अभय सिंह ने एशियाई खेलों में किस स्पर्धा में रजत पदक जीता?
- A.पुरुष सिंगल्स स्क्वैश
- B.पुरुष डबल्स स्क्वैश
- C.पुरुष सिंगल्स बैडमिंटन
- D.पुरुष सिंगल्स टेबल टेनिस
सही उत्तर
A. पुरुष सिंगल्स स्क्वैश
व्याख्या
सही उत्तर पुरुष सिंगल्स स्क्वैश है। अभय सिंह इस वर्ग में दूसरे स्थान पर रहे और प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पदक उनके कौशल तथा दृढ़ संकल्प के साथ-साथ वर्षों की मेहनत को दर्शाता है। विकल्प B उन्हें डबल्स वर्ग में दिखाता है, जबकि यह पदक सिंगल्स से जुड़ा है। विकल्प C और D पदक को बैडमिंटन तथा टेबल टेनिस की ओर ले जाते हैं, जो रैकेट के दो अन्य खेल हैं और इस परिणाम से उनका कोई संबंध नहीं है। स्क्वैश की जोड़ी को एक साथ याद रखें, क्योंकि दोनों पदक विजेताओं का उपनाम सिंह है और दोनों ने रजत जीता — अभय सिंह पुरुष सिंगल्स में और अनाहत सिंह महिला सिंगल्स में। दिन के अन्य दो पदक एथलेटिक्स से एन्सी सोजन तथा हरिता भद्रा ने दिलाए।
पूरा लेख पढ़ें: एशियाई खेल: भारत को स्क्वैश में दो रजत, ट्रैक पर दो पदक
अभ्यास प्रश्न
एशियाई खेलों की महिला सिंगल्स स्क्वैश स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली भारतीय खिलाड़ी कौन हैं?
- A.अनाहत सिंह
- B.हरिता भद्रा
- C.एन्सी सोजन
- D.जोशना चिनप्पा
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सही उत्तर: A. अनाहत सिंह
व्याख्या
सही उत्तर अनाहत सिंह हैं, जो महिला सिंगल्स स्क्वैश में दूसरे स्थान पर रहीं और जिनके प्रदर्शन को दुनिया के कुछ बेहतरीन खिलाड़ियों के सामने दिखाए गए शानदार कौशल के लिए सराहा गया। विकल्प B हरिता भद्रा एथलीट हैं, स्क्वैश खिलाड़ी नहीं — उन्होंने महिला 200 मीटर दौड़ में अपने पहले एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता। विकल्प C एन्सी सोजन ने महिला लंबी कूद में रजत पदक जीता, जो एथलेटिक्स की फील्ड स्पर्धा है। विकल्प D एक अन्य भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी का नाम है, जो इस अवसर पर बधाई पाने वाले पदक विजेताओं में शामिल नहीं थीं। इसके साथ यह तथ्य भी याद रखें कि पुरुष सिंगल्स स्क्वैश का रजत अभय सिंह को मिला, यानी भारत इस खेल के दोनों सिंगल्स वर्गों में उपविजेता रहा।
एन्सी सोजन ने एशियाई खेलों में किस स्पर्धा में रजत पदक जीता?
- A.महिला 200 मीटर
- B.महिला त्रिकूद
- C.महिला लंबी कूद
- D.महिला ऊंची कूद
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सही उत्तर: C. महिला लंबी कूद
व्याख्या
सही उत्तर महिला लंबी कूद है, जिसमें एन्सी सोजन रजत पदक के साथ दूसरे स्थान पर रहीं और जिनके प्रदर्शन को प्रधानमंत्री ने मजबूत तथा जोश भरा बताया। विकल्प A महिला 200 मीटर उस स्पर्धा का नाम है जिसमें हरिता भद्रा ने कांस्य जीता, और इन दो खिलाड़ियों को आपस में बदल देना सबसे आम गलती है। विकल्प B और D कूद की अन्य स्पर्धाएं हैं, जिनसे यह पदक नहीं जुड़ा। इन स्पर्धाओं में दिन का क्रम याद रखें — लंबी कूद में रजत, 200 मीटर में कांस्य तथा पुरुष और महिला सिंगल्स स्क्वैश, दोनों में रजत। चूंकि तीन पदक रजत और एक कांस्य थे, प्रश्न अक्सर किसी एक खिलाड़ी के पदक का रंग पूछता है, इसलिए हर नाम को उसकी स्पर्धा और रंग से जोड़ें।
हरिता भद्रा ने एशियाई खेलों की महिला 200 मीटर दौड़ में कौन सा पदक जीता और यह उपलब्धि क्यों खास रही?
