भारत सरकार का देशव्यापी विशेष अभियान 6.0 किस अवधि में चलाया जा रहा है?
- A.1 से 30 सितंबर 2026
- B.2 से 31 अक्टूबर 2026
- C.15 अगस्त से 15 सितंबर 2026
- D.1 से 31 दिसंबर 2026
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 2 से 31 अक्टूबर 2026 है। विशेष अभियान 6.0 भारत सरकार का देशव्यापी अभियान है, जो इसी महीने भर चलाया जा रहा है और इसके दो मकसद हैं, सरकारी कामकाज में स्वच्छता को स्थायी रूप देना तथा लंबित मामलों का ढेर घटाना। पूर्व सैनिक कल्याण विभाग ने बताया कि वह और उसके संबद्ध तथा अधीनस्थ कार्यालय इस पूरी अवधि में लक्षित गतिविधियां चला रहे हैं, जिनमें कार्यस्थल की कार्यकुशलता और अधिक स्वच्छ एवं टिकाऊ परिसर पर जोर है। विकल्प A यानी सितंबर की अवधि और विकल्प C यानी अगस्त से सितंबर की अवधि घोषित तिथियों से मेल नहीं खाती। विकल्प D इस अभियान को दिसंबर में रखता है, जो भी गलत है। दो अक्टूबर से शुरुआत याद रखने लायक बात है, क्योंकि भारत में सफाई से जुड़े अभियान परंपरागत रूप से महात्मा गांधी की जयंती से जोड़े जाते हैं।
पूरा लेख पढ़ें: स्वच्छता और लंबित कार्य पर विशेष अभियान 6.0 में डीईएसडब्ल्यू सक्रिय
अभ्यास प्रश्न
विशेष अभियान 6.0 के तहत अपनी गतिविधियों का ब्यौरा देने वाला पूर्व सैनिक कल्याण विभाग किस मंत्रालय के अधीन कार्य करता है?
- A.गृह मंत्रालय
- B.रक्षा मंत्रालय
- C.सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय
- D.कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
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व्याख्या
सही उत्तर रक्षा मंत्रालय है। पूर्व सैनिक कल्याण विभाग, जिसे डीईएसडब्ल्यू कहा जाता है, इसी मंत्रालय का विभाग है और पूर्व सैनिकों तथा उनके परिवारों के कल्याण के लिए जिम्मेदार है, इसीलिए अभियान के तहत शिकायतों और संसदीय आश्वासनों का तेज निपटारा पूर्व सैनिकों तथा पेंशनभोगियों के लिए मायने रखता है। विकल्प A यानी गृह मंत्रालय आंतरिक सुरक्षा और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को देखता है, पूर्व सैनिक कल्याण को नहीं। विकल्प C यानी सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के कल्याण पर काम करता है। विकल्प D यानी कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय सिविल सेवा प्रशासन और सरकारी असैन्य कर्मचारियों की पेंशन देखता है, और लंबित मामलों से जुड़े अभियानों में उसका नाम आता है, पर यहां नामित विभाग स्पष्ट रूप से रक्षा मंत्रालय के अधीन है।
विशेष अभियान 6.0 के तहत फेंकी गई सामग्री को मूल्यवान संसाधन में बदलने की सोच को किस नाम से बताया गया है?
- A.कचरे से संपदा
- B.घटाओ, दोबारा उपयोग करो, पुनर्चक्रण करो
- C.शून्य लैंडफिल मिशन
- D.स्वच्छ से हरित
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 'कचरे से संपदा' है। अभियान के तहत पूर्व सैनिक कल्याण विभाग ने इलेक्ट्रॉनिक कचरे को प्राथमिकता क्षेत्र बनाया है और उसके संग्रह, वैज्ञानिक पृथक्करण तथा जिम्मेदार निपटान को ई-कचरा (प्रबंधन) नियमों के अनुरूप कर रहा है, और इस पूरे प्रयास को कचरे से संपदा की सोच के जरिए प्रस्तुत करता है, जिसका अर्थ है फेंकी गई सामग्री को उपयोगी संसाधन में बदलना। विकल्प B यानी घटाओ, दोबारा उपयोग करो, पुनर्चक्रण करो कचरा प्रबंधन का सामान्य सिद्धांत है, पर इस पहल के लिए यही शब्द इस्तेमाल नहीं हुआ। विकल्प C और विकल्प D सुनने में भरोसेमंद लगते हैं, लेकिन विभाग की बताई रूपरेखा में ये नाम नहीं थे। परीक्षार्थी इस शब्द को ई-कचरे के लिए उद्धृत नियमों के साथ जोड़कर याद रखें, क्योंकि ऐसे अभियानों पर प्रश्न आमतौर पर ठीक शब्दावली और उसके पीछे के कानूनी प्रावधान को ही जांचते हैं।
भारत 2030 में किस बड़े बहु-खेल आयोजन की मेजबानी की तैयारी कर रहा है?
