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GK24
रक्षाआसान

एचएएल कोरापुट की बढ़ी शक्ति इंजन क्षमता मुख्यतः किन प्लेटफॉर्म के लिए है?

  1. A.तेजस और राफेल लड़ाकू विमान
  2. B.ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर
  3. C.डोर्नियर और सारस परिवहन विमान
  4. D.रुस्तम और तापस मानवरहित विमान

सही उत्तर

B. ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर

व्याख्या

सही उत्तर ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर है। घोषणा में इन दोनों स्वदेशी रोटरी-विंग प्लेटफॉर्म को ही बढ़ते शक्ति इंजन उत्पादन के उपयोगकर्ता के रूप में बताया गया है। कोरापुट की दूसरी लाइन, जो 218 करोड़ रुपये के निवेश से बनी है, इसी बढ़ती जरूरत के लिए है। विकल्प A लड़ाकू विमानों का है, जिनके इंजन अलग होते हैं। विकल्प C और D परिवहन तथा मानवरहित विमानों के नाम हैं, जिन्हें इस घोषणा में शक्ति इंजन से नहीं जोड़ा गया। मंत्रालय का व्यापक तर्क यह है कि देश में प्रणोदन प्रणाली बनाना ही भारत को रक्षा उपकरणों के खरीदार से डिजाइनर, डेवलपर और निर्माता बनाता है, क्योंकि इंजन के आयात पर निर्भरता किसी अन्यथा स्वदेशी विमान को भी रोक देती है।

पूरा लेख पढ़ें: एचएएल कोरापुट 2000वां एयरो-इंजन सौंपेगा, ओडिशा में समारोह

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Q1.रक्षामध्यम

एचएएल का कौन सा डिवीजन अपने 2000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी का पड़ाव पूरा कर रहा है?

  1. A.बेंगलुरु डिवीजन
  2. B.कोरापुट डिवीजन
  3. C.नासिक डिवीजन
  4. D.हैदराबाद डिवीजन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कोरापुट डिवीजन

व्याख्या

सही उत्तर कोरापुट डिवीजन है, जो ओडिशा में है और लगभग छह दशकों से एयरो-इंजन बना रहा है। इस संयंत्र का दो हजारवां इंजन 6 अक्टूबर 2026 को सौंपा जा रहा है, जिसका उद्घाटन रक्षा मंत्री करेंगे और ओडिशा के मुख्यमंत्री भी उपस्थित रहेंगे। उसी अवसर पर शक्ति इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन सामने आएगी, जो स्वदेशी हेलीकॉप्टरों की बढ़ती जरूरत के लिए 218 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित हुई है। विकल्प A, C और D हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के वास्तविक केंद्र हैं और हर एक की अपनी उत्पाद श्रृंखला है, इसलिए वे भ्रमित कर सकते हैं; लेकिन एयरो-इंजन का यह पड़ाव कोरापुट का है। संयंत्र, राज्य और इंजन को एक साथ जोड़कर याद रखें — कोरापुट, ओडिशा, शक्ति इंजन।

Q2.रक्षामध्यम

एचएएल कोरापुट में शक्ति इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन में कितना निवेश किया गया है?

  1. A.118 करोड़ रुपये
  2. B.218 करोड़ रुपये
  3. C.418 करोड़ रुपये
  4. D.818 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 218 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 218 करोड़ रुपये है। कोरापुट के कार्यक्रम में सामने आ रही शक्ति इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन इसी निवेश से स्थापित हुई है, और यह बढ़ी क्षमता स्वदेशी हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म के लिए है, जिनमें घोषणा के अनुसार ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर शामिल हैं। दूसरी लाइन इसलिए जरूरी है कि एक ही लाइन से साल भर में दी जा सकने वाली इंजन संख्या पर सीमा लग जाती है, और हेलीकॉप्टर उत्पादन अपने इंजनों से आगे नहीं चल सकता। बाकी तीन आंकड़े इस घोषणा के नहीं हैं। दिन के दो अंकों को अलग-अलग रखें — दो हजार संयंत्र की शुरुआत से अब तक दिए गए इंजनों की गिनती है, और दो सौ अठारह करोड़ रुपये नई लाइन में लगी राशि।

Q3.रक्षामध्यम

एफएसएस-1 के जलावतरण के दिन किस बेड़ा सहायता पोत की कील रखी जा रही है?

