2011 की फुकुशिमा दाइची परमाणु दुर्घटना का तात्कालिक कारण था:
- A.असफल सुरक्षा परीक्षण
- B.भूकंप और उसके बाद आई सुनामी
- C.नियंत्रण कक्ष में तोड़फोड़
- D.टरबाइन कक्ष में आग
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, भूकंप और उसके बाद आई सुनामी है। 11 मार्च 2011 के तोहोकू भूकंप ने रिएक्टरों को डिजाइन के अनुसार बंद कर दिया, परंतु कुछ मिनट बाद आई सुनामी ने जापान के प्रशांत तट पर स्थित फुकुशिमा दाइची संयंत्र के आपातकालीन डीजल जनित्रों को डुबो दिया। बिजली न रहने पर शीतलन प्रणाली ठप पड़ी, तीन रिएक्टर क्रोड पिघले और हाइड्रोजन विस्फोटों ने भवन तोड़ दिए। विकल्प A गलत है, क्योंकि असफल सुरक्षा परीक्षण से 1986 में चेर्नोबिल हुआ था, फुकुशिमा नहीं; स्तर 7 की इन दो दुर्घटनाओं में यही सबसे आम भ्रम है। विकल्प C गलत है, क्योंकि इसमें कोई तोड़फोड़ नहीं थी; इसे अपर्याप्त सुरक्षा वाले स्थल पर प्राकृतिक आपदा माना जाता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि टरबाइन कक्ष की आग इसका दर्ज कारण नहीं है। क्रम याद रखें: भूकंप, सुनामी, बिजली का नाश, शीतलन का नाश, गलन।
पूरा लेख पढ़ें: प्रमुख पर्यावरणीय आपदाएं: भोपाल, चेर्नोबिल और मिनामाटा
अभ्यास प्रश्न
सभी देखें1984 की भोपाल गैस त्रासदी में यूनियन कार्बाइड संयंत्र से रिसी गैस थी:
- A.मिथाइल आइसोसाइनेट
- B.कार्बन मोनोऑक्साइड
- C.क्लोरीन
- D.फॉस्जीन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, मिथाइल आइसोसाइनेट है। मिथाइल आइसोसाइनेट यानी एमआईसी भोपाल के यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड संयंत्र में कार्बारिल कीटनाशक बनाने के मध्यवर्ती रसायन के रूप में भंडारित था। एक टैंक में पानी चले जाने से तीव्र अभिक्रिया शुरू हुई और 2-3 दिसंबर 1984 की रात गैस आसपास की बस्तियों पर फैल गई। विकल्प B गलत है, क्योंकि कार्बन मोनोऑक्साइड अपूर्ण दहन से बनती है और यहां उसकी कोई भूमिका नहीं थी, हालांकि दोनों रंगहीन विषैली गैसें होने से भ्रम होता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि क्लोरीन भोपाल में शामिल नहीं थी; वह प्रथम विश्वयुद्ध और जल शोधन दुर्घटनाओं से याद की जाती है। विकल्प D गलत है, क्योंकि फॉस्जीन आइसोसाइनेट बनाने में काम आती है और कभी-कभी गौण घटकों में गिनी जाती है, पर त्रासदी का नाम उससे नहीं जुड़ा। परीक्षा केवल एमआईसी नाम पूछती है।
भोपाल गैस त्रासदी किस रात हुई थी?
- A.2-3 दिसंबर 1984
- B.26 अप्रैल 1986
- C.11 मार्च 2011
- D.10 जुलाई 1976
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, 2-3 दिसंबर 1984 है। भोपाल के यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड संयंत्र से रिसाव 2 दिसंबर 1984 की देर रात शुरू हुआ और गैस 3 दिसंबर के तड़के तक फैलती रही; इसी कारण भारत में 2 दिसंबर को राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जाता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि 26 अप्रैल 1986 यूक्रेनी सोवियत गणराज्य में चेर्नोबिल रिएक्टर विस्फोट की तिथि है, जिसे संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय चेर्नोबिल आपदा स्मृति दिवस के रूप में मनाता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि 11 मार्च 2011 को तोहोकू भूकंप और सुनामी आई थी, जिससे जापान का फुकुशिमा दाइची संयंत्र डूबा। विकल्प D गलत है, क्योंकि 10 जुलाई 1976 इटली के सेवेसो में डाइऑक्सिन रिसाव की तिथि है, जिससे यूरोप का सेवेसो निर्देश बना। इन चार तिथियों को अलग-अलग याद रखना ही इस प्रश्न का उद्देश्य है।
1986 की चेर्नोबिल परमाणु आपदा जिस संयंत्र में हुई, वह आज किस देश में स्थित है?