- A.एशियाई खेल
- B.राष्ट्रमंडल खेल
- C.ग्रीष्मकालीन ओलंपिक
- D.शीतकालीन ओलंपिक
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व्याख्या
सही उत्तर राष्ट्रमंडल खेल है। चेन्नई के समारोह में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है और इसके साथ-साथ देश 2036 के ओलंपिक की मेजबानी का सपना भी लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह बात खेल को करियर के रूप में खड़ा करने के संदर्भ में कही, जहां युवा खिलाड़ियों को नई सुविधाएं तथा बेहतर प्रशिक्षण और सहयोग मिल रहा है, जिससे विश्व खेल जगत में भारत का कद बढ़ रहा है। विकल्प C यानी ग्रीष्मकालीन ओलंपिक 2036 से जुड़ा है, 2030 से नहीं, और इसी अदला-बदली में प्रश्न का जाल है। विकल्प D यानी शीतकालीन ओलंपिक का कोई उल्लेख नहीं हुआ। विकल्प A यानी एशियाई खेल एक महाद्वीपीय आयोजन है और इसके लिए भारत की मेजबानी का कोई वर्ष यहां नहीं बताया गया। ओलंपिक की मेजबानी उन संकल्पों में भी शामिल थी जो 2047 तक विकसित भारत और चंद्रमा पर एक भारतीय के साथ दोहराए गए।
नवीनतम क्यूएस रैंकिंग में भारत के कितने विश्वविद्यालय शामिल हैं, जबकि 2015 में यह संख्या 14 थी?
- A.28
- B.36
- C.44
- D.52
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व्याख्या
सही उत्तर 52 है। प्रधानमंत्री ने बताया कि 2015 की क्यूएस रैंकिंग में भारत के केवल 14 विश्वविद्यालयों को जगह मिली थी, जबकि नवीनतम रैंकिंग में भारतीय संस्थानों की संख्या 52 हो गई है। उन्होंने इस छलांग को इस बात का प्रमाण बताया कि नई शिक्षा नीति से पढ़ाई की गुणवत्ता सुधर रही है और देश के संस्थानों की वैश्विक पहचान बढ़ रही है, जिससे विद्यार्थियों के पास अधिक संस्थान, अधिक विकल्प और अधिक अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। विकल्प A, B और C यानी 28, 36 और 44 देखने में संभव लगने वाले बीच के आंकड़े हैं, लेकिन नवीनतम रैंकिंग के लिए इनमें से कोई संख्या नहीं बताई गई। अभ्यर्थियों को इसे पहले और बाद की जोड़ी के रूप में याद रखना चाहिए, क्योंकि रिपोर्ट और रैंकिंग पर प्रश्न आमतौर पर ऐसी ही तुलना पर बनते हैं।
देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 2014 के करीब 750 से बढ़कर आज कितने से अधिक हो गई है?
- A.900
- B.1,100
- C.1,300
- D.1,600
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व्याख्या
सही उत्तर 1,300 से अधिक है। स्वर्ण जयंती समारोह में प्रधानमंत्री ने बताया कि देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 2014 में करीब 750 थी और अब यह 1,300 के पार पहुंच गई है, यानी लगभग एक दशक में यह संख्या करीब दोगुनी हुई है। इसके साथ उन्होंने महाविद्यालयों का आंकड़ा भी रखा, जो करीब 38,000 से बढ़कर 52,000 से ज्यादा हो गया है, और कहा कि इन्हीं वर्षों में देश को अनेक नए आईआईटी, आईआईएम, आईआईआईटी तथा एआईआईएमएस मिले। विकल्प A और B यानी 900 और 1,100 आज की संख्या को कम बताते हैं और इनसे वृद्धि की गति असल आंकड़े से धीमी लगती है। विकल्प D यानी 1,600 बढ़ा-चढ़ा आंकड़ा है और समारोह में ऐसी कोई संख्या नहीं कही गई। परीक्षा के लिए इसे पहले और बाद की जोड़ी के रूप में याद रखना सबसे सुरक्षित है।