24वीं एनएमएसएआर बोर्ड बैठक में समीक्षित भारतीय खोज एवं बचाव क्षेत्र का विस्तार कितना है?
- A.2.4 मिलियन वर्ग किलोमीटर
- B.4.6 मिलियन वर्ग किलोमीटर
- C.7.8 मिलियन वर्ग किलोमीटर
- D.1.2 मिलियन वर्ग किलोमीटर
सही उत्तर
B. 4.6 मिलियन वर्ग किलोमीटर
व्याख्या
सही उत्तर 4.6 मिलियन वर्ग किलोमीटर है। अपनी चौबीसवीं बैठक में राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड ने इसी पूरे समुद्री विस्तार में बचाव अभियान चलाने की तैयारियों पर विचार किया और प्रौद्योगिकी एकीकरण, वास्तविक समय में सूचना साझा करना, संकट संकेतों का प्रबंधन, जलयान निगरानी तथा एजेंसियों के बीच समन्वय पर चर्चा की। विकल्प A, C और D में दिए आंकड़े इस क्षेत्र के लिए घोषित विस्तार से मेल नहीं खाते, इसलिए वे गलत हैं। यह आंकड़ा बैठक के बाकी विवरण के साथ याद रखना चाहिए, क्योंकि बैठक की अध्यक्षता महानिदेशक परमेश शिवमणि ने की, जो भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक और बोर्ड के अध्यक्ष हैं, यह बैठक अभ्यास के उद्घाटन वाले दिन ही हुई, और इसी में राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव पुरस्कार भी प्रदान किए गए। अध्यक्ष ने जोर दिया कि पिछले अभियानों और बहु-एजेंसी अभ्यासों से मिली सीख को वास्तविक तैयारी में बदलना चाहिए।
पूरा लेख पढ़ें: सारेक्स-2026 शुरू, पारादीप के पास 30 देश शामिल
अभ्यास प्रश्न
बहुराष्ट्रीय खोज एवं बचाव अभ्यास सारेक्स-2026 का समुद्री चरण कहां आयोजित हो रहा है?
- A.कोच्चि के निकट
- B.पारादीप के निकट
- C.पोर्ट ब्लेयर के निकट
- D.विशाखापत्तनम के निकट
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पारादीप के निकट
व्याख्या
सही उत्तर पारादीप के निकट है। रक्षा राज्य मंत्री ने 7 अक्टूबर 2026 को इस अभ्यास का उद्घाटन किया और इसका समुद्री चरण अगले दिन ओडिशा तट पर पारादीप के निकट होना तय था। इस अभ्यास में 30 मित्र विदेशी देशों के 32 प्रतिनिधि भाग लेने या पर्यवेक्षण करने वाले थे, साथ ही अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी। विकल्प A यानी कोच्चि गलत है, क्योंकि कोच्चि अरब सागर की ओर एक बड़ा नौसैनिक केंद्र है, परंतु इस अभ्यास के लिए वह स्थान नहीं बताया गया। विकल्प C यानी पोर्ट ब्लेयर भी गलत है, क्योंकि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारतीय खोज एवं बचाव क्षेत्र के भीतर आता है, फिर भी अभ्यास वहां नहीं हुआ। विकल्प D यानी विशाखापत्तनम भी गलत है, क्योंकि वह बड़ा पूर्वी बंदरगाह और नौसैनिक मुख्यालय है, पर घोषित स्थान पारादीप था। याद रखें कि इस अभ्यास में नौसेना, तटरक्षक बल, वायु सेना, तटीय पुलिस, बंदरगाह, नागरिक एजेंसियां और नौवहन समुदाय संपूर्ण-सरकार तथा संपूर्ण-राष्ट्र दृष्टिकोण के तहत एक साथ आए।
भारत की उपग्रह आधारित खोज एवं बचाव क्षमता का सही क्रम कौन-सा है?
- A.जियोसार, लियोसार, मीयोसार
- B.लियोसार, जियोसार, मीयोसार
- C.मीयोसार, लियोसार, जियोसार
- D.लियोसार, मीयोसार, जियोसार
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लियोसार, जियोसार, मीयोसार
व्याख्या
सही उत्तर लियोसार, जियोसार, मीयोसार है। भारत ने निम्न भू कक्षा खोज एवं बचाव से शुरुआत की, फिर भूस्थिर खोज एवं बचाव की ओर बढ़ा, और अब मध्यम भू कक्षा खोज एवं बचाव की दिशा में जा रहा है। मंत्री ने भारतीय भू कक्षा स्थानीय उपयोगकर्ता टर्मिनल यानी मीयोलुट के पूर्ण परिचालन क्षमता तक पहुंचने को इस क्षेत्र में बड़ी प्रगति बताया और इसरो तथा जुड़ी टीमों को बधाई दी। विकल्प A पहले दो चरणों को उलट देता है, इसलिए गलत है। विकल्प C मध्यम भू कक्षा क्षमता को पहले रख देता है, जो वास्तविक विकास क्रम के विपरीत है। विकल्प D भूस्थिर चरण को अंत में रखता है, जो भी गलत है। परीक्षा के लिए इस क्रम के साथ उसी दिन के अन्य तथ्य जोड़ लें, जैसे अभ्यास का नाम सारेक्स-2026, स्थान पारादीप, तीस विदेशी देशों की भागीदारी, तटरक्षक ध्येय वाक्य वयम् रक्षामः और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य।
विकासात्मक परियोजनाओं की परीक्षण फायरिंग के लिए प्रूफ रेंज में कितना समय आरक्षित किया गया है?
