भारतीय नौसेना बहुउद्देश्यीय पोत समर्थक को किस नौसैनिक अड्डे पर बेड़े में शामिल करेगी?
- A.विशाखापत्तनम
- B.कोच्चि
- C.कारवार
- D.मुंबई
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर कारवार है। समर्थक को कारवार नौसैनिक अड्डे पर बेड़े में शामिल किया जाएगा और इसके लिए 16 अक्टूबर 2026 की तिथि तय की गई है। कारवार कर्नाटक के तट पर स्थित है और यही वह अड्डा है जहां से नौसेना यह कार्यक्रम आयोजित कर रही है। विकल्प क, विशाखापत्तनम, पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय है, परंतु यह कार्यक्रम पश्चिमी तट पर कारवार में हो रहा है, आंध्र प्रदेश में नहीं। विकल्प ख, कोच्चि, केरल का एक बड़ा नौसैनिक केंद्र है और कई प्रशिक्षण संस्थानों का घर है, फिर भी समर्थक के लिए यह स्थान नहीं बताया गया है। विकल्प घ, मुंबई, पश्चिमी नौसेना कमान का मुख्यालय है, लेकिन इस पोत का शामिल होना वहां नहीं हो रहा है। परीक्षार्थियों को पोत का नाम कारवार, निर्माता लार्सन एंड टूब्रो लिमिटेड और चार बहुउद्देश्यीय पोतों में पहला होने के तथ्य से जोड़कर याद रखना चाहिए।
पूरा लेख पढ़ें: नौसेना 16 अक्टूबर को बहुउद्देश्यीय पोत समर्थक को शामिल करेगी
अभ्यास प्रश्न
समर्थक भारतीय नौसेना में शामिल किए जा रहे कितने बहुउद्देश्यीय पोतों में पहला है?
- A.दो
- B.तीन
- C.चार
- D.छह
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर चार है। समर्थक उन चार बहुउद्देश्यीय पोतों में पहला है जो भारतीय नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं, अर्थात इसके बाद इसी श्रेणी के तीन और पोत सेवा में आएंगे। यह संख्या महत्वपूर्ण है क्योंकि परीक्षाओं में अग्रणी पोत के साथ उसकी श्रेणी का आकार पूछा जाता है। विकल्प क, दो, बताई गई संख्या से कम है और गलत ढंग से केवल दो सहयोगी पोतों का संकेत देता है। विकल्प ख, तीन, भी कम है और यह एक सामान्य भ्रामक विकल्प है क्योंकि कई नौसैनिक ऑर्डर तीन पोतों के होते हैं। विकल्प घ, छह, संख्या को बढ़ा देता है। साथ में यह भी याद रखें कि पोत का निर्माण लार्सन एंड टूब्रो लिमिटेड ने मेक इन इंडिया पहल के तहत किया है, इसे 16 अक्टूबर 2026 को कारवार नौसैनिक अड्डे पर शामिल किया जाएगा और इसकी मुख्य भूमिका समुद्री निगरानी तथा गश्त है।
भारतीय नौसेना के बहुउद्देश्यीय पोत समर्थक का निर्माण किस कंपनी ने किया है?
- A.मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड
- B.लार्सन एंड टूब्रो लिमिटेड
- C.कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड
- D.गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर लार्सन एंड टूब्रो लिमिटेड है। इस कंपनी ने समर्थक का निर्माण भारत सरकार की मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत किया है और नौसेना इस अवसर को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक पड़ाव बताती है। विकल्प क, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई का वह कारखाना है जो विध्वंसक और पनडुब्बियों के लिए जाना जाता है, परंतु यह पोत वहां नहीं बना। विकल्प ग, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, ने स्वदेशी विमानवाहक पोत बनाया था और यह एक संभावित उत्तर लगता है, फिर भी इस पोत का निर्माता एक निजी क्षेत्र की कंपनी है। विकल्प घ, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता का कारखाना है और इसकी भी इसमें भूमिका नहीं है। निर्माता के साथ यह भी याद रखें कि पोत की एकीकृत युद्धक प्रणाली में स्वदेशी संवेदक, हथियार और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे हैं।
भारतीय नौसेना के पोत समर्थक के प्रतीक चिह्न में क्या दर्शाया गया है?
