एनसीसीएसआर 2026 का उद्घाटन करने और भारतीय कोयला कंपनियों के लिए व्यापक सीएसआर ढाँचा जारी करने वाले कौन थे?
- A.अजीत सेठ, पूर्व कैबिनेट सचिव
- B.पल्लवी जैन गोविल, सचिव, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय
- C.सतीश चंद्र दुबे, कोयला एवं खान राज्य मंत्री
- D.ज्ञानेश्वर कुमार सिंह, महानिदेशक एवं सीईओ, आईआईसीए
सही उत्तर
C. सतीश चंद्र दुबे, कोयला एवं खान राज्य मंत्री
व्याख्या
सही उत्तर सतीश चंद्र दुबे, कोयला एवं खान राज्य मंत्री हैं। उन्होंने सम्मेलन का उद्घाटन किया, मुख्य भाषण दिया और भारतीय कोयला कंपनियों के लिए व्यापक सीएसआर ढाँचा जारी किया, जो कोयला क्षेत्र को ज़रूरत के आधार पर सुव्यवस्थित दिशा देने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति का पूरा अर्थ तभी है जब उसका लाभ मज़बूत समुदायों, व्यापक अवसरों और अधिक सक्षम क्षेत्रों के रूप में सामने आए। विकल्प A गलत है, क्योंकि अजीत सेठ ने दूसरे दिन समापन भाषण दिया और सीएसआर बेस्ट प्रैक्टिसेज़ कंपेंडियम 2025 जारी किया। विकल्प B गलत है, क्योंकि पल्लवी जैन गोविल ने उद्घाटन भाषण दिया और इंडिया सीएसआर फैक्टबुक 2024-25 जारी की। विकल्प D गलत है, क्योंकि आईआईसीए के महानिदेशक ने स्वागत भाषण दिया था। चारों नाम इसी आयोजन से हैं, इसलिए हर नाम को उसके काम से जोड़कर याद रखें।
पूरा लेख पढ़ें: तीसरा राष्ट्रीय सीएसआर सम्मेलन एनसीसीएसआर 2026 दिल्ली में संपन्न
अभ्यास प्रश्न
कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व पर तीसरा राष्ट्रीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी (एनसीसीएसआर 2026) किस संस्थान ने आयोजित किया?
- A.भारतीय लोक प्रशासन संस्थान
- B.भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान
- C.राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान
- D.भारतीय कंपनी सचिव संस्थान
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान है। एनसीसीएसआर 2026 का आयोजन आईआईसीए ने, विशेष रूप से उसके स्कूल ऑफ बिज़नेस एनवायरनमेंट ने, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन किया और यह 6 तथा 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के द अशोक में हुआ। संस्थान के महानिदेशक एवं सीईओ श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह तथा स्कूल ऑफ बिज़नेस एनवायरनमेंट की प्रमुख प्रो. गरिमा दधीच, दोनों ने सम्मेलन को संबोधित किया। इसी संस्थान ने कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया लिमिटेड के लिए क्षेत्र-विशेष सीएसआर ढाँचे भी तैयार किए, जिन पर पैनल चर्चाओं में बात हुई। विकल्प A, C और D में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान और भारतीय कंपनी सचिव संस्थान के नाम हैं, जो वास्तविक संस्थाएँ हैं लेकिन इनमें से किसी ने यह सम्मेलन नहीं कराया। सीएसआर से जुड़े प्रश्न में आईआईसीए को कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के साथ जोड़कर याद रखें।
एनसीसीएसआर 2026 की थीम क्या थी?
- A.‘टिकाऊ विकास लक्ष्यों के लिए सीएसआर’
- B.‘विकसित भारत के लिए सीएसआर की भावना को नए सिरे से देखना: अनुपालन से प्रतिबद्धता तक’
- C.‘आत्मनिर्भर भारत के लिए ज़िम्मेदार कारोबार’
- D.‘बोर्डरूम से गाँव तक: सीएसआर की यात्रा’
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर ‘विकसित भारत के लिए सीएसआर की भावना को नए सिरे से देखना: अनुपालन से प्रतिबद्धता तक’ है। इसी थीम ने दोनों दिनों की दिशा तय की, जिसमें वक्ताओं से कहा गया कि सीएसआर को सालाना अनुपालन के बजाय लगातार चलने वाली प्रतिबद्धता माना जाए, और समापन सत्र का छोटा शीर्षक ‘अनुपालन से प्रतिबद्धता तक’ रखा गया। विकल्प A गलत है, हालाँकि एक पैनल ने टिकाऊ विकास लक्ष्यों से जुड़े क्षेत्र-आधारित तरीकों पर चर्चा की और सीएसआर रिपोर्टिंग को इन लक्ष्यों से जोड़ने की सिफारिश भी की। विकल्प C और D सुनने में सही लगने वाले नारे हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं हुआ। इस आयोजन से जुड़े अन्य तथ्य भी याद रखें: 600 से ज़्यादा वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए, स्थान द अशोक रहा, तारीखें 6 और 7 अक्टूबर 2026 थीं और दो दिनों में तीन दस्तावेज़ जारी हुए।
एनसीसीएसआर 2026 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के वरिष्ठ सलाहकार के साथ फायरसाइड चैट किस विषय पर हुई?