- A.प्रति माह एक दिन
- B.प्रति तिमाही तीन दिन
- C.प्रति छमाही पांच दिन
- D.प्रति वर्ष दस दिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्रति तिमाही तीन दिन
व्याख्या
सही उत्तर प्रति तिमाही तीन दिन है। संशोधित प्रक्रिया प्रूफ रेंज में यह समय सरकार द्वारा प्रायोजित विकासात्मक परियोजनाओं की परीक्षण फायरिंग के लिए खाली रखती है, जिसमें आईडीईएक्स, प्रौद्योगिकी विकास निधि और मेक मार्ग की परियोजनाएं तथा मंत्रालय की अन्य परियोजनाएं शामिल हैं, और उन विकासात्मक परियोजनाओं के लिए भी, जो स्वदेशी रक्षा उद्योग ने अपनी पहल पर शुरू की हैं। यह अंतिम बात महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी ऑर्डर से पहले उत्पाद विकसित करती कंपनी भी रेंज तक पहुंच पा सकेगी। विकल्प A, C और D आरक्षित समय के अन्य ढांचे बताते हैं, जो मंजूर व्यवस्था से मेल नहीं खाते। दस्तावेज का व्यापक उद्देश्य प्रूफ रेंज, फील्ड फायरिंग रेंज तथा परीक्षण सुविधाओं तक सरल, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल पहुंच देना है, साथ ही स्वदेशीकरण, नवाचार तथा रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना है।
संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया में मध्यस्थता के प्रावधान की जगह क्या रखा गया है?
- A.सुलह समझौता खंड
- B.अनिवार्य दीवानी न्यायालय संदर्भ
- C.रक्षा अनुबंधों के लिए लोकपाल
- D.विधि मंत्रालय के अधीन अधिकरण
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सुलह समझौता खंड
व्याख्या
सही उत्तर सुलह समझौता खंड है। पुरानी प्रक्रिया असहमतियों को मध्यस्थता में भेजती थी, और संशोधित प्रक्रिया उसकी जगह सरल तथा उद्योग-अनुकूल सुलह खंड लाती है, जिससे घरेलू निर्माताओं की समस्याएं जल्दी सुलझें, जिसे मंत्रालय व्यापार सुगमता से जोड़ता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि दीवानी न्यायालय में अनिवार्य संदर्भ की कोई व्यवस्था नहीं की गई। विकल्प C गलत है, क्योंकि इस उद्देश्य के लिए कोई लोकपाल नहीं बनाया गया। विकल्प D भी गलत है, क्योंकि ऐसे मामलों के लिए किसी अन्य मंत्रालय के अधीन नया अधिकरण नहीं बना। पूरे पैकेज को भी याद रखें, क्योंकि आईडीईएक्स, प्रौद्योगिकी विकास निधि, मेक मार्ग और मंत्रालय की अन्य विकासात्मक योजनाओं की परियोजनाओं के लिए प्रूफ तथा परीक्षण शुल्क माफ हैं, दस्तावेज में उद्योग के लिए खुली रेंज और प्रयोगशालाओं की सूची है, और शुल्क लागू होने पर उसकी गणना तथा भुगतान की विधि भी उसी प्रक्रिया में जोड़ दी गई है।
अक्टूबर 2026 में मंजूर संशोधित एसओपी के तहत प्रूफ और परीक्षण शुल्क किन परियोजनाओं के लिए माफ किए गए हैं?
- A.केवल विदेशी सहयोग वाली परियोजनाओं के लिए
- B.आईडीईएक्स, टीडीएफ, मेक और मंत्रालय की अन्य विकासात्मक परियोजनाओं के लिए
- C.केवल आयुध निर्माणियों की परियोजनाओं के लिए
- D.केवल एक निश्चित मूल्य से अधिक के निर्यात ऑर्डर के लिए
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आईडीईएक्स, टीडीएफ, मेक और मंत्रालय की अन्य विकासात्मक परियोजनाओं के लिए
व्याख्या
सही उत्तर आईडीईएक्स, टीडीएफ, मेक और रक्षा मंत्रालय की अन्य विकासात्मक परियोजनाएं है। इन परियोजनाओं के लिए प्रूफ तथा परीक्षण शुल्क माफ करना संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया की सबसे बड़ी वित्तीय राहत है, और इसका घोषित कारण रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। विकल्प A गलत है, क्योंकि विदेशी सहयोग वाले कार्य के लिए कोई छूट घोषित नहीं हुई, यह उपाय सीधे स्वदेशी उद्योग के लिए है। विकल्प C गलत है, क्योंकि राहत संस्थान के प्रकार से नहीं बल्कि विकासात्मक परियोजना के प्रकार से तय होती है, और प्रक्रिया पूरे भारतीय रक्षा उद्योग के लिए लिखी गई है। विकल्प D भी गलत है, क्योंकि छूट के लिए कोई निर्यात मूल्य सीमा तय नहीं की गई, हालांकि दस्तावेज अपने व्यापक उद्देश्यों में रक्षा निर्यात को सहारा देने की बात कहता है। साथ में यह भी याद रखें कि प्रक्रिया में डीआरडीओ, सरकारी गुणवत्ता आश्वासन एजेंसियों तथा तीनों सेनाओं के पास उपलब्ध रेंज और प्रयोगशालाओं की सूची दी गई है।