जारवा और सेंटिनली जनजातियां भारत के किस भाग की मूल निवासी हैं?
- A.लक्षद्वीप
- B.अंडमान द्वीपसमूह
- C.निकोबार द्वीपसमूह
- D.सुंदरबन
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, अंडमान द्वीपसमूह है। जारवा दक्षिण तथा मध्य अंडमान के पश्चिमी तटों पर रहते हैं और सेंटिनली उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर, जो अंडमान समूह में है; दोनों नीग्रिटो समुदाय हैं और दोनों विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह हैं, जैसे लिटिल अंडमान के ओंगे और ग्रेट अंडमानी भी हैं। A गलत है क्योंकि लक्षद्वीप में इस प्रकार का शिकारी-संग्राहक समुदाय नहीं है; वहां की जनसंख्या मुख्यतः मुस्लिम तथा मुख्य भूमि और मालदीव मूल की है, यद्यपि अनुसूचित जनजाति अधिसूचित है। C गलत है क्योंकि निकोबार समूह में निकोबारी तथा ग्रेट निकोबार के शोम्पेन रहते हैं, जारवा नहीं। D गलत है क्योंकि पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में ऐसी कोई जनजाति नहीं है। इन समुदायों की रक्षा के लिए सरकार सीमित संपर्क की नीति अपनाती है और उत्तरी सेंटिनल द्वीप के आसपास प्रवेश प्रतिबंधित है। परीक्षा में जारवा तथा सेंटिनली को अंडमान से और शोम्पेन को ग्रेट निकोबार से जोड़कर याद रखना पर्याप्त है, क्योंकि यही द्वीप-आधारित मिलान एक अंक का सामान्य प्रश्न बनता है।
पूरा लेख पढ़ें: भारत की जनजातियां और उनके क्षेत्र: राज्यवार सूची
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक जिलों में कौन-सी अनुसूचित जनजाति पाई जाती है?
- A.अगरिया
- B.चेरा
- C.गोंड
- D.थारू
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर D, थारू है। थारू उत्तर प्रदेश की सबसे व्यापक रूप से फैली अनुसूचित जनजाति है। ये हिमालय के नीचे फैली तराई पट्टी में लखीमपुर खीरी, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, महराजगंज और आसपास के जिलों में रहते हैं, इसलिए राज्य के किसी भी अन्य अधिसूचित जनजाति से अधिक जिलों में इनकी उपस्थिति है। ये उत्तराखंड और नेपाल की तराई में भी मिलते हैं। A, अगरिया, लोहा गलाने वाला छोटा समुदाय है जो सोनभद्र और मिर्जापुर पट्टी में केंद्रित है। B, चेरा अथवा चेरो, भी सोनभद्र तथा मिर्जापुर के विंध्य जिलों तक सीमित है। C, गोंड, मध्य भारत में बहुसंख्यक है, परंतु उत्तर प्रदेश में मध्य प्रदेश से लगे कुछ दक्षिणी जिलों तक ही सीमित है। इसलिए तीनों का क्षेत्र थारू से संकरा है। थारू समुदाय उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड दोनों की अधिसूचित सूची में है, इसलिए ऐसे प्रश्न में राज्य का नाम ध्यान से पढ़ना चाहिए।
भारत के सामाजिक समूहों के संदर्भ में PVTGs का पूर्ण रूप क्या है?
- A.पीरियोडिक वल्नरेबल ट्राइबल ग्रुप्स
- B.पीरियोडिक वेरियस ट्राइबल ग्रुप्स
- C.पर्टिकुलरली वल्नरेबल ट्राइबल ग्रुप्स
- D.पर्टिकुलरली वेरियस ट्राइबल ग्रुप्स
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व्याख्या
सही उत्तर C, पर्टिकुलरली वल्नरेबल ट्राइबल ग्रुप्स अर्थात विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह है। ये अनुसूचित जनजातियों के भीतर वे समुदाय हैं जो चार आधारों पर सबसे कम विकसित हैं: कृषि-पूर्व स्तर की तकनीक, स्थिर या घटती जनसंख्या, अत्यंत कम साक्षरता और निर्वाह अर्थव्यवस्था। ऐसे 75 समूह चिह्नित हैं, जो 18 राज्यों तथा अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में फैले हैं, और सबसे अधिक तेरह समूह ओडिशा में हैं। 2006 तक इन्हें आदिम जनजातीय समूह कहा जाता था, परंतु वह शब्द अपमानजनक माना गया, इसलिए नाम बदला गया। A और B गलत हैं क्योंकि पहला शब्द पर्टिकुलरली है, पीरियोडिक नहीं; इस श्रेणी में कुछ भी आवर्ती नहीं है। B और D इसलिए भी गलत हैं कि दूसरा शब्द वल्नरेबल है, जो इस वर्गीकरण का मूल आधार है, वेरियस नहीं।
प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (PMJUGA) कब शुरू किया गया था?
