1857 के विद्रोह के बाद हरियाणा के जिलों सहित दिल्ली क्षेत्र किस प्रांत में मिलाया गया?
- A.पंजाब
- B.अवध
- C.बंगाल
- D.राजपूताना
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, पंजाब। 1858 में सरकार ने दिल्ली क्षेत्र को उत्तर-पश्चिम प्रांत से हटाकर पंजाब में मिला दिया, आंशिक रूप से विद्रोह में इस क्षेत्र की भागीदारी के दंड के रूप में और आंशिक रूप से इसलिए कि पंजाब का प्रशासन स्वामिभक्त तथा प्रभावी बना रहा था। इसलिए हरियाणा के जिले 1966 में अलग हरियाणा राज्य बनने तक पंजाब का भाग रहे।
विकल्प B गलत है क्योंकि अवध 1856 में मिलाया जा चुका था और विद्रोह के बाद स्वयं चीफ कमिश्नर के अधीन रखा गया। विकल्प C गलत है क्योंकि बंगाल अलग प्रेसीडेंसी थी और यह हस्तांतरण क्षेत्र को पश्चिम की ओर ले गया, पूर्व की ओर नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि राजपूताना रियासतों की एजेंसी था, ऐसा प्रांत नहीं जिसमें ब्रिटिश जिले मिलाए जा सकें।
पूरा लेख पढ़ें: 1857 और हरियाणा में स्वतंत्रता संग्राम: नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंहरियाणा क्षेत्र में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया और नसीबपुर का युद्ध लड़ा?
- A.राजा नाहर सिंह
- B.राव तुलाराम
- C.नवाब अब्दुर रहमान खाँ
- D.लाला हुकमचंद जैन
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अहीरवाल क्षेत्र के रेवाड़ी के इस शासक ने 1857 में वहाँ का प्रशासन अपने हाथ में लिया, सेना खड़ी की, रामपुरा में तोपें ढलवाईं और दिल्ली की विद्रोही सरकार को सहायता भेजी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →16 नवंबर 1857 को लड़ा गया नसीबपुर का युद्ध किस नगर के पास हुआ?
- A.नारनौल
- B.हाँसी
- C.रोहतक
- D.अंबाला
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नसीबपुर आज के हरियाणा के दक्षिण में नारनौल के पास है, और वहीं राव तुलाराम की सेना ने, राव कृष्ण सिंह तथा विद्रोही पक्ष की टुकड़ियों के साथ, ब्रिटिश सेना का सामना किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राव तुलाराम का देहांत 1863 में किस स्थान पर हुआ?
- A.रेवाड़ी
- B.दिल्ली
- C.काबुल
- D.रंगून
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नसीबपुर की पराजय के बाद राव तुलाराम अंग्रेजों के विरुद्ध विदेशी सहायता की खोज में भारत से निकले, ईरान तथा मध्य एशिया की यात्रा की, और गठबंधन बनाने के प्रयास में ही 23 सितंबर 1863 को काबुल में उनका देहांत हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विद्रोह में भाग लेने के कारण जनवरी 1858 में मृत्युदंड पाए राजा नाहर सिंह किस रियासत के शासक थे?
- A.झज्जर
- B.बल्लभगढ़
- C.फर्रुखनगर
- D.बहादुरगढ़
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वर्तमान फरीदाबाद जिले में स्थित बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह ने दिल्ली के विद्रोहियों का पक्ष लिया, और नगर पुनः अंग्रेजों के हाथ आने पर उन्हें बंदी बनाकर मुकदमे के बाद जनवरी 1858 में दिल्ली के चाँदनी चौक में फाँसी दी गई तथा उनकी रियासत जब्त कर ली गई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लाला हुकमचंद जैन और मुंशी जीवनलाल को 1858 में किस स्थान पर और किस आरोप में फाँसी दी गई?
- A.रेवाड़ी में, सेना खड़ी करने के आरोप में
- B.हाँसी में, मुगल दरबार से पत्र-व्यवहार के आरोप में
- C.रोहतक में, खजाना लूटने के आरोप में
- D.हिसार में, अभिलेख जलाने के आरोप में
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दिल्ली के पतन के बाद मिले पत्रों से यह सामने आया कि हाँसी के इन दोनों व्यक्तियों ने विद्रोह के समर्थन में मुगल दरबार को लिखा था, और मुकदमे के बाद जनवरी 1858 में उन्हें वहीं फाँसी दी गई तथा उनकी संपत्ति जब्त कर ली गई।
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