- A.रूस
- B.बेलारूस
- C.यूक्रेन
- D.कजाखस्तान
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, यूक्रेन है। प्रिपयात नगर के पास स्थित चेर्नोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र की रिएक्टर संख्या 4 में 26 अप्रैल 1986 को विस्फोट हुआ। वह स्थान तब सोवियत संघ के यूक्रेनी सोवियत समाजवादी गणराज्य में था और आज स्वतंत्र यूक्रेन में है, इसलिए प्रश्न सामान्यतः वर्तमान देश के रूप में पूछा जाता है। विकल्प B सबसे आकर्षक भ्रम है पर गलत है: बेलारूस हवा की दिशा में पड़ता था और उस पर रेडियोधर्मी गिरावट का बड़ा हिस्सा गिरा, परंतु संयंत्र बेलारूस की भूमि पर नहीं था। विकल्प A गलत है, क्योंकि रूस सोवियत संघ का उत्तराधिकारी राज्य होने पर भी चेर्नोबिल उसमें नहीं था; 1957 की किश्तिम दुर्घटना वाला मायाक संयंत्र रूस में है। विकल्प D गलत है, क्योंकि कजाखस्तान सेमीपलातिंस्क परमाणु परीक्षण स्थल से जुड़ा है, चेर्नोबिल से नहीं।
जापान में 1956 में पहचाना गया मिनामाटा रोग किस तत्व की विषाक्तता से होता है?
- A.कैडमियम
- B.पारा
- C.सीसा
- D.आर्सेनिक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, पारा है। चिसो कॉर्पोरेशन ने कुमामोटो प्रांत की मिनामाटा खाड़ी में मिथाइलमर्करी यौगिक छोड़े; यह पारा मछलियों और शंख-सीपियों के रास्ते उन लोगों के शरीर में जमा हुआ जो उन्हें खाते थे और उसने केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला किया, जिससे सुन्नपन, संतुलन का नाश, अंधापन और जन्मजात विकृति हुई। इसी रोग के नाम पर पारा संबंधी मिनामाटा अभिसमय 2013 में कुमामोटो में अंगीकृत हुआ। विकल्प A गलत है, क्योंकि कैडमियम से तोयामा प्रांत की जिंजू नदी घाटी में इताई-इताई रोग होता है, जो इसका सहचर प्रश्न है। विकल्प C गलत है, क्योंकि सीसा विषाक्तता को प्लंबिज्म कहा जाता है और वह रंग, पाइप तथा बैटरी के काम से जुड़ी है। विकल्प D गलत है, क्योंकि भूजल से होने वाली आर्सेनिक विषाक्तता पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की समस्या है, जहां वह आर्सेनिकोसिस करती है।
जापान की जिंजू नदी घाटी से सूचित इताई-इताई रोग किसकी विषाक्तता से होता है?
- A.कैडमियम
- B.फ्लोराइड
- C.पारा
- D.निकल
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, कैडमियम है। तोयामा प्रांत की जिंजू नदी में कैडमियम युक्त खनन कचरा गया और सिंचित धान तथा पेयजल के रास्ते लोगों तक पहुंचा। कैडमियम गुर्दों को नष्ट करता है और हड्डियों को नरम कर देता है, जिससे साधारण उपयोग में ही हड्डियां टूट जाती थीं; जापानी नाम इताई-इताई रोगियों की दर्द भरी पुकार है और इस दशा को ऑस्टियोमलेशिया सहित ऑस्टियोपोरोसिस भी कहा जाता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि अधिक फ्लोराइड से फ्लोरोसिस होता है, जिसमें दांत धब्बेदार और अंग टेढ़े हो जाते हैं; भारत में यह राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ भागों की समस्या है। विकल्प C गलत है, क्योंकि पारा मिनामाटा रोग का कारण है और इन दोनों में सर्वाधिक भ्रम होता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि निकल संपर्क त्वचाशोथ से जुड़ा है। जोड़ी याद रखें: पारा-मिनामाटा, कैडमियम-इताई-इताई।