अक्टूबर 2026 में कोलंबो पहुंचे भारतीय नौसेना के पहले प्रशिक्षण स्क्वाड्रन में कौन से पोत शामिल थे?
- A.आईएनएस विक्रांत, आईएनएस विक्रमादित्य और आईसीजीएस समुद्र
- B.आईएनएस तीर, आईएनएस सुजाता और आईसीजीएस सारथी
- C.आईएनएस शिवालिक, आईएनएस कदमत्त और आईसीजीएस वज्र
- D.आईएनएस तरंगिनी, आईएनएस सुदर्शिनी और आईसीजीएस अभिनव
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर आईएनएस तीर, आईएनएस सुजाता और आईसीजीएस सारथी है। इस तैनाती में ये तीनों पोत पहले प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के रूप में रवाना हुए और कोलंबो बंदरगाह पहुंचे, जहां श्रीलंका नौसेना ने नौसैनिक बैंड के साथ उनका औपचारिक स्वागत किया। इस संयोजन पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इनमें दो पोत नौसेना के हैं और तीसरा भारतीय तटरक्षक बल का, जिससे पता चलता है कि समुद्री प्रशिक्षुओं को तैयार करने का काम दोनों सेवाएं मिलकर करती हैं। विकल्प A में विमानवाहक पोतों के नाम हैं, जो प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के रूप में नहीं चलते। विकल्प C और D में भारत के ऐसे पोत हैं जो इस यात्रा का हिस्सा नहीं थे, हालांकि विकल्प D में दिए पालदार पोत एक अलग तरह का प्रशिक्षण देते हैं। स्क्वाड्रन को संक्षेप में 1टीएस कहा जाता है और यात्रा 26 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई।
पूरा लेख पढ़ें: नौसेना का पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन कोलंबो पहुंचा, पैसेक्स होगा
अभ्यास प्रश्न
इस बंदरगाह यात्रा के दौरान भारतीय और श्रीलंकाई नौसेना ने कौन सा अभ्यास करने की योजना बनाई?
- A.स्लाइनेक्स
- B.मिलन
- C.पैसेज एक्सरसाइज (पैसेक्स)
- D.गरुड़ शक्ति
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पैसेज एक्सरसाइज वह छोटा अभ्यास है जो दो नौसेनाओं के पोत साथ होने पर करते हैं, आमतौर पर तब जब बंदरगाह यात्रा के बाद एक पोत आगे की राह पकड़ता है, और इसमें चालक दल पैंतरेबाजी, संचार तथा संरचना बनाए रखने का अभ्यास साथ मिलकर करते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जिस महासागर परिकल्पना के अनुरूप यह बंदरगाह यात्रा बताई गई है, उसका पूरा अर्थ क्या है?
- A.क्षेत्र में सद्भाव, सुरक्षा और विकास के लिए समुद्री गठबंधन
- B.क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति
- C.साझा विकास और क्षेत्रीय मजबूती के लिए समुद्री प्रगति
- D.क्षेत्रों के बीच बंदरगाह सुरक्षा और विकास हेतु पारस्परिक सहायता
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यही भारत की घोषित समुद्री परिकल्पना है, और पहले प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की कोलंबो यात्रा को इसी के भीतर रखा गया है, क्योंकि यह दौरा एकतरफा मदद के बजाय साझा प्रशिक्षण, पेशेवर आदान-प्रदान और साझा समुद्री सुरक्षा पर टिका है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोतों के लिए निम्नलिखित में से कौन सा काम सूचीबद्ध नहीं है?
- A.समुद्री निगरानी
- B.बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा
- C.खोज एवं बचाव
- D.समुद्री डकैती रोकने के अभियान
उत्तर देखें
इन पोतों के लिए जो ज़िम्मेदारियां बताई गई हैं, वे हैं समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव, समुद्र में मौजूद अपतटीय प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, मानवीय सहायता और आपदा राहत तथा समुद्री डकैती रोकने के अभियान।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नए जलावतरित पोत सृष्टि के नाम का संस्कृत में अर्थ क्या है?
- A.विजय
- B.समुद्र
- C.रचना
- D.साहस
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रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस श्रेणी के पोतों के नाम भारत की समृद्ध विरासत से लिए जाते हैं और सृष्टि का अर्थ संस्कृत में रचना अथवा सृजन का कार्य है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अगली पीढ़ी का अपतटीय गश्ती पोत सृष्टि किस शिपयार्ड में जलावतरित किया गया?
- A.मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, मुंबई
- B.गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, गोवा
- C.कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि
- D.हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम
उत्तर देखें
यार्ड 1283, जिसका नाम सृष्टि है, वहीं 27 अक्टूबर 2026 को जलावतरित किया गया और इस अवसर पर रक्षा वित्त सचिव तथा भारतीय नौसेना और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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