- A.सोशल स्टॉक एक्सचेंज
- B.सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड
- C.नगरपालिका बॉन्ड बाज़ार
- D.वैकल्पिक निवेश कोष
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व्याख्या
सही उत्तर सोशल स्टॉक एक्सचेंज है। उद्घाटन सत्र के बाद ‘सोशल स्टॉक एक्सचेंज: उद्देश्य, पूँजी और प्रभाव’ विषय पर फायरसाइड चैट हुई, जिसमें नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में नीति के वरिष्ठ सलाहकार श्री शैलेश के. पाठक और आईआईसीए की प्रो. गरिमा दधीच शामिल हुए। चर्चा में देखा गया कि सोशल स्टॉक एक्सचेंज सामाजिक उद्देश्य को पूँजी से कैसे जोड़ सकता है, और सामाजिक क्षेत्र के वित्तपोषण में भरोसेमंद प्रभाव मापन, पारदर्शिता तथा संस्थागत विश्वास क्यों ज़रूरी हैं। विकल्प B, C और D में सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड, नगरपालिका बॉन्ड बाज़ार और वैकल्पिक निवेश कोष हैं, जो भारतीय वित्त के असली साधन हैं लेकिन इस सत्र का विषय नहीं थे। सम्मेलन के अन्य सत्रों में बोर्ड की भूमिका, सीएसआर एक्सचेंज पोर्टल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना पर बात हुई।
कार्यशाला में चर्चित एनसीईएल, एनसीओएल और बीबीएसएसएल क्रमशः किन क्षेत्रों की राष्ट्रीय सहकारी संस्थाएं हैं?
- A.निर्यात, ऑर्गेनिक उत्पाद और बीज
- B.ऋण, बीमा और विपणन
- C.डेयरी, मत्स्य और भंडारण
- D.आवास, उर्वरक और निर्यात
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व्याख्या
सही उत्तर निर्यात, ऑर्गेनिक उत्पाद और बीज है। एनसीईएल अर्थात राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड, एनसीओएल अर्थात राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड और बीबीएसएसएल अर्थात भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड हैं। कार्यशाला में सचिव ने कहा कि अनेक राज्यों ने इन तीनों संस्थाओं का प्रभावी उपयोग किया है और इनके माध्यम से कृषि उपज के एकत्रीकरण, व्यापक बाजारों तक पहुंच तथा किसानों और सदस्यों को लाभकारी मूल्य के अवसर बन रहे हैं। विकल्प B, C और D गलत हैं, क्योंकि वे इन संक्षिप्त नामों से मेल नहीं खाते, जबकि डेयरी सहकारी संस्थाएं, मत्स्य क्षेत्र, उर्वरक व्यवसाय योजनाएं और विकेंद्रीकृत अन्न भंडारण इसी कार्यशाला के अलग सत्रों में शामिल रहे।
सचिव ने यह भी कहा कि इन संस्थाओं के उपयोग के सफल मॉडलों का अध्ययन कर अन्य राज्य भी उन्हें अपना सकते हैं, और मंत्रालय पिछले दो वर्षों से इन कड़ियों को मजबूत करने का कार्य कर रहा है। डेयरी तथा मत्स्य सहकारी संस्थाओं में नई समितियों के गठन की प्रगति को भी उत्साहजनक बताया गया।
सहकारिता पर आयोजित 9वीं राष्ट्रीय समीक्षा कार्यशाला का समापन संबोधन किसने दिया?
- A.अमित शाह, केंद्रीय सहकारिता मंत्री
- B.डॉ. आशीष कुमार भूटानी, सचिव, सहकारिता मंत्रालय
- C.नाबार्ड के अध्यक्ष
- D.छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर डॉ. आशीष कुमार भूटानी हैं, जो सहकारिता मंत्रालय के सचिव हैं और जिन्होंने विचार-विमर्श को सार्थक बताते हुए राज्यों से चर्चा के स्थान पर क्रियान्वयन की ओर बढ़ने को कहा। विकल्प A आकर्षक भ्रम है, क्योंकि मंत्रालय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में कार्य करता है और कार्यशाला उनके नेतृत्व में हुई, परंतु समापन संबोधन सचिव ने दिया। विकल्प C गलत है, हालांकि सत्र में नाबार्ड की समान कोर बैंकिंग समाधान संबंधी प्रस्तुति की सराहना की गई। विकल्प D भी गलत है। सचिव ने कहा कि सहकारी विकास का एक मॉडल सभी राज्यों के लिए उपयुक्त नहीं है और जिला स्तर के सफल नवाचारों को संकलित कर विस्तार दिया जाना चाहिए।
सचिव ने राज्यों से कार्यशाला के तुरंत बाद प्राथमिकता तय कर कार्ययोजना बनाने, जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने तथा नियमित निगरानी की व्यवस्था विकसित करने का आग्रह भी किया।