- A.2022
- B.2025
- C.2024
- D.2023
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 2024 है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान की घोषणा केंद्रीय बजट 2024-25 में हुई और केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे 2024 में मंजूरी दी। इसका उद्देश्य जनजातीय बहुल गांवों तथा आकांक्षी प्रखंडों में आवास, सड़क, जल, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की संतृप्ति है, और यह अनेक मौजूदा केंद्रीय योजनाओं के अभिसरण से काम करता है। A, 2022, और D, 2023, अभियान के अस्तित्व से पहले के वर्ष हैं; 2023 वस्तुतः पीएम-जनमन का वर्ष है, जो विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की बस्तियों के लिए अलग अभियान है और यही इस प्रश्न का सामान्य जाल है। B, 2025, मंजूरी के बाद का वर्ष है। इसलिए यह जोड़ी याद रखें: 2023 में पीएम-जनमन और 2024 में जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान। यह भी ध्यान रखें कि इस अभियान का नोडल मंत्रालय जनजातीय कार्य मंत्रालय है और यह अन्य मंत्रालयों के साथ अभिसरण में चलता है, इसलिए प्रश्न वर्ष के स्थान पर नोडल मंत्रालय भी पूछ सकता है।
टोडा जनजाति निम्नलिखित में से किस क्षेत्र से संबंधित है?
- A.नीलगिरि पहाड़ियां
- B.गारो पहाड़ियां
- C.अरावली श्रेणी
- D.छोटा नागपुर पठार
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, नीलगिरि पहाड़ियां है। टोडा तमिलनाडु के नीलगिरि पठार का छोटा पशुपालक समुदाय है, जो अपनी अर्धबेलनाकार झोपड़ियों, पवित्र भैंस-झुंडों और दुग्ध-केंद्रित धार्मिक परंपरा के लिए जाना जाता है; इसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह में भी रखा गया है। B गलत है क्योंकि मेघालय की गारो पहाड़ियां गारो जनजाति की हैं, जो मातृवंशीय है, और पड़ोसी पहाड़ियों में खासी तथा जयंतिया रहते हैं। C गलत है क्योंकि राजस्थान और गुजरात की अरावली श्रेणी भील, मीना तथा गरासिया का क्षेत्र है, टोडा का नहीं। D गलत है क्योंकि झारखंड का छोटा नागपुर पठार संथाल, मुंडा, उरांव और हो का घर है। टोडा, कोटा, इरुला तथा कुरुम्बा मिलकर वह शास्त्रीय नीलगिरि समूह बनाते हैं जिसे परीक्षक तमिलनाडु से जोड़ते हैं। टोडा की बस्तियों को मुंड कहा जाता है और उनके त्योहार भी भैंस तथा दुग्ध परंपरा से जुड़े हैं, इसलिए टोडा को नीलगिरि, तमिलनाडु और भैंस-पालन से जोड़कर याद रखें।
भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राष्ट्रपति को लोक अधिसूचना द्वारा किसी राज्य की अनुसूचित जनजातियां विनिर्दिष्ट करने की शक्ति देता है?
- A.अनुच्छेद 330
- B.अनुच्छेद 338क
- C.अनुच्छेद 342
- D.अनुच्छेद 244
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, अनुच्छेद 342 है। इसके अंतर्गत राष्ट्रपति लोक अधिसूचना द्वारा और संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श के बाद उन जनजातियों या जनजातीय समुदायों को विनिर्दिष्ट कर सकते हैं जिन्हें उस राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के लिए अनुसूचित जनजाति माना जाएगा, और उसके बाद किसी समुदाय को जोड़ने या हटाने का अधिकार केवल संसद को है, वह भी विधि द्वारा। A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 330 लोकसभा में अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटें आरक्षित करता है। B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 338क, जो 2003 के 89वें संशोधन से जोड़ा गया, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना करता है। D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 244 पांचवीं तथा छठी अनुसूची लाता है। जोड़ी याद रखें: अनुसूचित जातियों के लिए 341 और अनुसूचित जनजातियों के लिए 342।