास बचे मार्जिन को कम करके बताना होगा। विकल्प D में दी गई 50 प्रतिशत की सीमा मंजूर स्तर से ढीली है और इससे मूल्य वर्धन का बड़ा हिस्सा अछूता रह जाता, जो फैसले के उद्देश्य के विपरीत है। इसलिए याद रखने योग्य आंकड़ा एमआरपी का 30 प्रतिशत है, जो अनुसूची से बाहर की उन दवाओं पर लागू होगा जो पहले सीधे मूल्य नियंत्रण से मुक्त थीं।

Q2.अर्थव्यवस्थामध्यम

इन मार्जिन को सीमित करने का निर्णय लेकर अधिसूचना कौन जारी करेगा?

  1. A.नीति आयोग
  2. B.राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण
  3. C.केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन
  4. D.स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण

व्याख्या

सही उत्तर राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण है। यहां दो संस्थाओं की भूमिकाएं अलग-अलग हैं और प्रश्न उन्हें पहचानने पर आधारित है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अधीन एक विशेषज्ञ समिति यह सूची तय करेगी कि सीमा किन दवाओं पर लागू होगी, और सूची तैयार होने के बाद राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण निर्णय लेकर अधिसूचना जारी करेगा, जिससे सीमा को कानूनी रूप मिलेगा। इसलिए विकल्प D यानी स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय प्रक्रिया में पहले आता है और कीमतें अधिसूचित नहीं करता। विकल्प A नीति आयोग सरकार का नीति विषयक संस्थान है और दवाओं की कीमत तय करने में इसकी कोई भूमिका नहीं है। विकल्प C केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन देश का औषधि नियामक है, जिसका काम दवाओं की मंजूरी, गुणवत्ता और सुरक्षा देखना है, कीमत तय करना नहीं। यही मूल्य निर्धारण प्राधिकरण फरवरी 2019 में भी चुनी हुई कैंसर दवाओं पर व्यापार मार्जिन सीमित कर चुका है।

Q3.अर्थव्यवस्थाकठिन

फरवरी 2019 में कितनी चुनी हुई गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापार मार्जिन सीमित किया गया था?

  1. A.24
  2. B.42
  3. C.52
  4. D.92
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 42

व्याख्या

सही उत्तर 42 है। फरवरी 2019 में सरकार के निर्देश पर मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत 42 चुनी हुई गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापार मार्जिन सीमित किया था। उस फैसले से 526 ब्रांडों में खुदरा कीमतें 91 प्रतिशत तक घटीं और मरीजों को सालाना 984 करोड़ रुपये की बचत बताई गई, इसी कारण इसे अब मंजूर व्यापक सीमा का आधार बताया जाता है। विकल्प A, C और D जानबूझकर इसके आसपास के आंकड़े हैं, ताकि परखा जाए कि संख्या मोटे तौर पर याद है या ठीक-ठीक, इनमें से कोई भी दवाओं की संख्या नहीं थी। 2019 के फैसले को याद रखने का आसान तरीका इससे जुड़ी चार संख्याओं की श्रृंखला है, अर्थात 42 दवाएं, 526 ब्रांड, कीमतों में 91 प्रतिशत तक कमी और 984 करोड़ रुपये की सालाना बचत।

Q4.अर्थव्यवस्थाकठिन

57वीं जीएसटी परिषद बैठक की सिफारिश के अनुसार माल ले जा रहे वाहन को रोकने के लिए किस पद से नीचे के अधिकारी की अनुमति पर्याप्त नहीं होगी?

  1. A.निरीक्षक
  2. B.अधीक्षक
  3. C.संयुक्त आयुक्त
  4. D.प्रधान मुख्य आयुक्त
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. संयुक्त आयुक्त

व्याख्या

सही उत्तर संयुक्त आयुक्त है। परिषद ने सीजीएसटी अधिनियम की धारा 68, 129 और 130 में संशोधन की सिफारिश की, जिसके बाद माल ले जा रहे वाहन को केवल विशेष सूचना के आधार पर और इस पद या इससे वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति से ही रोका जा सकेगा। जिस राज्य से खेप मात्र गुजर रही है, वह उसे नहीं रोक सकेगा, और निरीक्षण या जब्ती तभी संभव होगी जब आपूर्तिकर्ता या प्राप्तकर्ता उसी राज्य में स्थित या पंजीकृत हो। विकल्प A और B गलत हैं क्योंकि निरीक्षक या अधीक्षक स्तर का अधिकारी ऐसी अनुमति नहीं दे सकेगा, भले ही क्षेत्रीय जांच वही करते हों। विकल्प D गलत है क्योंकि इतने वरिष्ठ स्तर की अनुमति प्रस्तावित नहीं थी। जहां ई-वे बिल ही नहीं है, वहां माल कहीं भी जांचा या जब्त किया जा सकेगा।

Q5.अर्थव्यवस्थाआसान

जीएसटी में सामान्य जुर्माने की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये से घटाकर कितनी करने की सिफारिश की गई है?

  1. A.5,000 रुपये
  2. B.10,000 रुपये
  3. C.15,000 रुपये
  4. D.20,000 रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 10,000 रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 10,000 रुपये है। परिषद ने सीजीएसटी अधिनियम की धारा 125 के तहत सामान्य जुर्माने की ऊपरी सीमा 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने की सिफारिश की। यही आंकड़ा बैठक के एक दूसरे निर्णय में भी आता है — जहां दांव पर लगा कर 10,000 रुपये से कम है, वहां कारण बताओ नोटिस जारी ही नहीं होगा; इस गणना में केंद्रीय, राज्य और एकीकृत कर के साथ उपकर भी शामिल होगा, और इससे कम रकम के लंबित नोटिस तथा अपीलें भी ऐसे निपटेंगी जैसे यह सीमा पहले से लागू थी। विकल्प A, C और D गलत हैं क्योंकि 5,000, 15,000 या 20,000 रुपये की कोई नई सीमा तय नहीं हुई; ये केवल पुरानी और नई सीमा के बीच के गोल आंकड़े लगते हैं। धोखाधड़ी से अलग मामलों में न्यूनतम जुर्माने की शर्त भी हटा दी गई है।