एम्स देवघर, जिसके दूसरे दीक्षांत समारोह को उपराष्ट्रपति ने संबोधित किया, किस राज्य में है?
- A.बिहार
- B.झारखंड
- C.ओडिशा
- D.पश्चिम बंगाल
सही उत्तर
B. झारखंड
व्याख्या
सही उत्तर झारखंड है। देवघर झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में स्थित है, और उपराष्ट्रपति ने दीक्षांत समारोह को उसी क्षेत्र की आकांक्षाओं का उत्सव बताते हुए कहा कि यह संस्थान आसपास के जनजातीय तथा ग्रामीण समुदायों के लिए क्या अर्थ रखता है। विकल्प A यानी बिहार गलत है, हालांकि यह भूल समझी जा सकती है — झारखंड के गठन से पहले देवघर अविभाजित बिहार का भाग था और दोनों राज्य अपनी सीमा पर संथाल परगना का सांस्कृतिक क्षेत्र साझा करते हैं। विकल्प C यानी ओडिशा गलत है; ओडिशा का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भुवनेश्वर में है। विकल्प D यानी पश्चिम बंगाल भी गलत है; उस राज्य का इसी परिवार का संस्थान कल्याणी में है। आयोजन के भीतर एक और पुष्टि उपस्थित लोगों की सूची से मिलती है, जिसमें झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार तथा राज्य के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. इरफान अंसारी शामिल थे।
पूरा लेख पढ़ें: उपराष्ट्रपति ने एम्स देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया
अभ्यास प्रश्न
एम्स देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह में उत्तीर्ण विद्यार्थियों में महिलाओं की संख्या कितनी थी?
- A.173 में 87
- B.173 में 132
- C.240 में 132
- D.150 में 96
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 173 में 132 है। उपराष्ट्रपति ने संतोष के साथ इसका उल्लेख किया और कहा कि यह देश के महिला सशक्तीकरण से आगे बढ़कर महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर जाने को दर्शाता है तथा यह भी दिखाता है कि शिक्षा महिलाओं को अपनी क्षमता साकार करने में कैसे सहायक है। विकल्प A में कुल संख्या सही है पर महिलाओं की संख्या लगभग आधी कर दी गई है, जिससे बैच लगभग बराबर बंट जाता और उपराष्ट्रपति की बात का आधार ही समाप्त हो जाता। विकल्प C में महिलाओं की संख्या सही है पर बैच का आकार बढ़ा दिया गया है, जिससे उनका हिस्सा आधे से कुछ अधिक ही रह जाता। विकल्प D में दोनों आंकड़े बदल दिए गए हैं और वे समारोह के किसी तथ्य से मेल नहीं खाते। परीक्षाओं में ऐसे आंकड़ों की जोड़ी प्रायः अनुपात के रूप में पूछी जाती है, इसलिए इसे वाक्य के रूप में याद रखना उपयोगी है — चिकित्सकों, नर्सों और स्वास्थ्य पेशेवरों के 173 के बैच में महिलाएं स्पष्ट बहुमत में थीं।
उपराष्ट्रपति के अनुसार भारत में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2014 से पहले के 387 से बढ़कर कितनी हो गई है?
- A.648
- B.706
- C.846
- D.912
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 846 है। चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2014 से पहले देश में 387 मेडिकल कॉलेज थे और अब 846 हैं, तथा उन्होंने एम्स देवघर जैसे संस्थानों को संतुलित और समावेशी विकास का प्रमाण बताया। विकल्प A, B और D यानी 648, 706 और 912 इसी श्रेणी के विश्वसनीय दिखने वाले आंकड़े हैं, पर उल्लिखित संख्या इनमें से कोई नहीं है। इस तथ्य को आधार वर्ष के साथ जोड़े में याद रखना सबसे सुरक्षित है — 2014 से पहले 387 और अब 846। परीक्षार्थियों को इस आंकड़े को उस व्यापक बात से भी जोड़ना चाहिए जो उपराष्ट्रपति ने इसके साथ कही, अर्थात यदि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य पाना है तो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और उच्च शिक्षा हर राज्य, हर जिले और हर गांव तक पहुंचनी चाहिए।
एम्स देवघर के उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों से दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में सेवा का आग्रह करते समय उपराष्ट्रपति ने किन जनजातीय नायकों का स्मरण किया?