- A.स्वर्ण, अपने पहले एशियाई खेलों में
- B.कांस्य, अपने पहले एशियाई खेलों में
- C.रजत, अपने दूसरे एशियाई खेलों में
- D.कांस्य, अपने तीसरे एशियाई खेलों में
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सही उत्तर: B. कांस्य, अपने पहले एशियाई खेलों में
व्याख्या
सही उत्तर कांस्य, अपने पहले एशियाई खेलों में है। हरिता भद्रा ने एशियाई खेलों में पहली बार उतरते ही महिला 200 मीटर दौड़ में पोडियम तक पहुंचकर कांस्य पदक जीता और प्रधानमंत्री के संदेश के अनुसार उन्होंने पूरे आत्मविश्वास तथा संकल्प के साथ दौड़ लगाई। विकल्प A पदक को स्वर्ण बता देता है, जो सही नहीं है। विकल्प C में पदक का रंग और उनका अनुभव, दोनों बदल दिए गए हैं तथा इस दौड़ में भारत को रजत नहीं मिला। विकल्प D रंग तो सही रखता है, पर उन्हें गलत तरीके से तीसरे एशियाई खेलों में दिखाता है। पहली बार वाली यह जानकारी अक्सर प्रश्न बन जाती है, इसलिए स्पर्धा, रंग और पदार्पण, तीनों साथ याद रखें। दिन का दूसरा एथलेटिक्स पदक एन्सी सोजन की लंबी कूद का रजत था।
एशियाई खेलों की जिस डेकाथलॉन स्पर्धा में भारत ने कांस्य जीता, वह कितने दिनों तक चलती है?
- A.एक दिन
- B.दो दिन
- C.तीन दिन
- D.चार दिन
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सही उत्तर: B. दो दिन
व्याख्या
सही उत्तर दो दिन है। तेजस्विन शंकर के कांस्य पदक की सराहना इस आधार पर हुई कि दो दिनों तक चलने वाली इतनी कठिन स्पर्धाओं में टिके रहने के लिए गजब की क्षमता, सहनशक्ति और पक्के इरादे की जरूरत होती है, और उन्होंने ये तीनों दिखाते हुए अपने अभियान का मजबूत समापन किया। विकल्प A यानी एक दिन गलत है, क्योंकि एक ही दिन में डेकाथलॉन की सभी स्पर्धाएँ नहीं समाई जा सकतीं। विकल्प C और D यानी तीन और चार दिन कार्यक्रम को बताए गए समय से आगे बढ़ा देते हैं। दो दिन का यह प्रारूप याद रखने योग्य है, क्योंकि इसी से समझ आता है कि डेकाथलॉन का पदक किसी एक कौशल के बजाय सर्वांगीण क्षमता की परीक्षा क्यों माना जाता है।
पारुल चौधरी ने एशियाई खेलों में किस स्पर्धा में कांस्य पदक जीता?
- A.महिला 1500 मीटर
- B.महिला 5000 मीटर
- C.महिला 3000 मीटर स्टीपलचेज
- D.महिला 10000 मीटर
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सही उत्तर: C. महिला 3000 मीटर स्टीपलचेज
व्याख्या
सही उत्तर महिला 3000 मीटर स्टीपलचेज है। पारुल चौधरी इस दौड़ में एशियाई खेलों में तीसरे स्थान पर रहीं और पोडियम तक पहुँचते हुए उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत समय भी दर्ज किया, जो इस कांस्य पदक को विशेष बनाता है। विकल्प A, B और D ट्रैक की सपाट दौड़ें हैं और वे सभी वास्तविक एथलेटिक्स स्पर्धाएँ हैं, परंतु यह पदक उनमें से किसी में नहीं जीता गया। स्टीपलचेज इन सपाट दौड़ों से इसलिए अलग है कि उसमें बाधाएँ और जल अवरोध पार करने होते हैं। प्रधानमंत्री ने इस प्रदर्शन को शानदार बताया और कहा कि उनके समर्पण तथा अटूट लगन ने देश को गौरवान्वित किया, इसलिए स्पर्धा, पदक का रंग और व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय एक साथ दोहराइए। इस दौड़ की दूरी 3000 मीटर है, इसलिए दूरी, बाधाओं वाली दौड़ का नाम और कांस्य पदक, ये तीनों बातें नोट्स में एक ही पंक्ति में रखनी चाहिए।