लघु ज्वार (नीप टाइड) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सामान्यतः दो लघु ज्वारों के बीच सात दिन का अंतर होता है। 2. इस समय सूर्य और चंद्रमा एक-दूसरे के समकोण पर होते हैं। 3. सूर्य के गुरुत्वाकर्षण का विपरीत बल चंद्रमा के आकर्षण को कम कर देता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2
- D.2 और 3
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है D, 2 और 3। लघु ज्वार तब आता है जब सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी से समकोण पर होते हैं, इसलिए सूर्य का खिंचाव चंद्रमा के खिंचाव को कुछ हद तक काट देता है; पर दो लघु ज्वारों के बीच लगभग दो सप्ताह का अंतर होता है, सात दिन का नहीं।
ज्वार मुख्य रूप से चंद्रमा के कारण उठते हैं, जिसका महासागरों पर खिंचाव सूर्य के दोगुने से भी अधिक है। अमावस्या और पूर्णिमा पर सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में होते हैं, दोनों बल जुड़ जाते हैं और ऊंचे ज्वार बहुत ऊंचे होते हैं; इन्हें दीर्घ ज्वार (स्प्रिंग टाइड) कहते हैं। लगभग एक सप्ताह बाद, शुक्ल और कृष्ण पक्ष की अष्टमी के आसपास, चंद्रमा सूर्य से समकोण पर होता है, बल एक-दूसरे के विरुद्ध काम करते हैं और ज्वार-परास सबसे कम होता है; यही लघु ज्वार है। इस तरह दीर्घ और लघु ज्वार लगभग सात दिन के अंतर पर बारी-बारी आते हैं और हर प्रकार महीने में दो बार आता है।
विकल्प A गलत है, क्योंकि सात दिन का अंतर दीर्घ ज्वार और अगले लघु ज्वार के बीच होता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि कथन 3 भी सही है। विकल्प C गलत है, क्योंकि कथन 1 असत्य है।
परीक्षा टिप: दीर्घ ज्वार अमावस्या-पूर्णिमा पर (एक सीध में); लघु ज्वार अष्टमी पर (समकोण पर)।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंजनगणना 2011 के अनुसार, लिंगानुपात (प्रति हज़ार पुरुषों पर महिलाएँ) के संबंध में भारत के राज्यों का निम्नलिखित में से कौन-सा अवरोही क्रम सही है?
- A.पश्चिम बंगाल - मध्य प्रदेश - उत्तराखंड - जम्मू और कश्मीर
- B.मध्य प्रदेश - पश्चिम बंगाल - जम्मू और कश्मीर - उत्तराखंड
- C.उत्तराखंड - पश्चिम बंगाल - मध्य प्रदेश - जम्मू और कश्मीर
- D.पश्चिम बंगाल - उत्तराखंड - मध्य प्रदेश - जम्मू और कश्मीर
उत्तर देखें
जनगणना 2011 में इनका लिंगानुपात लगभग 963, 950, 931 और 889 महिलाएँ प्रति 1,000 पुरुष था। जनगणना 2011 में भारत का कुल लिंगानुपात 943 था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एक भौगोलिक आकृति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
1. यह आकृति मलक्का जलडमरूमध्य के निकट है।
2. भारत सरकार ने इस क्षेत्र में एक अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह का प्रस्ताव रखा है।
3. यह क्षेत्र संकटग्रस्त लेदरबैक समुद्री कछुए के सबसे महत्वपूर्ण अंडे देने के स्थलों में से एक है।
4. यह क्षेत्र घने वनों, समृद्ध प्रवाल भित्तियों और समुद्री घास के मैदानों का घर है।
उपर्युक्त विवरण निम्नलिखित में से किस भौगोलिक आकृति का है?
- A.गैलाथिया खाड़ी
- B.मन्नार की खाड़ी
- C.कच्छ की खाड़ी
- D.पाक जलडमरूमध्य
उत्तर देखें
ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित गैलाथिया खाड़ी चारों संकेतों पर खरी उतरती है। ग्रेट निकोबार भारत का सबसे दक्षिणी द्वीप है, और इसका छोर इंदिरा पॉइंट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक, मलक्का जलडमरूमध्य के उत्तरी प्रवेश से केवल लगभग 150 किमी दूर है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →द्वीप और सागर/महासागर का निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
- A.साइप्रस : भूमध्य सागर
- B.फ़ॉकलैंड : अटलांटिक महासागर
- C.चागोस : उत्तरी प्रशांत महासागर
- D.इस्लास कोकोस : हिंद महासागर
उत्तर देखें
चागोस द्वीपसमूह मध्य हिंद महासागर में है, उत्तरी प्रशांत महासागर में नहीं। चागोस द्वीप मालदीव से लगभग 500 किमी दक्षिण में हैं और इनमें डिएगो गार्सिया भी है, जहाँ एक बड़ा सैन्य अड्डा है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किस मृदा में लवण की मात्रा इतनी अधिक होती है कि कुछ क्षेत्रों में खारे पानी को वाष्पित करके साधारण नमक प्राप्त किया जाता है?
- A.पीटमय मृदा
- B.जलोढ़ मृदा
- C.लैटेराइट मृदा
- D.शुष्क मृदा
उत्तर देखें
शुष्क पश्चिमी भागों में कहीं-कहीं शुष्क मृदा में इतना लवण होता है कि खारे पानी को वाष्पित करके साधारण नमक बनाया जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
1. उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों की मृदा काफ़ी अनुपजाऊ होती है।
2. वनस्पति सदाबहार होती है, जिससे पूरे वर्ष प्रकाश-संश्लेषण होता रहता है।
3. इन्हें 'पेड़ों से ढके रेगिस्तान' कहा गया है।
4. ये सबसे अधिक उत्पादक स्थलीय पारितंत्र हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- A.केवल 2 और 4
- B.केवल 1, 3 और 4
- C.केवल 1, 2 और 3
- D.1, 2, 3 और 4
उत्तर देखें
चारों कथन उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों के बारे में सही हैं। ये वन भूमध्य रेखा के पास, अमेज़न, कांगो बेसिन और दक्षिण-पूर्व एशिया में मिलते हैं, जहाँ पूरे वर्ष भारी वर्षा और तेज़ गर्मी रहती है।
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