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GK24
अंतरराष्ट्रीयकठिन

बैठक में चर्चा में आई भारत और सिंगापुर के बीच प्रस्तावित सीमा पार विद्युत कड़ी की क्षमता कितनी है?

  1. A.1,000 मेगावाट
  2. B.1,500 मेगावाट
  3. C.2,000 मेगावाट
  4. D.4,000 मेगावाट

सही उत्तर

C. 2,000 मेगावाट

व्याख्या

सही उत्तर 2,000 मेगावाट है। भारत और सिंगापुर इसी क्षमता की कड़ी के विकल्प देख रहे हैं और विचाराधीन विकल्पों में एक भूमि आधारित पारेषण गलियारा है, जो लगभग तीन हजार किलोमीटर लंबा होगा और भारत के इंफाल से म्यांमार, थाईलैंड तथा मलेशिया के रास्ते सिंगापुर तक जाएगा। बाकी विकल्प गलत हैं, क्योंकि उनमें प्रस्तावित क्षमता बदल दी गई है। दूरी और क्षमता दो अलग संख्याएं हैं और आपस में उलझ जाती हैं, इसलिए इन्हें अलग रखें, क्षमता मेगावाट में है और मार्ग की लंबाई किलोमीटर में। मंत्री के अनुसार इस कड़ी का उद्देश्य भरोसेमंद सीमा पार बिजली व्यापार संभव बनाना, स्वच्छ ऊर्जा का समावेश आसान करना और पूरे क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना है, इसी कारण भारत ने आसियान पावर ग्रिड पर बढ़े हुए समझौता ज्ञापन को लागू करने के प्रयासों का समर्थन किया।

पूरा लेख पढ़ें: 20वीं पूर्वी एशिया शिखर ऊर्जा मंत्री बैठक में भारत

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Q1.अंतरराष्ट्रीयआसान

भारत ने जिस 20वीं पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन ऊर्जा मंत्री बैठक में भाग लिया, वह किस शहर में हुई?

  1. A.जकार्ता, इंडोनेशिया
  2. B.मनीला, फिलीपींस
  3. C.कुआलालंपुर, मलेशिया
  4. D.बैंकॉक, थाईलैंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मनीला, फिलीपींस

व्याख्या

सही उत्तर मनीला, फिलीपींस है, जहां भारत का प्रतिनिधित्व विद्युत एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने किया। विकल्प A यानी जकार्ता इस बैठक के लिए गलत है, हालांकि वहां आसियान सचिवालय है, इसलिए इस समूह से जुड़े किसी भी प्रश्न में वह भरोसेमंद लगता है। विकल्प C यानी कुआलालंपुर यहां गलत है, क्योंकि मलेशिया का नाम इस खबर में दूसरी वजह से आता है, वह इंफाल से सिंगापुर तक प्रस्तावित भूमि गलियारे के रास्ते में पड़ने वाले देशों में है। विकल्प D यानी बैंकॉक भी इसी कारण गलत है, क्योंकि म्यांमार के साथ थाईलैंड भी उसी प्रस्तावित मार्ग का हिस्सा है। परीक्षा के लिए संस्करण संख्या यानी बीसवीं, मेजबान शहर तथा मंत्री द्वारा स्वागत की गई दोनों योजनाओं, आसियान ऊर्जा सहयोग कार्य योजना और आसियान भारत कार्य योजना को 2026 से 2030 की अवधि के साथ जोड़कर याद रखें।

Q2.अंतरराष्ट्रीयमध्यम

बैठक में बताए अनुसार 30 सितंबर 2026 तक भारत की स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता कितनी थी?

  1. A.458.8 गीगावाट
  2. B.508.8 गीगावाट
  3. C.558.8 गीगावाट
  4. D.608.8 गीगावाट
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 558.8 गीगावाट

व्याख्या

सही उत्तर 558.8 गीगावाट है। मंत्री के अनुसार इसमें 308 गीगावाट गैर-जीवाश्म स्रोतों से है, जो स्थापित क्षमता का पचपन प्रतिशत बैठता है और यही हिस्सा ऊर्जा परिवर्तन का मुख्य पैमाना माना जाता है। बाकी विकल्प गलत हैं, क्योंकि उनमें आंकड़ा बदल दिया गया है और ये वही निकट मान हैं जो किसी पिछली तिमाही से याद रह सकते हैं, क्योंकि क्षमता हर महीने बढ़ती है। दो जुड़े तथ्य बराबर ध्यान मांगते हैं। पहला, भारत ने गैर-जीवाश्म क्षमता का आधा पड़ाव जून 2025 में पार कर लिया, जो राष्ट्रीय निर्धारित योगदान में 2030 के लिए तय तारीख से पूरे पांच वर्ष पहले है। दूसरा, पीएम सूर्य घर के तहत 29 सितंबर 2026 तक लगभग 5.01 मिलियन छत पर सौर संयंत्र लग चुके थे, जिनसे 5.95 मिलियन परिवारों को लाभ मिला।

Q3.अंतरराष्ट्रीयकठिन

प्रधानमंत्री ने आसियान पावर ग्रिड के लिए 400 पेशेवरों के प्रशिक्षण की घोषणा किस सम्मेलन में की थी?

