अनुच्छेद 75 का कौन-सा खंड केंद्रीय मंत्रिपरिषद को लोक सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी बनाता है?
- A.खंड (1क)
- B.खंड (2)
- C.खंड (3)
- D.खंड (5)
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है खंड (3), जिसमें व्यवस्था है कि मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोक सभा के प्रति उत्तरदायी होगी। यही भारत की संसदीय शासन व्यवस्था का आधार है, क्योंकि मंत्रिपरिषद तभी तक पद पर रहती है जब तक उसे लोक सभा का विश्वास प्राप्त है। विकल्प A गलत है, क्योंकि खंड (1क) संख्या की सीमा तय करता है और प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद को लोक सभा की सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत तक सीमित रखता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि खंड (2) प्रसादपर्यंत का खंड है, जिसके अंतर्गत डॉ. एल. मुरुगन का इस्तीफा स्वीकार किया गया; यह कार्यकाल से जुड़ा है, सदन के प्रति उत्तरदायित्व से नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि खंड (5) एक अलग विषय से संबंधित है, कि लगातार छह महीने तक संसद के किसी सदन का सदस्य न रहने वाला मंत्री पद पर नहीं रह सकता।
पूरा लेख पढ़ें: राष्ट्रपति ने एल. मुरुगन का मंत्रिपरिषद से इस्तीफा स्वीकार किया
अभ्यास प्रश्न
डॉ. एल. मुरुगन का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा संविधान के किस प्रावधान के अंतर्गत स्वीकार किया गया?
- A.अनुच्छेद 74 का खंड (1)
- B.अनुच्छेद 75 का खंड (2)
- C.अनुच्छेद 77 का खंड (3)
- D.अनुच्छेद 78
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प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत के राष्ट्रपति ने, प्रधानमंत्री की सलाह पर, इसी खंड के अंतर्गत इस्तीफा स्वीकार किया; यह खंड व्यवस्था देता है कि मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →डॉ. एल. मुरुगन का इस्तीफा किसने और किसकी सलाह पर स्वीकार किया?
- A.प्रधानमंत्री ने, मंत्रिमंडल की सलाह पर
- B.उपराष्ट्रपति ने, प्रधानमंत्री की सलाह पर
- C.भारत के राष्ट्रपति ने, प्रधानमंत्री की सलाह पर
- D.लोक सभा अध्यक्ष ने, राष्ट्रपति की सलाह पर
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विज्ञप्ति में यही बात कही गई है और यह अनुच्छेद 75 की व्यवस्था के अनुरूप भी है, जिसके अनुसार मंत्रियों की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति करते हैं और मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, इसलिए इस्तीफा स्वीकार करने का अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एनएचएआई की नई प्रणाली में महत्वपूर्ण राजमार्ग संरचनाओं के डिजाइन की स्वतंत्र जांच मुख्य रूप से कौन करेगा?
- A.पैनल में शामिल आईआईटी और प्रतिष्ठित सरकारी तकनीकी संस्थान
- B.भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक
- C.केवल भारतीय मानक ब्यूरो
- D.राज्यों के लोक निर्माण विभाग
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प्रक्रिया के अनुसार प्राधिकरण के पैनल से तीन ऐसे संस्थान या फर्म प्रस्तावित होते हैं और परियोजना की जरूरत के हिसाब से एक या अधिक चुने जाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी बड़े नदी पुल के डिजाइन की स्वतंत्र जांच कब जरूरी होगी, जब उसका डिजाइन निर्वहन कम से कम हो:
- A.1,000 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड
- B.2,000 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड
- C.3,000 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड
- D.5,000 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड
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डिजाइन निर्वहन की यही सीमा है, जिस पर कोई बड़ा नदी पुल इस नई सत्यापन व्यवस्था में आ जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पुलों के डिजाइन की स्वतंत्र जांच से जुड़ी एनएचएआई की नीति किस तिथि से प्रभावी होगी?
- A.1 नवंबर 2026
- B.1 दिसंबर 2026
- C.1 जनवरी 2027
- D.1 अप्रैल 2027
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उस तिथि से स्वतंत्र सत्यापन की शर्त इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण मॉडल, हाइब्रिड एन्युटी मॉडल तथा बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर मॉडल पर दी जाने वाली हर नई राजमार्ग परियोजना पर लागू होगी, और उन परियोजनाओं पर भी जिनमें डिजाइन सत्यापन या प्रमाण जांच शुरू नहीं हुई थी।
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