- A.लहर पर छलांग लगाता बाघ
- B.लहरों से निकलता भारतीय हाथी
- C.लंगर के ऊपर सुनहरा गरुड़
- D.तलवार के साथ क्रॉस किया त्रिशूल
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर लहरों से निकलता भारतीय हाथी है। प्रतीक चिह्न में शक्तिशाली भारतीय हाथी को रखा गया है, जो शक्ति, बुद्धि और फुर्ती दर्शाता है, और नौसेना इन्हीं गुणों को इस श्रेणी के पोत से जोड़ती है। विकल्प क, लहर पर छलांग लगाता बाघ, एक संभावित प्रतीक जान पड़ता है क्योंकि कई नौसैनिक चिह्नों में बड़े वन्य जीव होते हैं, परंतु समर्थक के लिए यह चिह्न नहीं चुना गया। विकल्प ग, लंगर के ऊपर सुनहरा गरुड़, सामान्य प्रतीकों को मिलाकर बनाया गया भ्रामक विकल्प है। विकल्प घ, तलवार के साथ क्रॉस किया त्रिशूल, सामान्य नौसैनिक कल्पना से मेल खाता है, इस विशेष चिह्न से नहीं। इसके साथ याद रखने योग्य तथ्य पोत का ध्येय वाक्य विजयार्थम् एकनिष्ठता है, जिसका अर्थ है विजय ही हमारा एकमात्र लक्ष्य।
भारत आए चेक प्रथम उपप्रधानमंत्री अपने उद्योग कार्यक्रम के तहत किन दो शहरों का दौरा करेंगे?
- A.चेन्नई और हैदराबाद
- B.बेंगलुरु और मुंबई
- C.पुणे और कोलकाता
- D.अहमदाबाद और नागपुर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर बेंगलुरु और मुंबई है। चेक गणराज्य के प्रथम उपप्रधानमंत्री तथा उद्योग एवं व्यापार मंत्री कारेल हवलीचेक चार दिन की यात्रा पर भारत आए हैं, जिसमें वे मंत्रालयों, व्यापार संगठनों और उद्यमों से मिल रहे हैं, और उनके कार्यक्रम में इन दोनों शहरों की औद्योगिक इकाइयों का दौरा शामिल है। बाकी विकल्पों में गिनाए शहर भी रक्षा तथा इंजीनियरिंग उद्योग के केंद्र हैं, इसलिए वे भरोसेमंद लगते हैं, पर घोषित कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थे। यात्रा का मुख्य नतीजा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ यह सहमति रही कि भारत-चेक संयुक्त रक्षा समिति सहित रक्षा औद्योगिक सहयोग बढ़ाया जाएगा, जिससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत मजबूत हों। दोनों मंत्रियों ने शांति तथा सुरक्षा पर भी चर्चा की और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गहरे सहयोग की जरूरत बताई।
भारत और चेक गणराज्य ने रक्षा औद्योगिक सहयोग किस मंच के अंतर्गत बढ़ाने पर सहमति जताई?
- A.भारत-चेक संयुक्त रक्षा समिति
- B.भारत-चेक सामरिक साझेदारी परिषद
- C.भारत-चेक रक्षा खरीद बोर्ड
- D.भारत-चेक सैन्य सहयोग समूह
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर भारत-चेक संयुक्त रक्षा समिति है, जिसे वार्ता में उस मंच के रूप में गिनाया गया जिसके जरिये दोनों देश रक्षा औद्योगिक जुड़ाव को आगे बढ़ाएंगे। विकल्प B, C और D गढ़े हुए नाम हैं, जो सरकारी लगते हैं पर बैठक में उनका कोई उल्लेख नहीं था; इस तरह के प्रश्न यह परखते हैं कि अभ्यर्थी को संस्थागत मंच का ठीक नाम याद है या नहीं, क्योंकि द्विपक्षीय रक्षा संबंध आमतौर पर इसी तरह की नामित समितियों या संवादों से चलते हैं। यह वार्ता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चेक गणराज्य के प्रथम उपप्रधानमंत्री तथा उद्योग एवं व्यापार मंत्री कारेल हवलीचेक के बीच नई दिल्ली में हुई। दोनों ने अपनी कंपनियों के संयुक्त उद्यमों का स्वागत किया और विस्तार को मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत से जोड़ा। हवलीचेक चार दिन की यात्रा पर हैं और बेंगलुरु तथा मुंबई की इकाइयां देखेंगे।