  1. A.2025 के 22वें आसियान भारत शिखर सम्मेलन में
  2. B.2023 के 18वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में
  3. C.नई दिल्ली के जी-20 शिखर सम्मेलन में
  4. D.2024 के 21वें आसियान भारत शिखर सम्मेलन में
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 2025 के 22वें आसियान भारत शिखर सम्मेलन में

व्याख्या

सही उत्तर 2025 के 22वें आसियान भारत शिखर सम्मेलन है, जहां प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि भारत ग्रिड कनेक्टिविटी पर चार सौ पेशेवरों को प्रशिक्षण देकर आसियान पावर ग्रिड पहल का सहयोग करेगा। राज्य मंत्री ने मनीला में आसियान भारत कार्य योजना के तहत गहरे सहयोग की बात रखते हुए इसी प्रतिबद्धता को याद किया। विकल्प B गलत है, क्योंकि यह घोषणा भारत-आसियान शृंखला की है, उस वर्ष के पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन की नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह घोषणा को उसी शृंखला के पिछले संस्करण में खिसका देता है, जो क्रमांकित सम्मेलनों के प्रश्नों में आम जाल है। विकल्प C गलत है, क्योंकि भारत की मेजबानी वाले जी-20 शिखर सम्मेलन का एजेंडा बहुत व्यापक था और उसमें यह विशेष प्रशिक्षण वादा शामिल नहीं था। याद रखें कि मंत्री ने आसियान पावर ग्रिड, क्षेत्रीय पारेषण और बहुपक्षीय विद्युत व्यापार को प्रमुख क्षेत्र बताया।

Q4.अंतरराष्ट्रीयमध्यम

आईसीएआर और सीएसआईआर-सीआरआई के सहयोग के कार्यान्वयन की निगरानी कौन करेगा?

  1. A.दोनों संस्थानों का संयुक्त कार्य समूह
  2. B.अफ्रीकी संघ आयोग
  3. C.खाद्य एवं कृषि संगठन का एक पैनल
  4. D.केवल विदेश मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. दोनों संस्थानों का संयुक्त कार्य समूह

व्याख्या

सही उत्तर दोनों संस्थानों का संयुक्त कार्य समूह है। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और फसल अनुसंधान संस्थान के प्रतिनिधि होंगे, यह सहयोग की प्रगति की समीक्षा करेगा तथा कार्यान्वयन का मार्गदर्शन करेगा, और इसकी बैठकें समय-समय पर नई दिल्ली तथा अक्रा में होंगी। विकल्प B गलत है, क्योंकि इस व्यवस्था में किसी महाद्वीपीय संगठन को यह भूमिका नहीं दी गई। विकल्प C भी गलत है, क्योंकि वर्णित निगरानी तंत्र में संयुक्त राष्ट्र की किसी एजेंसी के पैनल का उल्लेख नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि भारत और घाना के विदेश मंत्री हस्ताक्षर समारोह में उपस्थित रहे, परंतु मंत्रालय को कार्य कार्यक्रम का निगरानी निकाय नहीं बनाया गया। समझौते में वैज्ञानिकों तथा प्रौद्योगिकीविदों, जननद्रव्य एवं प्रजनन सामग्री, वैज्ञानिक जानकारी, विधियों और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान तथा दोनों देशों के संस्थानों के बीच सीधे संस्थागत संबंध की भी व्यवस्था है।

Q5.अंतरराष्ट्रीयमध्यम

भारत-घाना कृषि अनुसंधान समझौता ज्ञापन कितने समय के लिए प्रभावी रहेगा?

  1. A.तीन वर्ष
  2. B.पांच वर्ष
  3. C.सात वर्ष
  4. D.दस वर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पांच वर्ष

व्याख्या

सही उत्तर पांच वर्ष है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और घाना के फसल अनुसंधान संस्थान के बीच हुआ यह समझौता इसी अवधि के लिए संयुक्त कृषि अनुसंधान, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और कृषि प्रौद्योगिकियों के उपयोग एवं व्यावसायीकरण का ढांचा देता है। विकल्प A, C और D अन्य अवधियां बताते हैं, जो घोषित अवधि से मेल नहीं खातीं, इसलिए वे गलत हैं। अवधि के साथ कुछ और बातें याद रखनी चाहिए। काम का पहला चरण सब्जी फसलों के अनुसंधान पर है, जिसमें टमाटर अनुसंधान एवं विकास को विशेष रूप से चुना गया है, और भारत सिद्ध प्रौद्योगिकियों को बड़े पैमाने पर पहुंचाने तथा अधिक उपज वाली टमाटर किस्में लाने में सहयोग देगा, जिससे घाना घरेलू उत्पादन मजबूत कर सके। इसके बाद सहयोग कसावा, रतालू तथा अन्य कंद फसलों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन तक, तथा शीत भंडारण, शीतित परिवहन, छंटाई, श्रेणीकरण एवं प्रसंस्करण जैसे कटाई-पश्चात प्रबंधन तक फैलेगा।