जल की शून्य कठोरता किस विधि से प्राप्त की जाती है?
- A.लाइम सोडा प्रक्रिया से
- B.अधिक चूना उपचार से
- C.आयन विनिमय विधि से
- D.अधिक फिटकरी की मात्रा से
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर C, आयन विनिमय विधि है। आयन विनिमय संयंत्र में जल पहले कैटायन रेजिन से गुजरता है, जो कैल्सियम तथा मैग्नीशियम आयन ले लेता है, और फिर ऐनायन रेजिन से, जो सल्फेट, क्लोराइड तथा बाइकार्बोनेट आयन ले लेता है; चूँकि कठोरता देने वाले आयन वास्तव में जल से निकाल दिए जाते हैं, कठोरता लगभग शून्य तक लाई जा सकती है और इसी प्रकार विखनिजीकृत जल बनाया जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि लाइम सोडा प्रक्रिया में कुछ दसियों पार्ट्स पर मिलियन की अवशिष्ट कठोरता बची रहती है, क्योंकि बने कार्बोनेट कुछ सीमा तक घुलनशील होते हैं। विकल्प B इसी कारण गलत है, और अधिक चूना स्वयं बाद में हटाना पड़ता है। विकल्प D गलत है क्योंकि फिटकरी स्कंदक है, जो निलंबित मिट्टी के कणों को बैठाती है और घुले कैल्सियम तथा मैग्नीशियम लवणों पर कोई प्रभाव नहीं डालती।
पूरा लेख पढ़ें: जल रसायन: कठोर जल, भारी जल और जल शोधन के नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंभारी जल को रासायनिक रूप से क्या कहा जाता है?
- A.हाइड्रोजन परॉक्साइड
- B.ड्यूटीरियम ऑक्साइड
- C.ट्राइटियम ऑक्साइड
- D.आसुत जल
उत्तर देखें
भारी जल D2O है, जिसमें दोनों हाइड्रोजन परमाणु ड्यूटीरियम के हैं, वह समस्थानिक जिसके नाभिक में एक प्रोटॉन और एक न्यूट्रॉन होता है, इसलिए उसका अणु भार अठारह के स्थान पर बीस होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जल की अस्थायी कठोरता किसकी उपस्थिति से होती है?
- A.कैल्सियम और मैग्नीशियम के सल्फेट
- B.कैल्सियम और मैग्नीशियम के क्लोराइड
- C.कैल्सियम और मैग्नीशियम के बाइकार्बोनेट
- D.सोडियम और पोटैशियम के लवण
उत्तर देखें
ये बाइकार्बोनेट तब बनते हैं जब घुली कार्बन डाइऑक्साइड वाला जल चूना-पत्थर के ऊपर बहता है, और ये अस्थायी होते हैं; उबालने पर वे कार्बन डाइऑक्साइड छोड़कर अघुलनशील कार्बोनेट के रूप में बैठ जाते हैं, इसी कारण इस कठोरता को अस्थायी कहा जाता है और वह केवल उबालने से, अथवा…
पूरी व्याख्या पढ़ें →जल का घनत्व किस ताप पर अधिकतम होता है?
- A.0 डिग्री सेल्सियस
- B.4 डिग्री सेल्सियस
- C.25 डिग्री सेल्सियस
- D.100 डिग्री सेल्सियस
उत्तर देखें
जल चार डिग्री तक ठंडा होने पर सिकुड़ता है, उस ताप पर उसका घनत्व अधिकतम होता है, और उसके बाद शून्य तक ठंडा होते हुए फिर फैलता है, जिसे जल का असामान्य प्रसार कहते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जल संस्थान में फिटकरी मुख्यतः किस उद्देश्य से मिलाई जाती है?
- A.जीवाणु और विषाणु मारने के लिए
- B.महीन निलंबित कणों को स्कंदित करके बैठाने के लिए
- C.जल की स्थायी कठोरता दूर करने के लिए
- D.जल में फ्लोराइड मिलाने के लिए
उत्तर देखें
फिटकरी अर्थात् ऐलुमिनियम सल्फेट या पोटाश एलम स्कंदक है: जल में यह जेली जैसा हाइड्रॉक्साइड बनाती है, जो मिट्टी तथा कोलॉइडी महीन कणों को भारी गुच्छों में समेट लेता है, जो अवसादन टैंक में बैठकर हटा दिए जाते हैं और निस्यंदन के लिए स्वच्छ जल बचता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पेय जल के विसंक्रमण में प्रयुक्त विरंजक चूर्ण रासायनिक रूप से क्या है?
- A.कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड
- B.सोडियम बाइकार्बोनेट
- C.कैल्सियम सल्फेट
- D.सोडियम हेक्सामेटाफॉस्फेट
उत्तर देखें
विरंजक चूर्ण शुष्क बुझे चूने पर क्लोरीन प्रवाहित करके बनाया जाता है और उसे कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड लिखा जाता है; जल में यह क्लोरीन मुक्त करता है, जो जीवाणुओं तथा अन्य रोगजनकों को मारती है, और इसी कारण इसका उपयोग जल आपूर्ति के विसंक्रमण तथा कपड़े व कागज के विरंजन, दोनों…
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