महासागर के ऊर्ध्वाधर परिच्छेद में लवणता के तीव्र परिवर्तन वाला क्षेत्र निम्नलिखित में से किस नाम से जाना जाता है?
- A.तापप्रवणता (थर्मोक्लाइन)
- B.लवणप्रवणता (हैलोक्लाइन)
- C.प्रकाशित क्षेत्र (फोटिक ज़ोन)
- D.घनत्वप्रवणता (पिक्नोक्लाइन)
सही उत्तर
B. लवणप्रवणता (हैलोक्लाइन)
व्याख्या
सही उत्तर है B, लवणप्रवणता (हैलोक्लाइन)। हैलोक्लाइन महासागर के ऊर्ध्वाधर परिच्छेद की वह परत है जिसमें गहराई के साथ लवणता तेज़ी से बदलती है; यह नाम यूनानी शब्द हैलोस यानी नमक से बना है। यह सामान्यतः ऊपरी कुछ सौ मीटर में, भली-भाँति मिली सतही जलराशि और लगभग एक समान गहरे जल के बीच मिलती है, और वहाँ सबसे स्पष्ट होती है जहाँ नदियों, भारी वर्षा या पिघलती बर्फ का मीठा पानी अधिक खारे पानी के ऊपर तैरता है, जैसे बंगाल की खाड़ी और ध्रुवीय समुद्रों में। विकल्प A गलत है, क्योंकि थर्मोक्लाइन वह परत है जिसमें गहराई के साथ तापमान तेज़ी से घटता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि प्रकाशित या सुप्रकाशित क्षेत्र सूर्य के प्रकाश वाली ऊपरी परत है जहाँ प्रकाश संश्लेषण संभव होता है; यह प्रकाश से जुड़ा है, लवणता से नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि पिक्नोक्लाइन घनत्व में तीव्र परिवर्तन की परत है, जो तापमान और लवणता के परिवर्तनों के मिलने से बनती है। परीक्षा टिप: थर्मो यानी ताप, हैलो यानी नमक और पिक्नो यानी घनत्व।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन भूस्खलन को कम करने की व्यापक तकनीक नहीं है?
- A.भूमि के खिसकने को रोकने के लिए अवरोधक दीवार का निर्माण
- B.भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों की पहचान के लिए संकट मानचित्रण
- C.भूस्खलन रोकने के लिए वनस्पति आवरण में कमी करना
- D.वर्षा जल और स्रोत प्रवाह के साथ भूस्खलन की गति को नियंत्रित करने के लिए सतही जल निकासी नियंत्रण कार्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. भूस्खलन रोकने के लिए वनस्पति आवरण में कमी करना
व्याख्या
सही उत्तर है C, भूस्खलन रोकने के लिए वनस्पति आवरण में कमी करना। ढाल पर से वनस्पति काटने से भूस्खलन की आशंका घटती नहीं, बढ़ती है, इसलिए यह शमन का उपाय हो ही नहीं सकता। जड़ें मिट्टी को बाँधकर ढाल को थामे रखती हैं और पत्तियों का आवरण गिरती वर्षा का वेग तोड़ता है; जहाँ जंगल कट जाता है, वहाँ ढीली मिट्टी पहली तेज बारिश में ही बह जाती है। वास्तव में अपनाए जाने वाले उपाय हैं - संकट क्षेत्रीकरण और मानचित्रण, अवरोधक दीवारें तथा ढालों की सीढ़ीनुमा कटाई, सतही और भूमिगत जल निकासी का नियंत्रण, ढाल पर वृक्षारोपण, और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण तथा विस्फोट पर रोक। A गलत है क्योंकि अवरोधक दीवार खिसकती मिट्टी को यथास्थान रोकती है और यह मानक अभियांत्रिकी उपाय है। B गलत है क्योंकि संकट मानचित्रण जोखिम वाली पट्टियों को चिह्नित करता है जिससे वहाँ निर्माण से बचा जा सके। D गलत है क्योंकि वर्षा जल और स्रोत प्रवाह को हटा देने से वह जल दबाव समाप्त हो जाता है जो भूस्खलन शुरू करता है। परीक्षा टिप: वृक्षारोपण लाभ देता है और वनोन्मूलन हानि; भारत में हिमालय तथा पश्चिमी घाट सर्वाधिक भूस्खलन प्रवण क्षेत्र हैं।
भूमध्य रेखा पृथ्वी को किसमें विभाजित करती है?
- A.क्षैतिज समान भागों में
- B.तिरछे भागों में
- C.दो असमान भागों में
- D.लंबवत समान भागों में
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. क्षैतिज समान भागों में
व्याख्या
सही उत्तर है A, क्षैतिज समान भागों में। भूमध्य रेखा शून्य अंश अक्षांश है और यह पृथ्वी के मध्य भाग में पूर्व से पश्चिम की ओर जाती है, जिससे पृथ्वी दो बराबर भागों में बँट जाती है। ये दो भाग उत्तरी गोलार्ध और दक्षिणी गोलार्ध हैं, और प्रत्येक अपने ध्रुव तक 90 अंश अक्षांश तक फैला है। भूमध्य रेखा सबसे लंबी अक्षांश रेखा है, जिसकी लंबाई लगभग 40,075 किलोमीटर है, और शेष सभी अक्षांश रेखाएँ इससे छोटी होती हैं। भूमध्य रेखा पर वर्ष भर दिन और रात लगभग बराबर रहते हैं, तथा 21 मार्च और 23 सितंबर की दो विषुव तिथियों पर सूर्य इसके ठीक ऊपर रहता है। B गलत है क्योंकि यह रेखा तिरछी नहीं खींची जाती, बल्कि पृथ्वी के अक्ष के समकोण पर होती है। C गलत है क्योंकि इससे बने दोनों भाग असमान नहीं, बराबर होते हैं। D गलत है क्योंकि लंबवत विभाजन प्रधान मध्याह्न रेखा करती है, जो पूर्वी और पश्चिमी गोलार्ध बनाती है। परीक्षा टिप: भूमध्य रेखा उत्तर-दक्षिण बाँटती है और प्रधान मध्याह्न रेखा पूर्व-पश्चिम।
भारत का सर्वाधिक गेहूँ उत्पादक राज्य कौन-सा है?