- A.बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू और तिलका मांझी
- B.रानी गाइदिन्ल्यू, अल्लूरी सीताराम राजू और कोमाराम भीम
- C.टंट्या भील, गोविंद गुरु और बुधु भगत
- D.शहीद वीर नारायण सिंह, जतरा भगत और तेलंगा खड़िया
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर विकल्प A है। उपराष्ट्रपति ने बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू तथा तिलका मांझी की विरासत का स्मरण किया, जो सभी देवघर के आसपास के क्षेत्र से गहराई से जुड़े जनजातीय प्रतिरोध के नायक हैं, और उनकी स्मृति के सहारे उपाधि पाने वालों से कहा कि वे अपना ज्ञान गांवों, जनजातीय समुदायों तथा देश के सबसे दूरस्थ हिस्सों तक ले जाएं। विकल्प B में पूर्वोत्तर की रानी गाइदिन्ल्यू के साथ अल्लूरी सीताराम राजू तथा कोमाराम भीम हैं, जिन्हें मुख्यतः तेलुगुभाषी क्षेत्रों में याद किया जाता है, इसलिए यह समूह इस समारोह से मेल नहीं खाता। विकल्प C में मध्य तथा पश्चिम भारत से जुड़े जनजातीय नेता हैं, और बुधु भगत छोटानागपुर क्षेत्र के होने पर भी यह पूरा समूह उल्लिखित नहीं था। विकल्प D में पूर्वी क्षेत्र के अन्य जनजातीय नेता हैं, जिनका नाम इस संबोधन में नहीं आया। संथाल परगना का संबंध ही संकेत है — सिदो और कान्हू ने संथाल विद्रोह का नेतृत्व किया और तिलका मांझी को इसी क्षेत्र में स्मरण किया जाता है।
वन अधिकार अधिनियम पर इस श्रृंखला का पहला क्षेत्रीय समीक्षा सम्मेलन सितंबर 2026 में कहां हुआ था?
- A.हैदराबाद
- B.बेंगलुरु
- C.चेन्नई
- D.गुवाहाटी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर बेंगलुरु है। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने क्षेत्रीय समीक्षा की शुरुआत वहीं से की थी, जिसमें दक्षिणी राज्यों को लिया गया, और एक महीने बाद कोलकाता में हुआ सम्मेलन इस श्रृंखला का दूसरा था, जिसमें आठ पूर्वी तथा मध्य भारत के राज्य शामिल थे। विकल्प A यानी हैदराबाद भ्रम पैदा करता है, क्योंकि कोलकाता सम्मेलन में आंध्र प्रदेश की चर्चा विशेष रूप से हुई थी, जिसने पट्टों के डिजिटलीकरण का अनुभव साझा किया; लेकिन वह राज्य किसी भी सम्मेलन का मेजबान नहीं था। विकल्प C यानी चेन्नई गलत है, क्योंकि इस श्रृंखला का कोई सम्मेलन वहां नहीं हुआ, भले ही तमिलनाडु उस दक्षिणी समूह में आता है जिसे पहले सम्मेलन ने कवर किया। विकल्प D यानी गुवाहाटी भी गलत है — असम का नाम कोलकाता में लंबित दावों के बड़े हिस्से के लिए आया, मेजबान के रूप में नहीं। दोनों स्थानों का क्रम याद रखें।
सम्मेलन में बताए अनुसार देश में वन अधिकार अधिनियम के तहत अब तक कितने पट्टे वितरित किए गए हैं?
- A.लगभग 11 लाख
- B.लगभग 18 लाख
- C.लगभग 25 लाख
- D.54 लाख से अधिक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर लगभग 25 लाख है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने 31 अगस्त 2026 तक की राष्ट्रीय स्थिति रखते हुए यही संख्या वन निवासियों को दिए गए पट्टों की बताई। विकल्प D यानी 54 लाख से अधिक कुल प्राप्त दावों की संख्या है, और अभ्यर्थी इसी को पट्टों की संख्या समझ लेते हैं। विकल्प A यानी लगभग 11 लाख वे दावे हैं जो अलग-अलग चरणों में अब भी लंबित हैं और मध्य प्रदेश, ओडिशा तथा असम के कुछ जिलों में केंद्रित हैं। विकल्प B यानी लगभग 18 लाख अस्वीकृत दावों की संख्या है, जिनकी अधिनियम और नियमों के अनुसार दोबारा जांच करने को सम्मेलन में कहा गया। चारों आंकड़ों — प्राप्त दावे, वितरित पट्टे, लंबित दावे और अस्वीकृत दावे — को एक समूह के रूप में याद रखें, क्योंकि प्रश्न किसी भी एक पर बन सकता है।