  1. A.एफएसएस-2
  2. B.एफएसएस-3
  3. C.एफएसएस-4
  4. D.एफएसएस-5
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. एफएसएस-5

व्याख्या

सही उत्तर एफएसएस-5 है। विशाखापत्तनम के समारोह में रक्षा मंत्री श्रेणी के पहले पोत का जलावतरण करेंगे और उसी दिन पांचवें तथा अंतिम पोत की कील रखेंगे, जिससे यह कार्यक्रम एक-एक पोत बनाने के बजाय श्रृंखलाबद्ध उत्पादन की दिशा में बढ़ जाता है। कील रखना किसी पोत के ढांचे के निर्माण की औपचारिक शुरुआत है, इसलिए पहला पोत पानी में और पांचवां शुरू होना बताता है कि पूरा ऑर्डर साथ-साथ चल रहा है। विकल्प A, B और C श्रेणी के बीच के पोत हैं, इस आयोजन में उनकी कील नहीं रखी जा रही। एक ही दिन के दोनों पड़ाव याद रखें — एफएसएस-1 का जलावतरण और एफएसएस-5 की कील, साथ में उन्नत स्लिपवे-4 तथा 300 टन की गोलियाथ क्रेन का उद्घाटन।

Q4.रक्षामध्यम

भारतीय नौसेना के लिए बन रहे प्रत्येक बेड़ा सहायता पोत का भार कितना है?

  1. A.25,000 टन
  2. B.37,000 टन
  3. C.43,500 टन
  4. D.52,000 टन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 43,500 टन

व्याख्या

सही उत्तर 43,500 टन है। पांचों बेड़ा सहायता पोत इसी आकार के हैं और इनका काम समुद्र में तैनात युद्धपोतों को ईंधन, सामग्री और रसद पहुंचाकर उनकी पुन: आपूर्ति करना है, जिससे बेड़े को बंदरगाह लौटे बिना अभियान जारी रखने की सुविधा मिलती है। इसी से हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की तैनाती अवधि और पहुंच बढ़ती है। अभ्यर्थी इस आंकड़े को उसी घोषणा में दिए दूसरे आंकड़े से न मिलाएं — उन्नत स्लिपवे-4, 300 टन की नई गोलियाथ क्रेन के साथ, शिपयार्ड को 45,000 डेडवेट टन तक के पोत बनाने और उतारने देता है, जो शिपयार्ड की सीमा है, इस श्रेणी का भार नहीं। विकल्प A, B और D इस घोषणा के आंकड़े नहीं हैं। पोत का भार और शिपयार्ड की निर्माण सीमा दो अलग-अलग आंकड़े हैं, इसलिए परीक्षा में इन्हें आपस में मिलाने की गलती नहीं करनी चाहिए।

Q5.रक्षाआसान

भारतीय नौसेना का पहला बेड़ा सहायता पोत एफएसएस-1 किस शिपयार्ड में उतारा जा रहा है?

  1. A.मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, मुंबई
  2. B.हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम
  3. C.कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि
  4. D.गार्डन रीच शिपबिल्डर्स, कोलकाता
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम

व्याख्या

सही उत्तर हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम है। भारतीय नौसेना के लिए पांचों बेड़ा सहायता पोत यही शिपयार्ड बना रहा है, और एफएसएस-1 वहीं 6 अक्टूबर 2026 को बंगाल की खाड़ी के जल में उतारा जाएगा, स्टील कटिंग के अठारह महीने बाद। उसी समारोह में एफएसएस-5 की कील रखी जाएगी और शिपयार्ड की दो सुविधाओं का उद्घाटन होगा — उन्नत स्लिपवे-4 और 300 टन की गोलियाथ क्रेन, जो मिलकर शिपयार्ड की निर्माण सीमा 45,000 डेडवेट टन तक पहुंचा देती हैं। बाकी तीनों विकल्प भारत के वास्तविक रक्षा शिपयार्ड हैं, इसीलिए वे भ्रम पैदा करते हैं, लेकिन बेड़ा सहायता पोत का ऑर्डर उनमें किसी के पास नहीं है। याद रखें — बेड़ा सहायता पोत का जोड़ा विशाखापत्तनम के हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड से है।