- A.उत्तर प्रदेश
- B.पंजाब
- C.हरियाणा
- D.मध्य प्रदेश
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. उत्तर प्रदेश
व्याख्या
सही उत्तर है A, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में देश के किसी भी अन्य राज्य से अधिक गेहूँ पैदा होता है, क्योंकि गंगा के मैदान की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, नहरों तथा नलकूपों की सिंचाई और ठंडी सर्दी तीनों इस फसल के अनुकूल हैं। गेहूँ भारत की प्रमुख रबी फसल है, इसकी बुआई अक्टूबर से दिसंबर के बीच होती है और कटाई मार्च-अप्रैल में, तथा इसे बढ़ने के लिए ठंडा मौसम और पकने के समय गर्म व शुष्क मौसम चाहिए। कुल उत्पादन में उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश और पंजाब आते हैं, जबकि प्रति हेक्टेयर उपज में पंजाब और हरियाणा आगे हैं क्योंकि वहाँ सिंचाई सुनिश्चित है। B गलत है क्योंकि पंजाब केंद्रीय अनाज भंडार की रीढ़ होने पर भी क्षेत्रफल में उत्तर प्रदेश से बहुत छोटा है। C गलत है क्योंकि हरियाणा छोटा राज्य है और उसका कुल उत्पादन दोनों से कम रहता है। D गलत है क्योंकि मध्य प्रदेश दूसरे स्थान तक पहुँचा है, पर उत्तर प्रदेश से पीछे है। परीक्षा टिप: कुल उत्पादन में उत्तर प्रदेश और प्रति हेक्टेयर उपज में पंजाब आगे है।
प्रतिचक्रवात के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. प्रतिचक्रवात उच्च दाब वाले तंत्र होते हैं। 2. तंत्र के केंद्र में वायु अवतलित होती है। 3. प्रतिचक्रवात अभिसारी पवनों से युक्त होते हैं। उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- A.1
- B.2
- C.3
- D.कोई नहीं
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2
व्याख्या
सही उत्तर है B, 2, क्योंकि पहले दो कथन सही हैं और तीसरा गलत है। प्रतिचक्रवात उच्च दाब का तंत्र है, जिसमें सबसे अधिक दाब केंद्र में होता है और वहाँ की वायु ऊपर से नीचे उतरती है। नीचे उतरते समय वायु संपीडित होकर गर्म हो जाती है, इसलिए बादल नहीं बनते और मौसम साफ, शांत तथा शुष्क रहता है; सर्दियों का कोहरा और गर्मियों की लू दोनों प्रतिचक्रवात के नीचे ही टिकते हैं। प्रतिचक्रवात की पवनें अपसारी होती हैं, यानी केंद्र से बाहर की ओर चलती हैं — उत्तरी गोलार्ध में दक्षिणावर्त और दक्षिणी गोलार्ध में वामावर्त; इसलिए तीसरा कथन गलत है, क्योंकि अभिसारी पवनें चक्रवात की विशेषता हैं, जहाँ वायु ऊपर उठकर बादल और वर्षा लाती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि एक नहीं, दो कथन सही हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि यह गलत तीसरे कथन को भी सही मान लेता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि दो कथन सही हैं। परीक्षा टिप: प्रतिचक्रवात — उच्च दाब, अवतलित वायु, अपसारी पवन और साफ मौसम; चक्रवात इसका उल्टा।
कोरिऑलिस प्रभाव किसका परिणाम है?
- A.दाब प्रवणता
- B.पृथ्वी के अक्ष का झुकाव
- C.पृथ्वी का घूर्णन
- D.पृथ्वी का परिक्रमण
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पृथ्वी का घूर्णन
व्याख्या
सही उत्तर है C, पृथ्वी का घूर्णन। कोरिऑलिस प्रभाव पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने से पैदा होने वाला आभासी बल है। यह सतह पर स्वतंत्र रूप से चलती किसी भी वस्तु को, जैसे पवन, महासागरीय धारा या वायुयान, उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विचलित कर देता है; इस नियम को फेरल का नियम कहते हैं। इसका मान भूमध्य रेखा पर शून्य होता है और ध्रुवों की ओर बढ़ता जाता है, इसीलिए भूमध्य रेखा के लगभग पाँच डिग्री के भीतर चक्रवात नहीं बनते और व्यापारिक पवनें सीधे उत्तर से नहीं, बल्कि उत्तर-पूर्व से चलती हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि दाब प्रवणता बल हवा को उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलाता है; दोनों बल मिलकर भूविक्षेपी पवन देते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि अक्ष का झुकाव ऋतुओं का कारण है। विकल्प D गलत है, क्योंकि सूर्य के चारों ओर परिक्रमण से वर्ष की लंबाई तय होती है। परीक्षा टिप: कोरिऑलिस घूर्णन से, भूमध्य रेखा पर शून्य और ध्रुवों पर अधिकतम।